मुशर्रफ़ अदालत में पेश हों, वरना गिरफ़्तारी पर 'फैसला'

परवेज़ मुशर्रफ़
Image caption पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि मुक़दमा राजनीति से प्रेरित है.

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के ख़िलाफ़ देशद्रोह के मुकदमे की सुनवाई करने वाले विशेष अदालत ने उन्हें दो जनवरी को हर हाल में अदालत में पेश होने का आदेश दिया है.

अदालत का यह भी कहना था कि आरोपी के अदालत में पेश न होने के मामले में अदालत उनकी गिरफ़्तारी के बारे में फैसला देगी.

अदालत का कहना था कि अभी तक अदालत इस मामले में धैर्य का प्रदर्शन कर रही है.

परवेज़ मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे की सुनवाई बुधवार सुबह हुई जबकि वह खुद सुरक्षा चिंताओं के कारण अदालत में पेश नहीं हुए हैं.

न्यायालय में सुनवाई के दौरान उनके वकील अहमद रज़ा कसूरी ने बताया कि इस्लामाबाद के बाहरी इलाक़े में स्थित मुशर्रफ़ के घर के पास और विस्फोटक मिले थे.

उन्होंने कहा, "सुरक्षा ख़तरों के मद्देनज़र मुशर्रफ़ अदालत के सामने पेश होने में असमर्थ हैं."

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत के न्यायाधीश का कहना था कि अदालत इसलिए उनके वारंट गिरफ़्तारी जारी नहीं कर रही क्योंकि वह देश के पूर्व राष्ट्रपति और थल सेनाध्यक्ष रहे हैं ताकि किसी को शर्मिंदगी न उठानी पड़े .

सरकारी टीवी चैनल के अनुसार मुशर्रफ के वकील ने बतौर सुरक्षा उपाय अदालत में मुशर्रफ खुद उपस्थिति से उन्मुक्ति के लिए आवेदन जमा कराया है.

उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि उनको पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी.

यह अभियोग उन पर 2007 में संविधान निलंबित करने और आपातकाल लगाने के मामले में चलाया जा रहा है.

Image caption परवेज़ मुशर्रफ़ के अदालत जाते समय रास्ते में बम मिले थे.

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मुक़दमा पिछले हफ़्ते शुरू होने वाला था, लेकिन अदालत के उनके रास्ते में बम मिलने की ख़बरों के बाद मुक़दमा टाल दिया गया था.

मुशर्रफ़ सभी आरोपों से इनकार करते हैं और कहते हैं कि सारे अभियोग राजनीति से प्रेरित हैं.

70 साल के मुशर्रफ़ पहले सैन्य शासक हैं, जिनको देशद्रोह के अभियोग का सामना करना पड़ेगा. दोष साबित होने पर उनको फांसी या उम्रक़ैद की सज़ा हो सकती है.

उनके ऊपर हत्या और न्यायपालिका पर रोक लगाने की कोशिश के भी आरोप हैं.

पक्षपातपूर्ण नज़रिया

बचाव पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान में उनके ख़िलाफ़ निष्पक्ष मुक़दमा नहीं हो सकता. बचाव पक्ष के वकील अनवर मंसूर ने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उनके 'मुवक्किल के ख़िलाफ़ पक्षपातपूर्ण नज़रिया' रखते हैं.

24 दिसंबर को मुशर्रफ़ के वकीलों ने कहा कि अदालत के उनके रास्ते में बमपाया गया था. इसलिए वह सुरक्षा ख़तरों के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकते.

इसके बाद न्यायालय ने मुशर्रफ़ को ख़ुद पेश होने से छूट दे दी थी.

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