क्या आने वाला साल पिछले से बेहतर होगा?

  • 3 जनवरी 2014
छुट्टियाँ, खुशी

साल 2013 ख़त्म हो गया और अब मतदान सर्वेक्षण करने वाले यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि दुनिया भर में लोग अपनी ज़िंदगी के बारे में और आने वाले 12 महीनों के बारे में क्या सोचते हैं?

बीबीसी के वैश्विक मामलों के संवाददाता, पॉल एडम्स, ने इन निष्कर्षों की पड़ताल की.

आम आदमी

क्या दुनिया बेहतर हो रही है? 1977 से ही दुनिया की राय का सर्वेक्षण करने वाले विन/गेलप इंटरनेशनल, यह सवाल दुनिया भर में लोगों से पूछ रहे हैं. सवाल के जवाब 2013 की तस्वीर को क्या उजला बनाते हैं?

इस साल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ. 2004-05 के उच्चतम स्तर से दुनिया भर में ख़ुशी का आंकड़ा कम है लेकिन 1977 में, जबसे मतदान शुरू हुए हैं तबसे ऊपर की ओर उठता ग्राफ़ स्पष्ट है.

(मोबाइलः ये कहाँ आ गए हम)

करीब 50% लोगों का कहना था कि 2013 के मुकाबले 2014 बेहतर रहेगा.

इसके विपरीत जवाब सिर्फ़ 1990 में मिला था जब लोगों ने कहा था कि आने वाला साल बीते से ख़राब रहेगा.

डॉक्टर इजाज़ गिलानी विन/गेलप इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष हैं. वह कहते हैं राज्य की भूमिका में दुनिया भर में कमी आने से धीरे-धीरे आम आदमी सशक्त हुआ है.

समृद्धि

लेकिन 2005 में लगे धक्के का क्या? पिछले दशक के मध्य में उपभोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक आशावाद को तभी धक्का पहुंचा दिया था जब 2008 में आर्थिक मंदी का असर दुनिया भर में दिखना शुरू हुआ था.

(वो साल जिसमें हम मोबाइल हो गए)

ध्यान रखने की बात यह है कि 85% लोग उत्तरी अमरीका और यूरोप से बाहर रहते हैं.

एक बात औरः 2014 के बारे में अच्छा महसूस करने का मतलब यह नहीं है कि यह आर्थिक रूप से समृद्धि लाएगा. विन/गेलप के अनुसार दुनिया भर में 32% सोचते हैं कि यह साल समृद्धि लाएगा और 30% सोचते हैं कि यह नहीं लाएगा.

इस साल पहली बार विन/गेलप उन तीन सवालों को भी शामिल करने को तैयार हो गया जो बीबीसी के रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में श्रोताओं ने पूछे थे. इनसे कुछ मज़ेदार हेडलाइन मिलती हैं.

अनिश्चितता

घर वहीं है, जहां दिल है? बड़ी संख्या में लोग इस बात से सहमत होंगे लेकिन जो विदेश में बसना चाहते हैं या इसका मौका चाहते हैं, उनके बीच ऑस्ट्रेलिया और कनाडा भी अमरीका की तरह ही लोकप्रिय हैं.

अमरीका का सपना अब भी मौजूद है लेकिन उतना शानदार नहीं रह गया है.

(गर्भवती होने के लिए...)

अमरीका में शरणार्थियों पर जारी बहस से शायद यह संदेश जाने लगा है कि दुनिया भर से "एकत्र लोगों" का अब वहां उतना स्वागत नहीं है, जितना कभी हुआ करता था.

आश्चर्यजनक रूप से मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका, जहाँ अरब स्प्रिंग ने भारी राजनीतिक अनिश्चितता पैदा की है, वहां से बड़ी संख्या में लोग बाहर नहीं जाना चाहते.

और जो जाना भी चाहते हैं उनके लिए सऊदी अरब अमरीका से ज़्यादा पसंदीदा जगह है.

अमरीका के लिए इससे बुरी, लेकिन पूरी तरह से अचंभित करने वाली नहीं, ख़बर यह है कि कभी अधीर और कभी अनिच्छुक दुनिया का यह पुलिसकर्मी सबसे ज़्यादा नफ़रत का पात्र है.

परिणाम

कुछ क्षेत्रों (मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका) के बारे में यह अनुमान मुताबिक है और कुछ जगह नहीं.

(खूबसूरत रहती हैं स्त्रियाँ)

पूर्वी यूरोप का यह आंकड़ा 32% पर है जिसमें रूस और यूक्रेन का भारी हिस्सा हो सकता है. लेकिन पूरे पश्चिमी यूरोप में किशोरों में यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

अमरीका में दशकों तक अमरीकी छेड़छाड़ के अजीब परिणाम नज़र आ रहे हैं. इसके पड़ोसी मैक्सिको (37%) और कनाडा (17%) को इससे दिक्कतें हैं.

खुद अमरीकी (13%) अपने देश को एक खतरे के रूप में देखते हैं.

वैश्विक खतरे के रूप में पाकिस्तान का अवांछनीय दूसरा स्थान और अमरीका के उसकी तरफ़ उदासीनता से उसके विरोधी और पड़ोसी भारत में 15% लोग इससे नाराज़ हैं.

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