चीन के बदनाम श्रमिक शिविर हुए बंद

चीन के सरकारी समाचार पत्र बीजिंग न्यूज़ ने इस सप्ताह बताया कि शहर में श्रमिक शिविरों के माध्यम से पुनर्शिक्षा कार्यक्रम के सभी क़ैदियों को रिहा कर दिया गया है और साइन बोर्ड को हटा लिया गया है.

ऐसे में मैं शंघाई श्रमिक शिविर का मुआयना करने गया.

थोड़ी खोजबीन करने पर सभी पते इंटरनेट पर मिल गए.

पिछले पांच दशक से अधिक समय से ये शिविर एक ऐसी व्यवस्था का हिस्सा थे जिसका इस्तेमाल कई लाख लोगों को बिना किसी सुनवाई के क़ैद में डालने के लिए किया गया.

इसमें राजनीतिक असंतुष्ट, छोटे अपराधी और ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें अधिकारी अपने काम में बाधक समझते थे.

डरावनी यादें

ऐसा लगता है कि चीन की न्याय व्यवस्था का ये सबसे विवादित पहलू अब लगभग इतिहास बनने वाला है. शंघाई में भी ऐसा ही है.

जैसा कि तस्वीरों से पता चलता है कि हालांकि साइन बोर्ड से अक्षरों को हटा लिया गया है, लेकिन आप अभी भी संस्थानों के नाम पढ़ सकते हैं.

लेकिन इनसे जुड़ी डरावनी यादों के बावजूद आज की हकीकत यह है कि सभी शिविरों को बंद कर दिया गया है और सभी क़ैदी रिहा हो गए हैं.

तस्वीरों में दोनों शिविर यही कहानी कहते हैं. ये शंघाई के तीसरे और चौथे शिविर हैं.

इस शिविरों का इस्तेमाल ड्रग्स का नशा करने वालों के सुधार केंद्र के रूप में भी किया जाता था.

अदालतों पर नियंत्रण

चीन में दूसरे स्थानों पर अधिकारी एक अन्य क़ानूनी व्यवस्था के लिए इसका इस्तेमाल करते थे.

इसके तहत वेश्यावृत्ति करने वालों को क़ैद किया जाता था. इसे "हिरासत और शिक्षा" नाम दिया गया था.

समाचार पत्र की ख़बर में बताया गया है कि श्रमिक केंद्रों के जरिए पुनर्शिक्षा को बंद कर दिया गया है.

इस केंद्रों को बंद करने के फैसले की औपचारिक घोषणा नवंबर में की गई थी और इस सिलसिले में बीते सप्ताह क़ानून बना दिया गया.

अब ऐसा लगता है कि इनमें से ज़्यादातर क़ैदी चले गए हैं. जाहिर तौर पर चीन में न्याय अभी भी एक भ्रम बना रहेगा क्योंकि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का अदालतों पर स़ख्त नियंत्रण है.

लेकिन सरकार अपनी एक बेहद दमनकारी और विवादित व्यवस्था को ख़त्म करने के वादे को पूरा कर रही है.

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