भारत-जापान रिश्तों पर चीनी मीडिया की नज़र

  • 27 जनवरी 2014
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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के आधिकारिक भारत दौरे पर उनको मिलने वाली 'ख़ास तवज्जो' और भारत-जापान के रिश्तों के विकास पर चीनी मीडिया में बड़े ध्यान से नज़र रख रहा है.

रविवार को भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह की परेड के मुख्य अथिति जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे थे. अपने तीन दिवसीय दौरे पर वह भारत के साथ राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाना चाहते हैं.

शिंजो आबे ने भारत में आधारभूत संरचना की परियोजनाओं के लिए दो अरब डॉलर का ऋण देने की घोषणा की है.

चीन के एअर डिफ़ेंस ज़ोन पर जापान की स्थिति को भारत के समर्थन के संदर्भ में क़ियनजियांग इवनिंग न्यूज़ ने जापान के ऋण प्रस्ताव को भारत को अपने पक्ष करने वाले प्रस्ताव के रूप में देखा है.

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि भारत अमरीका और चीन के साथ कूटनीतिक रिश्तों को ज़्यादा महत्व देता है और जापान के साथ उसके रिश्ते मुख्यतः आर्थिक ही हैं.

(पढेंः सैन्य तैयारियों पर चीन ने जापान को धमकाया)

रिश्तों में गर्मजोशी

चीन के फॉरेन अफ़ेयर्स यूनिवर्सिटी के ज़ोउ यांगशेंग कहते हैं, "जापान के लिए आर्थिक सहयोग के अलावा भारत के साथ रिश्तों में नजदीकी बढ़ाना आसान नहीं है."

विभिन्न विदेशी मीडिया में छपी टिप्पणियों का संकलन कर चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ कहती है कि चीन और भारत-जापान के द्विपक्षीय संबंधों में "गर्मजोशी बढ़ रही" है.

ग्लोबल टाइम्स के चीनी संस्करण का मानना है कि भारत जापान के प्रधानमंत्री को विशेष स्थान दे रहा है, लेकिन उसे हैरानी है कि क्या जापान आसानी से भारत को चीन के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाने के लिए बाध्य कर सकता है.

चाइनीज एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज के लु हावो अख़बार में कहते हैं कि हालांकि भारत को क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए जापान की जरूरत है, लेकिन वह अपनी स्वतंत्रता का 'बलिदान' नहीं करेगा.

पीपुल्स डेली समेत सरकार के अन्य मुखपत्रों में चीन और फ्रांस के कूटनीतिक संबंधों के 50 साल पूरे होने पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के शुभकामना संदेशों को प्रकाशित किया गया है.

टिप्पणीकार कहते हैं कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल की सरकार चीन की कम्यूनिस्ट सरकार को मान्यता देने वाली पश्चिम की पहली ताक़त थी. इसके साथ ही भविष्य में रणनीतिक साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है.

(पढ़ेंः'भारत-जापान की नज़दीकी से चीन में खलबली')

फ्रांस-चीन रिश्ते

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फ्रांस में चीन के राजदूत झाई जुन कहते हैं, "पिछले 50 सालों में दोनो देशों ने एक-दूसरे की बात सुनी है, पारस्परिक सम्मान के सिद्धांत पर भरोसा जताया है, व्यापक रणनीतिक साझेदारी कायम करते हुए दुनिया के संतुलित विकास को आगे बढ़ाया है."

चीन और फ्रांस के कूटनीति संबंधों के बारे में ग्लोबल टाइम्स कहता है, "दोनों देशों को करीब लाने के लिए फ्रांस को एक और चार्ल्स डी गॉल की ज़रूरत है."

इसके साथ-साथ मीडिया में दक्षिणी चीन सागर के शिशा और नशा द्वीपों पर चीनी नौसेना की गश्त की ख़बर को भी संक्षेप में प्रकाशित किया गया है. पिछले सप्ताह इसे क्षेत्रीय संप्रभुता से जोड़कर दिखाया गया था.

इसके अलाव चीन के पूर्वोत्तर में मूर्तियों की एक श्रृंखला को लेकर ऐतराज बढ़ रहा है जिसमें प्रसिद्ध नायक वू शुंग को एक बहुत महंगे शॉपिंग मॉल में महिला को खंजर मारते हुए दिखाया गया है.

चीन के क्लासिकल उपन्यास वाटर मार्जिन में वू शुंग खाली हाथों से बाघ की हत्या करने वाले पात्र के रूप में जाने जाते हैं.

मूर्ति में उन्हें एक हाथ में खंजर लिए हुए और दूसरे हाथ से अपने भाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार अपनी 'व्याभिचारी भाभी' को पकड़े हुए दिखाया गया है, जिसने सलीके के कपड़े नहीं पहने हुए हैं.

बीजिंग के मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक़ चीन के प्रख्यात कलाकार ली झानयांग की इस कृति को 'अश्लील' बताया जा रहा है, जबकि अन्य लोग 'एक तरह की कला' कहकर इसका बचाव कर रहे हैं.

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