सीरियाई विपक्ष होगा शांति वार्ता में शामिल

  • 19 जनवरी 2014
एलप्पो शहर, सीरिया Image copyright Reuters

सीरिया का प्रमुख राजनीतिक विपक्षी गुट सीरियन नेशनल कोआलिशन (एसएनसी), अगले सप्ताह जिनेवा में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार हो गया है.

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने इस फ़ैसले को ''साहसी'' बताते हुए उसका स्वागत किया है. निर्वासन में रह रहे विपक्षी गुट के नेताओं ने इस्तानबुल में बातचीत के बाद ये फ़ैसला किया.

जिनेवा दो नाम की इस शांति वार्ता का मक़सद सीरिया में लड़ाई ख़त्म करने के लिए एक परिवर्ती सरकार के गठन की प्रक्रिया की शुरुआत करना है.

तीन साल से चल रहे संघर्ष में अब तक एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

लगभग बीस लाख लोग देश छोड़ कर भाग चुके हैं और लगभग 65 लाख लोग सीरिया के भीतर विस्थापित हो चुके हैं.

''साहसी वोट''

शांति वार्ता में हिस्सा लेने के पक्ष में 58 और विरोध में 14 प्रतिनिधियों ने वोट डाले जबकि एक प्रतिनिधि ने वोट नहीं डाला.

विपक्षी गठबंधन के नेता अहमद जारबा ने कहा कि वे ''आंदोलन के आदर्शों से किसी तरह का समझौता किए बिना बातचीत में शामिल हो रहे हैं और वे असद प्रशासन से धोखा नहीं खाएंगे.''

अहमद जारबा ने कहा, "बातचीत हमारे लिए आंदोलन की शर्तों को पाने का रास्ता है और इसमें सबसे पहली शर्त कसाई को सत्ता से हटाना है.''

अमरीका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने एक वक्तव्य में कहा, "बशर अल-असद के शासन और गृह युद्ध में अत्याचार सहने वाले सभी सीरियाई लोगों की भलाई के लिए ये एक साहसी वोट है.''

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने भी एसएनसी के ''मुश्किल फ़ैसले'' की तारीफ़ की है और कहा, "जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं कि किसी भी तरह के समझौते का मतलब है कि बशर अल-असद की सीरिया के भविष्य में कोई भूमिका नहीं हो सकती.''

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Image caption तुर्की के कार्कामिस में एक शरणार्थी शिविर. लगभग बीस लाख लोग सीरिया छोड़ कर भाग चुके हैं.

विपक्ष की हिचकिचाहट

बेरूत में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि सीरियाई विपक्ष के इस फ़ैसले से पश्चिम देशों की चिंता कम होगी हालांकि शांति वार्ता के हिमायती जिस तरह की एकजुटता की उम्मीद कर रहे थे, ये उससे कम है.

इससे पहले सीरियाई विपक्ष ने कहा था कि उसे तब तक शांति वार्ता में शामिल होने में दिलचस्पी नहीं है जब तक राष्ट्रपति असद को भविष्य की किसी भी अंतरिम सरकार से बाहर नहीं जाएगा.

लेकिन असद की सीरियाई सरकार का कहना है कि शर्तों के साथ बातचीत नहीं हो सकती.

पिछले सप्ताह सीरिया के राष्ट्रीय रिकंसिलियेशन या मेल-मिलाप मामलों के मंत्री अली हैदर ने कहा था कि किसी को भी बातचीत में किसी नतीजे की उम्मीद नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "समाधान शुरु हुआ है और सरकार की सैन्य जीत तक जारी रहेगा."

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Image caption सीरियाई सरकार का कहना है कि उसने एलप्पो में युद्धविराम की योजना पेश की है.

हालांकि शुक्रवार को सीरिया ने विद्रोहियों के साथ क़ैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था और विदेश मंत्री वालेद मुआलेम ने कहा था कि उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवारोफ़ के साथ बातचीत के दौरान एलप्पो शहर के लिए युद्ध विराम की योजना भी दी थी.

सदभावना का एक और संभावित कदम उठाते हुए सीरियाई सरकार ने महीनों बाद शनिवार को राजधानी दमिश्क के यारमुक इलाके में फलस्तीनी शरणार्थी शिविर में सहायता सामग्री ले जाने की मंज़ूरी दे दी.

अमरीकी विदेश मंत्री सीरियाई विपक्ष से 21 जनवरी को होने वाली बातचीत में हिस्सा लेने के लिए कहते रहे हैं. उनका कहना था कि शांति वार्ता का मक़सद सीरिया में एक अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया स्थापित करने के लिए ज़रूरी थी.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवारोफ़ चाहते हैं कि ईरान भी इस बातचीत का हिस्सा बने लेकिन जॉन कैरी ने कहा है कि ईरान को पहले जिनेवा में हुई पहले दौर की बातचीत को मंज़ूरी देनी होगी जिसके तहत सीरिया में राजनैतिक परिवर्तन की बात की गई है.

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