चीन: अब 'वैबो' नहीं 'वीचैट'

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चीन में सोशल मीडिया साइट 'वैबो' का इस्तेमाल कम हुआ है. वैबो, सोशल मीडिया साइट ट्विटर का चीनी रूपांतरण है.

एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार वैबो का प्रयोग करने वाले दो करोड़ अस्सी लाख लोगों ने साल 2013 में इसका प्रयोग करना बंद कर दिया है.

चीन के इंटरनेट नेटवर्क इंफ़ार्मेशन सेंटर ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया का प्रयोग करने वालों में कुल मिलाकर गिरावट आई है.

चीन के इंटरनेट प्रयोगकर्ता अब मोबाइल पर निजी संवाद की सुविधा देने वाली वीचैट जैसी इंस्टेंट मैसेज सेवा की ओर रुख़ कर रहे हैं.

बीजिंग में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने बताया कि वैबो पर सरकार की आलोचना के लिए पहचाने जाने वाली बड़ी हस्तियों पर कम्युनिस्ट पार्टी के कार्रवाई करने के बाद वैबो का इस्तेमाल कम हुआ है.

सेंसरशिप बढ़ी

वैबो का इस्तेमाल करने वाले लोगों को वैबो के यूजर्स की संख्या कम होने पर कोई आश्चर्य नहीं है.

वैबो का इस्तेमाल करने वाले ओशियांग कहते हैं, "इसका प्रयोग अब सुरक्षित नहीं है, इसलिए हर किसी के लिए इस सेवा को नमस्कार कहने का वक़्त आ गया है."

चीन की सरकार की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2013 में दो करोड़ 80 लाख लोगों ने फ़ोटो शेयर करने, विचार और चुटकले साझा करने के लिए वैबो का प्रयोग किया. यह 2012 के आंकड़ों से नौ प्रतिशत कम है.

पिछले साल कम से कम दो करोड़ आठ लाख लोगों ने वैबो का इस्तेमाल कम कर दिया. वैबो चीन में मीडिया पर कड़ी पाबंदियों को दरकिनार कर बिना किसी रोक-टोक के काम करने वाली पहली सोशल मीडिया वेबसाइट है. इसके प्रयोगकर्ताओं में पहली बार कमी आई है.

वहीं वीचैट जैसी इंस्टैंट मोबाइल मैसेज़िंग सेवा पर सात करोड़ 86 लाख से ज़्यादा यूजर्स ने पंजीकरण कराया है. ट्विटर पर चीन में अब भी पाबंदी है.

चीन में वैबो पर सक्रिय कई प्रमुख लोगों की गिरफ़्तारियां हुई हैं और सेंसरशिप बढ़ा दी गई है. इसकी वजह से कई आम लोग वैबो जैसे सार्वजनिक मंच पर अपनी बात नहीं रख रहे हैं.

चीन के लोग अब बात करने के ऐसे तरीक़े अपना रहे हैं जो उनकी बातों की अधिक निजता बनाए रखे.

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