कुछ-कुछ देर पर उपवास से ज़्यादा फ़ायदा

  • 24 जनवरी 2014

जब मैंने कुछ-कुछ समय के अंतर से किए जाने वाले उपवास वाली ख़ुराक के चिकित्सीय परीक्षण में हिस्सा लिया तो इससे मेरे शरीर में ऐसे कई बदलाव आए, जिससे मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ.

इसके तहत हर महीने पांच दिनों तक बहुत कम भोजन करने से मेरा वज़न घटा और मुझे भूख महसूस हुई. मैंने कई बार स्वयं को अधिक सतर्क पाया, हालांकि मैं आसानी से थक जाता था. लेकिन इसके अलावा भी कुछ और प्रभाव थे, जो संभवतया अधिक महत्वपूर्ण थे.

पांच दिन के उपवास के हर चक्र में, जब मैं एक औसत व्यक्ति की ख़ुराक का चौथाई भोजन खाता था, तब मैंने दो से चार किग्रा वज़न कम किया. लेकिन जब 25 दिनों तक सामान्य रूप से भोजन करने के बाद अगला चक्र शुरू होता था, मेरा वज़न कमोबेश पहले जितना ही हो जाता था.

लेकिन इस ख़ुराक से होने वाले दूसरे सारे परिणाम एकाएक समाप्त नहीं होते थे.

यूएससी के लॉन्गीविटी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. वाल्टर लोंगू ने कहा, "हम देख रहे थे की सामान्य ख़ुराक पर आने पर भी उपवास के दौरान होने वाले प्रभाव जारी रहते थे." उन्होंने ऐसे ही परिणाम चूहों पर भी देखे.

उन्होंने यह भी कहा, "यह बहुत अच्छी ख़बर थी क्योंकि यह वही परिणाम था जिसकी हम अपेक्षा कर रहे थे."

चिकित्सीय परीक्षणों से पता चलता है कि उपवास के दौरान मेरा रक्तचाप 10 फ़ीसदी तक कम हो गया. हालांकि उपवास के बाद मेरे वज़न की तरह ही मेरा रक्तचाप भी अपनी मूलावस्था में आ गया, जो बहुत स्वस्थ हालत में नहीं था.

इसके बाद शोधकर्ता इस बात की जांच करेंगे की क्या उपवास के चक्र दोहराने से लोगों के रक्ताचाप को लंबे समय तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है अथवा नहीं?

आईजीएफ़-1 हार्मोन

विवादास्पद रूप से सबसे रूचिकर बदलाव आईजीएफ़-1 के नाम से जाने जाना वाले एक वृद्धिकारक हार्मोन में देखा गया. आईजीएफ़-1 का उच्च स्तर, जो यकृत से पैदा होने वाले एक प्रोटीन है, त्वचा, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के लिए ज़िम्मेवार माना जाता है. जबकि इसका निचला स्तर इन बीमारियों के जोखिम को कम करता है.

लोंगू ने कहा, "जानवरों पर किए गए अध्ययन के दौरान हमने इसे एक वृद्धिकारक के रूप में देखा है, जो बहुत कुछ बुढ़ापे और कैंसर समेत कई तरह की बीमारियों से जुड़ा हुआ है."

चूहे पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक ख़ुराक, जिसका मेरा अनुभव रहा है, सामान्य ख़ुराक पर लौटने के बाद आईजीएफ-1 के स्तर को कम करने और एक समय तक स्वस्थ रहने में सहायक है. मेरे आंकड़े भी ऐसा ही दर्शाते हैं.

लोंगू ने मुझे बताया, "आपके आईजीएफ-1 स्तर में चमात्कारिक रूप से कमी होती है, क़रीब 60 फीसदी तक और जब आप फिर सामान्य ख़ुराक पर आते हैं तो इसका स्तर बढ़ जाता है, फिर भी 20 फ़ीसदी तक ही."

उन्होंने कहा, "इस तरह की कमी किसी व्यक्ति में कुछ तरह के कैंसर होने की संभावनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है."

इक्वाडोर के लोगों की छोटी सी जनसंख्या पर किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि उन्हें बामुश्किल ही कैंसर और अन्य उम्र से जुड़ी बीमारियां होती हैं. इन लोगों में वृद्धिकारक हार्मोन की कमी होने की वजह से आईजीएफ़-1 का स्तर काफी कम होता है.

मेरे रक्त परीक्षणों से भी पता चला की आईजीएफ़-1 का सबसे बड़ा नाशक, जो आईजीएफ़बीपी-1 कहलाता है, उपवास के दौरान काफ़ी अधिक हो गया था. यहां तक कि मेरे सामान्य ख़ुराक लेने पर आईजीएफ़बीपी-1 का स्तर मेरे सामान्य स्तर से अधिक था, लोंगू के मुताबिक़ इसका मतलब था की मेरा शरीर अब ऐसी अवस्था में आ चुकी थी, जो स्वस्थ बुढ़ापे में सहायक है.

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