जमी हुई टेम्स नदी पर हुआ मेले का आयोजन?

लंदन में दो सौ साल पहले अंतिम बार फ्रॉस्ट फेयर मनाया गया था. फ्रॉस्ट फेयर अपने आप में एक अविश्वसनीय मेला ही था, जो पूरी तरह जमी हुए टेम्स नदी पर बनाया जाता था. जहां लोग नाचते-गाते थे. गेंद फेंकने का खेल स्किट्ल्स भी खेलते थे और तो और लोगों के लिए अस्थायी पब भी खुल जाते थे. क्या आज इसकी कल्पना संभव है?

लंदनवासी टेम्स नदी के बीचों बीच जश्न मनाते हुए ब्रेड खाते और ज़िन पीने का लुत्फ़ उठाया करते थे. यह उत्सव पहली फरवरी को शुरू हो और अगले चार दिन तक चला था.

टेम्स नदी की परत इतनी जम चुकी थी कि उस पर से हाथी भी गुजर गए थे.

यह बात हो रही फरवरी, 1814 की. तब जॉर्ज तृतीय का शासन था. लॉर्ड लिवरपूल प्रधानमंत्री थे और नेपोलियन युद्ध लगातार जीत रहा था.

200 साल पहले का मेला

लोगों को मालूम नहीं था कि फ्रॉस्ट फेयर अंतिम बार आयोजित हो रहा है. 200 साल बीत चुके हैं, इस दौरान टेम्स नदी कभी इतना नहीं जमी कि उस पर यह उत्सव मनया जा सके.

1309 से लेकर 1814 तक टेम्स नदी कम से कम 23 बार पूरी तरह जमी थी. और इसमें पांच बार ऐसा मौका आया जब पूरी नदी बर्फ के चट्टान के तौर पर परिवर्तित हुई कि उसपर मेले का आयोजन संभव हो पाया.

यह मौका आया था, 1683-84, 1716, 1739-40, 1789 और 1814 में.

लंदन म्यूज़ियम में दो सौ साल पहने की प्रदर्शनी का आयोजन होने जा रहा है जिससे 1814 के उस ख़ास मेले की झलक मिलती है.

लंदन म्यज़ियम के वरिष्ठ क्यूरेटर जॉर्जिना यंग बताते हैं, "यह बर्फ पर एक शहर देखने जैसा है."

बर्फ़ पर बसा शहर

इस मेले को जरूरत के तौर पर देखा जाता है. लंदन दुनिया का सबसे बेहतरीन बंदरगाह माना जाता है. ऐसे में टेम्स नदी के जम जाने से हजारों लोगों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो जाता था.

ऐसे में बंदरगाह और नदी के जरिए जीवनयापन करने वाले मेले का आयोजन कर आजीविका जुटाने की कोशिश करते थे.

2 फरवरी, 1814 के द टाइम्स में प्रकाशित ख़बर में कहा गया है कि नदी के कई हिस्से में कई फीट मोटी बर्फ जमी हुई है जबकि कुछ हिस्से में करतब दिखाना ख़तरनाक हो सकता है.

1684 के एक इलेस्ट्रेशन से यह जाहिर होता है कि जमी हुई नदी पर बैलों की लड़ाई तक आयोजन होता था.

हालांकि 1814 तक आते आते आयोजन खाने पीने तक सीमित हो गया. खासकर भूने हुए मांसाहारी व्यंजन आयोजन की खासियत होते थे.

चाय, कॉफी और हॉट चॉकलेट भी लोगों को बेचे जाते थे. ब्रेड के अलावा ज़िन तो मिलती ही थी. लोग बाग इस मेले में टेंट भी लगा लेते थे.

फिर होगा आयोजन?

आधुनिक पबों की तर्ज पर स्थायी पब भी खुल जाते थे. 1814 में ऐसे ही एक पब का नाम था- द सिटी ऑफ मास्को.

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आजकल कहीं मेला लगता है तो सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात होता है. 1814 में कोई पुलिस बल तैनात नहीं होता था. मछुआरे और बंदरगाह पर तैनात लोग ही व्यवस्था देखते थे.

एक सवाल यह भी उठता है क्या टेम्स फिर जमेगी और मेले का आयोजन होगा. हालात एक बार इसके बेहद करीब पहुंच गए थे, जब 1962-63 में नदी काफी हद तक जम गई थी. लेकिन नदी कुछ ही हिस्से में जमी थी और वह भी थोड़े ही समय के लिए.

वैसे में 1814 में लंदन का औसत तापमान -2.9 डिग्री सेल्सियस था जबकि जनवरी, 2010 में औसत तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस.

हालांकि कुछ लोगों को अभी भी यकीन है कि टेम्स नदी एक बार फिर जमेगी और इस पर मेले का आयोजन फिर होगा.

बहरहाल लंदन म्यूज़ियम में फ्रॉस्ट फेयर 1814 की प्रदर्शनी आम लोगों के लिए 29 जनवरी से 30 मार्च, 2014 तक मुफ्त प्रवेश के लिए खुली रहेगी.

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