अफ़्रीक़ा के साहेल इलाक़े में खाने का संकट

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संयुक्त राष्ट्र ने अफ़्रीक़ा के साहेल इलाक़े के दो करोड़ लोगों की भूख मिटाने के लिए दो अरब डॉलर जमा करने की अपील की है.

साहेल इलाक़े में सूडान और सेंट्रल अफ़्रीक़ा रिपब्लिक भी आते हैं जो गृहयुद्ध से जूझ रहे हैं. इस इलाक़े में आर्थिक बदहाली चरम पर है.

मानवीय सहायता से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की संस्था (ओसीएचए) का कहना है कि इन देशों और अन्य दूसरी जगहों पर चल रही लड़ाई का मतलब है कि स्थितियां बहुत से लोगों के लिए निराशाजनक हैं.

साहेल के लिए संयुक्त राष्ट्र ने साल 2013 में एक अरब 70 करोड़ डॉलर की मदद की अपील की थी. लेकिन दानदाताओं ने इसका केवल 60 फ़ीसदी ही दिया.

भयावह स्थिति

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सहारा रेगिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थित साहेल क्षेत्र के देशों मौरिटेनिया, गाम्बिया, माली, नाइजर, नाइजीरिया, बर्किना फ़ासो, सेनेगल और कैमरून में खाने का संकट है.

ओसीएचए के मुताबिक़, ''पूरे इलाक़े के अनगिनत समुदायों की स्थिति अभी भी भयावह बनी हुई है.''

साहेल क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता के समन्वयक रॉबर्ट पाइपर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि इस इलाक़े के लिए 'करो या मरो' की स्थिति है.

वैश्विक आर्थिक सुधारों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से सीरिया के लिए की गई साढ़े छह अरब डॉलर की मदद की अपील को देखते हुए पाइपर को आशंका है कि साहेल के लिए आर्थिक मदद में गिरावट आ सकती है. सीरिया के लिए की गई अपील संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़ी अपील है.

कुपोषित बच्चे

वो कहते हैं कि साहेल इलाक़े के पांच साल से कम आयु के 50 लाख बच्चे को कुपोषित हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ इस इलाक़े के दो करोड़ लोग युद्ध और पर्यावरणीय संकट की वजह से भूख का सामना कर रहे हैं. ओसीएचए के अनुमान के मुताबिक़ साहेल के 25 लाख लोगों को ज़िदा रखने के लिए तत्काल मानवीय सहायता पहुँचाने की ज़रूरत है.

साहेल इलाक़े को अक्सर बाढ़, सूखे, टिड्डियों के हमले और महामारी का सामना करना पड़ता है. वहीं हाल के समय में नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और सेंट्रल अफ़्रीका रिपब्लिक जैसे कुछ देश गृहयुद्ध का सामना कर रहे हैं.

ओसीएचए के मुताबिक़ साहेल से 12 लाख से अधिक लोग हिंसा और असुरक्षा को देखते हुए पड़ोसी देशों में पलायन कर चुके हैं जिससे उन देशों के सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है.

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