दुनिया भर में धूम्रपान करने वाले एक अरब हुए

धूम्रपान करने वाले
Image caption एंटीगा और बारबुडा जैसे कैरेबियाई देशों में धूम्रपान करने वाले अपेक्षाकृत कम हैं

नए आँकड़ों के मुताबिक़ दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों की संख्या बढ़कर एक अरब हो गई है.

अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन जर्नल में शोधकर्ताओं ने ये जानकारी दी है.

उनका कहना है कि दुनिया भर में जिस तरह से जनसंख्या बढ़ी है उसी हिसाब से धूम्रपान करने वालों की तादाद में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

मगर साथ ही वे कहते हैं कि लोग इस लत से दूर रहें इसके लिए और ज़्यादा काम करने की ज़रूरत है.

रिपोर्ट के अनुसार 1980 से लेकर 2012 के बीच के 32 वर्षों में दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों की संख्या में लगभग 25 करोड़ की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

भारत में इस अवधि के दौरान धूम्रपान करने वालों की संख्या में साढ़े तीन करोड़ का इज़ाफ़ा हुआ है. देश में तक़रीब 11 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं. हालाँकि धूम्रपान करने वालों का कुल प्रतिशत 19 से गिरकर 13 हो गया है.

रूस, इंडोनेशिया और पूर्वी तिमोर जैसे देशों में तो कुल आबादी के आधे से ज़्यादा लोग इस आदत का शिकार हैं.

अनुपात के हिसाब से कमी

एंटीगा और बारबुडा जैसे कैरेबियाई देशों में धूम्रपान करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. वहाँ पर हर 20 में से एक व्यक्ति ही ऐसा करता है.

शोधकर्ताओं का का कहना है कि चूँकि पिछले 50 वर्षों में दुनिया की आबादी दोगुनी हो गई है इसलिए इस संख्या में भी ये बढ़त देखी गई.

फ़िलहाल दुनिया की आबादी लगभग सात अरब है.

वैसे भले ही दुनिया में कुल धूम्रपान करने वाले बढ़ गए हों कुल लोगों के अनुपात के हिसाब से देखें तो धूम्रपान करने वाले कम हुए हैं.

पुरुषों में 1980 से लेकर अब तक के समय में ये कमी 10 फ़ीसदी और महिलाओं में चार फ़ीसदी तक आई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अगर दुनिया में और ज़्यादा देश सिगरेट पर कर बढ़ाने, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगाने और सिगरेट के पैकेटों पर चेतावनी लगाने जैसे क़दम उठाएँ तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है.

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