वे जो अपने ही वतन में बेवतन हो गए हैं...

डोमिनिकन रिपब्लिक से हेती मूल के लोगों को उनके देश भेजे जाने का सिलसिला जारी है. इमेज कॉपीरइट AP

आप कैसा महसूस करेंगे अगर आपसे कहा जाए कि आप उस देश के नागरिक नहीं हैं जहां आप पैदा हुए और बड़े हुए थे, आपको नौकरी पाने के लिए सही कागज़ात नहीं मिल सकते और आपके बच्चों को स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने के लिए दस्तावेज़ भी नहीं मिलेंगे.

कैरेबियाई देश डॉमिनिकन रिपब्लिक में रहने वाले हज़ारों लोगों को इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

पड़ोसी हैती मूल के हज़ारों लोग डॉमिनिकन रिपब्लिकन की एक अदालत के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं जो उन्हें राष्ट्रीयता दिए जाने की सुविधा से महरूम कर रही है.

(जहाँ महिलाओं को हो जाती है जेल)

सरकारी दस्तावेज़

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Image caption बीते साल नवंबर में डोमिनिकन रिपब्लिक ने हेती के 244 लोगों को निर्वासित किया था.

एंजेलो 15 साल के हैं. डॉमिनिकन रिपब्लिक ही उनका घर है लेकिन उनका परिवार हैती से है. जब से कानून में बदलाव हुआ है, एंजेलो को चिंता कि वो अब यहां नहीं रह पाएंगे.

एंजेलो बताते हैं, "हमें हैती की भाषा नहीं आती. हम वहां किसी को नहीं जानते. हम यहीं पैदा हुए और हम यहां सभी को जानते हैं. अगर वो हमें वापस भेज देते हैं तो हमारे पास रहने, काम करने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं होगी."

(दर्जनों जहाज खाड़ी से बाहर)

हैती के रहने वाले कई लोगों ने गन्ना काटने के लिए सीमा पार कर डॉमिनिकन रिपब्लिक का रुख किया था. इनमें से आइरिस के पिता भी एक हैं.

आइरिस डॉमिनिकन रिपब्लिक में पैदा हुई थीं और अब उनकी एक बेटी भी है. उनके पास कोई भी दस्तावेज़ नहीं है और अचानक उनके लिए स्थिति मुश्किल हो गई है.

आइरिस कहते हैं, "मुझे बुरा लगता है, खासकर उस वक्त जब मुझे समाचारों से पता चलता है कि हालात ख़राब हो रहे हैं. मुझे लगता है कि मुझे कभी भी दस्तावेज़ नहीं मिलेंगे. अगर आपके पास सरकारी दस्तावेज़ नहीं होते हैं तो आपको ऐसा लगता है कि आप कानून के दायरे से बाहर हों. मुझे बहुत बुरा लगता है."

राष्ट्रीयता

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आइरिस जैसे हैती के कई लोगों के साथ समस्या ये है कि डॉमिनिकन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ी है जिनके माता पिता हैती से वहां आकर बसे हैं. यानी हैती से पलायन कर डॉमिनिकन रिपब्लिक आए लोगों की नागरिकता छिन जाएगी.

(भूकंपग्रस्त हैती में बच्चों पर नजर)

जुआन कार्लोस गोंजालेस गैर-सरकारी संस्था डॉमिनिकंस बाई राइट के लिए काम करते हैं. ये संस्था विभिन्न सभाएं आयोजित कर इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रही है कि हैती से डॉमिनिकन रिपब्लिक आए लोगों के साथ किस तरह का भेदभाव हो रहा है.

जुआन ने बताया, "अगर आपके पास दस्तावेज़ या राष्ट्रीयता नहीं है तो आप किसी प्रेत की तरह हैं. आपके पास शादी करने, काम करने, शिक्षा हासिल करने या फिर दूसरे नागरिकों जैसे अधिकार नहीं होंगे इसलिए हम लोगों को जानकारी देने की कोशिश कर रहे है कि इन लोगों से उनकी राष्ट्रीयता छीनने की कोशिश की जा रही है."

उधर सैंडो डॉमिंगो के व्यस्त पासपोर्ट दफ़्तर में प्रवासन के प्रमुख जोज़ टावारेस कहते है कि इस फ़ैसले से बहुत कम लोग प्रभावित होंगे. वो कहते हैं कि इस फ़ैसले का मक़सद है कि प्रवासी लोगों के बच्चों के दर्जे में पारदर्शिता लाई जाए.

अदालती फैसला

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टावारेस का कहना है, "हमने हैती के लोगों के खिलाफ़ क्या कुछ नहीं किया लेकिन इस फ़ैसला का असर बहुत ज्यादा नहीं होगा. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 40,000 से ज़्यादा लोगों पर इसका असर नहीं पड़ेगा."

(हैती में आपदा की दस्तक)

उधर संयुक्त राष्ट्र के ताज़ा आंकड़े के मुताबिक डॉमिनिकन में पैदा हुए करीब ढाई लाख बच्चों पर इस अदालती फ़ैसले का असर पड़ेगा और उनसे उनकी राष्ट्रीयता छिन जाएगी.

लॉरेंज़ो जिमेनेज़ डॉमिनिकन रिपब्लिक में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं. उन्होंने बताया, "कई लोगों से उनकी राष्ट्रीयता छिन जाएगी और ये सबसे बुरा होगा. हम ऐसा नहीं चाहते, और मुझे नहीं लगता कि प्रशासन भी ऐसा चाहता है. हमें इस बात को लेकर सतर्क रहना चाहिए कि लोगों के मानवाधिकार का उल्लंघन न हो और उनके साथ इंसाफ हो."

सेंटो डॉमिंगो में सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के दफ़्तर के बाहर हैती के बूढ़े श्रमिक बेहतर पेंशन अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. सालों से हैती के प्रवासी नागरिकों के बच्चों के साथ दूसरे स्तर के नागरिकों जैसा व्यवहार किया गया है, चाहे वो उनके पेंशन से जुड़े फायदे हों, या फिर कोई और बात हो, अब उनकी राष्ट्रीयता भी खतरे में है.

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