सीरिया वार्ता : ईरान को भेजा न्यौता वापस लिया

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Image caption पूरा सीरिया हिंसा की चपेट में है जहां मृतकों की संख्या हर दिन बढ़ रही है

सीरिया संकट पर विचार-विमर्श और समाधान के लिए इस हफ़्ते होने वाले शांति-सम्मेलन में शामिल होने के लिए ईरान को भेजे अपने आमंत्रण को संयुक्त राष्ट्र ने वापस ले लिया है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता मार्टिन नेसर्की ने ईरान की इस बात के लिए आलोचना की है कि वह सीरिया में एक अस्थायी सरकार बनाने की योजना का समर्थन करने में विफल हुआ है जो शांति-सम्मेलन का आधार है.

ईरान को आमंत्रित किए जाने से अमरीका और पश्चिम समर्थित सीरियाई विपक्ष बेहद नाराज़ था.

ईरान, सीरिया का मुख्य सहयोगी है जहां राष्ट्रपति बशर अल असद सत्ता पर क़ाबिज़ हैं.

स्विटज़रलैंड के शहर मॉन्गट्रेए में शांति-सम्मेलन बुधवार से आरंभ होने वाला है जो सीरिया में तीन वर्ष से जारी संकट को ख़त्म करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा राजनयिक प्रयास है.

सीरिया में तीन वर्ष से जारी युद्ध में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर पड़ोसी मुल्कों में शरण लेनी पड़ी है.

संयुक्त राष्ट्र को हुई 'निराशा'

राष्ट्रपति बशर अल असद और मुख्य विपक्षी गुट सीरियन नेशनल कोएलिशन के नुमाइंदे मॉन्गट्रेए शांति-सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं.

सीरियन नेशनल कोएलिशन ने धमकी दी थी कि शांति-सम्मेलन में ईरान के प्रतिनिधि आते हैं तो वह इसमें शामिल नहीं होगा.

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कोएलिशन के प्रवक्ता मंजर अकबिक ने बीबीसी से कहा कि ईरान को भेजा न्यौता वापस लेना 'एक सही क़दम' है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता मार्टिन नेसर्की का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून ने ईरान के आला अधिकारियों से अलग से बात करने के बाद ईरान को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था.

उनका कहना है कि इन अधिकारियों ने मून को भरोसा दिलाया था कि ''वे इस सम्मेलन के लक्ष्य को समझते हैं और इसकी बुनियाद का समर्थन करते हैं.''

लेकिन ईरान ने सोमवार को ऐसे कई बयान जारी किए जिनमें सम्मेलन में उसकी उपस्थिति पर किसी तरह की शर्त रखने को ख़ारिज़ किया गया था.

मार्टिन नेसर्की का कहना है, ''यह समझते हुए कि ईरान बुनियादी समझ से बाहर रहना चाहना है, यह तय किया गया कि एक दिन की बैठक ईरान की सहभागिता के बिना ही होगी.''

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मॉन्गट्रेए सम्मेलन के दो दिन बाद जिनीवा में होने वाली बैठक में ईरान को शामिल किया जाएगा या नहीं.

बहरहाल, अमरीकी अधिकारियों ने ईरान को बाहर रखे जाने का यह कहते हुए स्वागत किया है कि इससे वार्ता के विषय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी.

प्रताड़ना के आरोप

इसबीच सीएनएन और ब्रितानी अख़बार गार्डियन की ख़बरों में कहा गया है कि सीरियाई शासन ने हज़ारों बंधकों को प्रताड़ित किया है और उनकी जान ली है.

सीएनन के मुताबिक़, लगभग 55,000 तस्वीरों में क़रीब 11,000 मृतक बंधक दिखाए गए हैं. ये तस्वीरें उस फ़ोटोग्राफ़र ने सीरिया से बाहर भेजी हैं जो किसी ज़माने में सेना में काम करता था.

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गार्डियन ने इशारा किया है कि यह तमाम जानकारी जान-बूझकर ऐसे समय जारी गई है जब शांति-सम्मेलन आरंभ होने वाला है जो कई महीनों की कूटनीति का नतीजा है.

बीते साल मई में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी, सीरिया के दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने पर सहमत हो गए थे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चाहता है कि सीरिया में एक अस्थायी सरकार का गठन किया जाना चाहिए.

लेकिन सीरिया में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय गठबंधन का कहना है कि ऐसी किसी सरकार में राष्ट्रपति बशर अल असद की कोई भूमिका नहीं होगी.

वहीं राष्ट्रपति असद ने सोमवार को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि नई सरकार में राष्ट्रीय गठबंधन को मंत्री पद मिलने की संभावना 'पूरी तरह से यथार्थता से परे' है.

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