ब्रिटेनः लाखों युवाओं के लिए अर्थहीन है जीवन

  • 2 जनवरी 2014
ब्रितानी बेरोजगार युवा
Image caption सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रोजगारी की दर साल 2009 के बाद के सबसे निचले स्तर पर है.

प्रिंसेज ट्रस्ट चैरिटी के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में साढ़े सात लाख से अधिक युवाओं में जीने की इच्छा समाप्त हो चुकी है.

ट्रस्ट का कहना है कि यहां के बेरोजगार युवाओं में से करीब एक तिहाई ने कभी न कभी आत्महत्या पर विचार किया है.

ट्र्स्ट ने कहा है कि निराशा में डूबते इन बेरोजगार युवाओं को बचाने के लिए फौरी कदम उठाने की ज़रूरत है.

ब्रितानी सरकार ने कहा है कि वो इन युवाओं को काम दिलाने के लिए 'हर संभव प्रयास' कर रही है.

पिछले माह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेनमें बेरोजगारी की दर साल 2009 के बाद के सबसे निम्न स्तर पर पहुंच गई है. दूसरी तिमाही में बेरोजगारों की संख्या 99 हज़ार से बढ़कर 23 लाख 90 हज़ार हो गई.

'द प्रिंस ट्रस्ट मैकक्योरी यूथ इंडेक्स' 16 से 25 साल के 2,161 युवाओं से साक्षात्कार पर आधारित है. इनमें से 281 ऐसे युवा हैं जो कुछ नहीं करते. इसमें से भी 166 ऐसे हैं जो छह माह से अधिक से बेरोजगार हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रतिभागियों में से नौ फ़ीसदी ने माना कि उनके जीने का कोई मतलब नहीं है. इस नौ फ़ीसदी को आधार बनाया जाए तो जिंदगी को लेकर निराश ब्रिटेनमें कुल युवाओं की संख्या करीब 7,51,230 बैठती है. इन साढ़े सात लाख से अधिक युवाओं का मानना है कि उनके जीने का कोई मतलब नहीं है.

निराशाभरी सोच

इतना ही नहीं बेकार युवकों यानी जो न तो पढ़ाई करते हैं और न ही नौकरी और न ही कुछ और, उनमें ऐसी निराशाभरी सोच रखने वालों का प्रतिशत 21 है.

शोध में पाया गया कि लंबे समय से बेरोजगार हर तीन में से एक युवक ऐसी निराशा से ग्रसित है, जबकि करीब हर चौथा बेरोजगार खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुका है.

रिपोर्ट में पाया गया कि 40 फीसदी बेरोजगार युवकों में मानसिक परेशानी के लक्षण दिखे.

रिपोर्ट के अनुसार करीब तीन चौथाई (72 फ़ीसदी) बेरोजगारों के कोई ऐसे दोस्त या करीबी नहीं थे, जिनसे वे अपनी दिल की बात कह सकें.

प्रिंस ट्रस्ट की मुख्य कार्यकारी मार्टिना मिलबर्न का कहना है, ''बेरोजगारी का परिणाम बेहद खतरनाक होने वाला है, इससे युवाओं के लंबी मानसिक परेशानी से ग्रसित होने की आशंका है.''

उन्होंने कहा कि हज़ारों लोग ऐसे हैं जो सालों के संघर्ष के बाद जब सुबह उठते हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी का कोई मतलब नहीं है.

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चार लाख चालीस हज़ार ऐसे युवा हैं जो लंबे समय से बेरोजगार हैं और उन्हें तुरंत सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत है.

ब्रिटेन के कार्य और पेंशन विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकार हर वह प्रयास कर रही है जिससे कि युवा लोगों को काम पर लगाया जा सके और यही कारण है कि साल 2010 की तुलना में बेरोजगारी भत्ता लेने वालों की संख्या में 1,06000 लोगों की कमी आई है.

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