बॉस्टन धमाकों के संदिग्ध के लिए मौत मांगेगा अमरीका

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अमरीकी सरकार का कहना है कि वह बॉस्टन मैराथन के दौरान धमाकों के संदिग्ध ज़ोख़र सारनाएफ़ के लिए मौत की सज़ा मांगेगी.

अमरीकी सरकार के महाधिवक्ता एरिक होल्डर ने एक बयान में कहा, "अपराध की प्रकृति और उसके परिणाम हमें यह फ़ैसला लेने के लिए मज़बूर कर रहे हैं."

20 वर्षीय ज़ोख़र सारनाएफ़ पर लगे 30 में से 17 आरोपों में मौत की सज़ा का प्रावधान हैं. इनमें लोगों की जान लेने के लिए सामूहिक विनाश के हथियारों का इस्तेमाल करना भी शामिल है.

अप्रैल 2013 में बॉस्टन मैराथन के दौरान हुए धमाकों में तीन लोगों की मौत हुई थी और 260 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

ज़ोख़र सारनाएफ़ ने अपना अपराध स्वीकार नहीं किया है और इस मामले की सुनवाई के लिए अभी कोई तारीख़ भी निश्चित नहीं हुई है.

रोलिंग स्टोन में के कवर पर ज़ोख़र

बदले की कार्रवाई

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ज़ोख़र सारनाएफ़ और उनके भाई टेमरलेन सारनाएफ़ ने मैराथन की समाप्ति रेखा के नज़दीक दो प्रेशर कुकर बम लगाए थे. टेमरलेन पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए थे.

रूस के काकेशस क्षेत्र से 2002 में पलायन करने के बाद दोनों भाई अमरीका के मैसाचुसेट्स में प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में रह रहे थे.

अधिकारियों का मानना है कि दोनों भाइयों ने मुस्लिम देशों में अमरीकी सैन्य अभियानों का बदला लेने के लिए बम धमाके किए थे.

धमाके के कुछ दिन बाद पुलिस के साथ हुए शूटआउट में टेमरलेन की मौत हो गई थी जबकि ज़ोख़र घायल अवस्था में एक नाव में मिले थे.

संदेश

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Image caption ज़ोख़र सारनाएफ़ ने अपना अपराध क़ुबूल नहीं किया है.

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ज़ोख़र ने नाव में धमाके करने के उद्देश्य के बारे में संदेश भी लिखा था.

कथित तौर पर उन्होंने लिखा था, "अमरीकी सरकार हमारे बेग़ुनाह लोगों को मार रही है और मैं इस अपराध के लिए उसे सज़ा न मिलते हुए नहीं देख सकता."

ज़ोख़र सारनाएफ़ पर यूनिवर्सिटी पुलिस के एक अधिकारी की हत्या करने और कार लेकर फ़रार होने का भी आरोप है.

आख़िर ज़ोख़र ने क्यों किया ऐसा?

उन पर मौत की सज़ा के लिए संघीय क़ानून के तहत मामला चलाया जाएगा. मैसाचुसेट्स प्रांत में 1984 में मौत की सज़ा पर पाबंदी लगा दी गई थी.

1988 में मौत की सज़ा के संघीय क़ानून को दोबारा लागू किए जाने के बाद से अब तक 70 लोगों को यह सज़ा सुनाई जा चुकी है.

हालाँकि अभी तक सिर्फ़ तीन लोगों को ही फाँसी दी गई है जिनमें ओकलोहामा में धमाकों के आरोपी टिमोथी मैकवे भी शामिल है. टिमोथी को 2001 में फाँसी दी गई थी.

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