अफ़ग़ानिस्तानः राख में से उठने को तैयार देश

अफ़गानिस्तान

अफग़ानिस्तान की सुरक्षा की जिम्मेदारी इस साल के आखिर तक स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के हाथ में चली जाएगी.

देश में वर्ष 2001 से मौजूद विदेशी फौजें वापस जा रही हैं. यहां इस साल चुनाव भी होने हैं.

कहा जाता है कि इसलिए ये वक्त अफ़गानिस्तान में अनिश्चितता का है जो सत्तर के दशक के अंत से जारी है.

उस वक्त अफ़गानिस्तान में सोवियत रूस ने हमला किया था, उसके बाद तालिबान का शासन और हाल के दिनों में पश्चिमी देशों की सेना की लगातार मौजूदगी के चलते देश शांत और स्थिर नहीं हो पाया.

लगातार जारी लड़ाई की वजह से मुल्क में भारी तबाही हुई है. लेकिन इन सबके बीच राजधानी काबुल के एक पुराने इलाक़े में नवीनीकरण का काम जारी है.

चुनौतियां

काबुल के पुराने शहर के कुछ इलाकों को कभी कचरे के ढेर समान समझ लिया गया था.

फिर एक ब्रितानी ग़ैर-सरकारी संगठन ने इन इलाक़ों में सुधार के काम का बेड़ा उठाया – न सिर्फ साफ-सफाई का, बल्कि पूरे पुनरुद्धार का.

टॉरक्वायज़ माउंटेन नाम की संस्था में काम करने वाले टॉमी वाइड कहते हैं, "जब हम साल 2006 में यहां आए थे तो गलियों में दो-दो मीटर ऊंचे कचरे के ढेर जमा थे. मुझे याद है कि मैं जिस तरह दरवाजों में घुसता था उससे लगता था कि जैसे मैं किसी गुफा में घुसने की कोशिश कर रहा हूं. ये दरवाज़े किसी वक्त में जमीन से काफी ऊंचे थे लेकिन वहां इतना कचरा जमा हो गया था कि लगता था कि अब उन दरवाजों में घुस पाने तक की जगह मुश्किल से बची थी. "

साल 2006 में अफ़गानिस्तान आने के बाद से टॉरक्वायज़ माउंटेन ने सैकड़ों कारीगरों और मज़दूरों को प्रशिक्षित किया है जो अफ़गानिस्तान के भविष्य में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

देश के सामने बड़ी चुनौती है– यहां के लोगों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के बीच संबंध स्थापित करवा पाना.

अफ़गानिस्तान में परंपरागत किस्म की कारीगरी से जेवर के ख़ास तरह के डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जो ब्रिटेन और विश्व के दूसरे मुल्कों में बिक रहे हैं.

ऐसी ही एक कारीगर कोराई कहती हैं, "इस काम को ज्यादातर मर्द करते हैं– अफग़ानिस्तान में औरतों का काम करना पसंद नहीं किया जाता. खुशकिस्मती से मेरा परिवार इस काम के लिए मेरा

समर्थन करता है. मैं इसकी वजह से काफी खुशी महसूस करती हूं."

उम्मीदें

अफग़ानिस्तान की कलात्मक लेखन कला की भी दुनिया में मांग है. समीरा और कुछ दूसरे शिक्षक एक स्कूल में लोगों को ट्रेनिंग देते हैं और उन्हें उम्मीद है कि मक्का में मौजूद होटल से उन्हें ऑर्डर हासिल हो सकते हैं.

हालांकि अफग़ानिस्तान में अनिश्चितता का दौर है लेकिन समीरा को हालात बेहतर होने की उम्मीद है, "मुझे उम्मीद है और मैं ये देख पा रही हूं कि अफ़ग़ानिस्तान का भविष्य बेहतर है."

अफ़गानिस्तान में कई युवा पारंपरिक किस्म के लकड़ी के फ़र्नीचर बनाने का काम सीख रहे हैं.

माना जाता था कि ये ख़त्म हो चुका है. वो इस तरह का काम कर रहे हैं जिसकी घरेलू और बाहरी दुनिया में काफी मांग है.

इस सबसे उम्मीद जगती है कि जंग की विभीषिका झेल चुका ये मुल्क एक बार फिर से राख के ढेर से उठ खड़ा होगा.

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