बुज़ुर्गों को ठगते 'धोखेबाज़ हीरे'

इमेज कॉपीरइट thinkstock

ब्रिटेन में हीरे में निवेश के एक नए तरीके के ज़रिए बुज़ुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है, धोखाधड़ी के मामलों की जांच करने वाले अफ़सरों ने ये चेतावनी दी है.

इस सिलसिले में बहुत सी कंपनियां दुर्लभ जवाहरात में निवेश कर बेहतर रिटर्न देने के वादों के साथ लोगों को लुभाती हैं.

कुछ मामलों में हीरों की कीमत उनकी वास्तविक कीमत से 17 गुना ज़्यादा रखी जाती है जबकि इस तरह की ठगी के शिकार कुछ लोगों को तो ये भी आशंका है कि ये हीरे शायद वजूद में ही नहीं हैं.

ब्रिटेन के राष्ट्रीय धोखाधड़ी खुफ़िया ब्यूरो में अपराध शाखा के प्रमुख इंस्पेक्टर मैथ्यू ब्रैडफ़र्ड ने कहा, "हीरों में निवेश की धोखाधड़ी के कुछ मामलों की जांच की जा रही है और पिछले साल ऐसे करीब 250 मामलों की जानकारी मिली है."

गोपनीय निवेश

उन्होंने कहा, "इस सिलसिले में अल्ज़ाइमर से पीड़ित एक व्यक्ति से हीरों में निवेश कराने वाली एक कंपनी ने संपर्क किया था. इसके बाद उन्होंने तीन महीनों में एक लाख 48 हजार डॉलर (करीब 90 लाख रुपए) निवेश किए. हर बार यह लेनदेन सुनियोजित तरीके से किया जाता था और निवेशकर्ता को इसे गोपनीय रखने को कहा जाता था."

इमेज कॉपीरइट AP

इस निवेशकर्ता के बेटे बेन ने कहा, "मुझे ऐसा लगा कि मेरे पिता इन लोगों से पीछा छुड़ाने के लिए इन्हें सारा पैसा दे देंगे. मुझे ऐसा लगा मानो वह इन लोगों से काफी डरे हुए थे और उन्हें अपनी सुरक्षा का खतरा लग रहा था."

इसके बाद निवेशकर्ता के वित्तीय सलाहकार ने बेन से ये जानने को संपर्क किया कि आखिर इतना अधिक पैसे की ज़रूरत क्यों पड़ी थी. जब बेन ने हस्तक्षेप किया तो उस समय भी वो करीब एक लाख 40 हजार डॉलर (करीब 85 लाख रुपए) का निवेश करने ही वाले थे.

चूंकि बेन के पास अपने पिता की पावर ऑफ एटॉर्नी थी, इसलिए उन्होंने निवेशक कंपनी को बार-बार फ़ोन न करने और हीरे उन्हें सौंपने को कहा ताकि उन्हें बेचा जा सके.

बेन का कहना है, "लेकिन हर बार जब मैंने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने हीरे भेजने में कोई न कोई समस्या बताई."

नाम बदल कर काम

हीरों के एक पूर्व दलाल ने कंपनियों की ओर से अपनाई जाने वाली इन तरकीबों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि एक टेप की पृष्ठभूमि में आम कामकाजी जगह का शोर सुनाई दे रहा था.

वो कहते हैं, "वहां बहुत से कर्मचारी मौजूद नहीं थे और दफ़्तर को व्यस्त दिखाने के लिए आवाज़ें की जा रही थीं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था."

ऐसे में निवेशकों से पैसे ऐंठने के लिए उन्हें ख़ास तरीकों की जानकारी होना जरूरी था. लेकिन इन कंपनियों के कर्मचारी अपने बारे कोई जानकारी देने को लेकर पहले से काफी सतर्क थे.

हीरों के ये पूर्व दलाल कहते हैं, "मुझे उस समय संदेह हुआ जब मुझे अपना उपनाम बदलने को कहा गया. मैनेजरों ने भी ऐसा ही किया था. मुझे कहा गया कि इससे मैं सुरक्षित रहूंगा."

वो कहते हैं, "लेकिन मैंने सोचा जब सब कुछ 100 फीसदी क़ानूनी है, तो कुछ छिपाने की ज़रूरत नहीं है."

दिवालिएपन के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी ने पिछले साल हीरे की ख़रीद-फरोख्त कराने वाली कंपनी जुबली डाइमंड्स लिमिटेड को बंद कर दिया था. इस कंपनी के भी कर्मचारी उपभोक्ताओं से नाम बदलकर संपर्क करते थे.

कंपनी ने अपने 18 महीनों के कारोबार के दौरान झूठे कागज़ात और कीमत से अधिक हीरे बेच कर 38 लाख डॉलर (23 करोड़ रुपए) जुटा लिए थे. यहां तक कि 15 फ़ीसदी तक रिटर्न देने का वादा करने वाले कुछ दलाल कुल बिक्री का एक-चौथाई तक कमीशन भी लेते थे.

इंस्पेक्टर मैथ्यू ब्रैडफ़र्ड ने कहा, "यह धोखाधड़ी बॉयलर रूम (फ़ोन से झूठे निवेश बेचने के) घोटाले के आपराधिक जाल का एक धागा मात्र है. इसमें लोग फ़ोन कर के निशाना बनाए जाते हैं और खरीदारी के लिए मजबूर किए जाते हैं. यह कंपनियां अक्सर तकनीकी लफ़्फ़ाज़ी, प्रभावशाली पदों और झूठी वेबसाइटों का इस्तेमाल करती हैं और लोगों को उनके निवेश गुप्त रखने को उकसाया जाता है."

चीजों का अस्तित्व ही नहीं

वे बताते हैं, "यहां तक कि कई बार तो चीज़ों का अस्तित्व ही नहीं होता. मैं केवल यह सोच सकता हूं कि लोगों के लिए यह जानना ही कितना डरावना होता होगा कि उनके जीवन भर की मेहनत की कमाई रात भर में ग़ायब हो चुकी है."

हीरा उद्योग के एक विशेषज्ञ के अनुसार हीरे के बाज़ार में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे इसमें धोखाधड़ी होती है.

हारग्रीव्स लैंसडाउन कंपनी के निवेश प्रबंधक एडम लाएर्ड ने कहा, "एक हीरे की कीमत जानना बहुत मुश्किल है, इस क्षेत्र में ज़्यादातर व्यापार निजी तौर पर होता है. दूसरे निवेशों की तरह नहीं जहां स्टॉक मार्केट कीमत की जानकारी देते हैं."

वो कहते हैं, "अधिकतर लोग विशेषज्ञों के ज़रिए हीरे ख़रीदते हैं, ऐसे में यह जानना मुश्किल है कि आपको सही कीमत मिल रही है या नहीं. इसे बेचना भी मुश्किल होता है क्योंकि इसके आपको विशेषज्ञों की ज़रूरत पड़ती है."

निवेश के अनियमित तौर-तरीकों की वजह से हीरे के दलालों को ब्रिटेन में किसी नियामक संस्था के साथ पंजीकृत नहीं कराना होता है.

बेन ने कहा, "यह दलाल पूरी तरह अदृश्य, रीढ़ विहीन लोग होते हैं. जो कंप्यूटर या टेलीफोन के पीछे छिपे होते हैं और मेरा मानना है कि यह उन लोगों को अपना निशाना बनाते हैं, जो अकेले रहते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार