ब्रिटेन: एक तिहाई बुज़ुर्ग अकेलेपन के शिकार

ब्रिटेन वयस्क अकेलापन

ब्रिटेन के बुज़ुर्गों में से एक तिहाई को लगता है कि उनके आसपास ऐसा कोई नहीं है जिसे वे किसी संकट की स्थिति में आवाज़ दे सकें. एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है.

रेडक्रॉस के सर्वेक्षण के दौरान जिन लोगों से ऑनलाइन सवाल पूछे गए, उनमें से तीन चौथाई ने कहा कि उन्हें अपने जीवन में कभी न कभी किसी न किसी संकट से गुज़रना पड़ा है.

सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 37 फ़ीसदी को लगता था कि उन्हें अगले पांच साल में एक बार फिर संकट से जूझना पड़ सकता है.

उम्रदराज़ हो रहे लोगों की बड़ी परेशानी उनकी आत्मनिर्भरता का ख़त्म होना पाया गया और वे ख़ुद अपनी दिक़्क़तों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं.

जिन 2043 लोगों पर यह सर्वेक्षण किया गया उनमें से एक चौथाई की चिंता यह थी कि वे भविष्य में अकेलेपन का शिकार होंगे.

‘असर’

प्रत्येक आठ में से एक आदमी, यह मानता है कि ब्रिटेन के बुज़र्गों को मुसीबतों का सामना उस तरह नहीं करना पड़ता जैसे कि दूसरे देशों के लोगों को करना पड़ता है.

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ब्रिटेन और उसके बाहर लोगों की मदद और सहायता करने में जुटी संस्था द चैरिटी का कहना है कि ऐसे समय में बुज़ुर्गों को सहायता देना ‘ज़्यादा अहम’ होगा जबकि लोगों की उम्र बढ़ रही है, बजट छोटा होता जा रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मांग पूरा करने में संघर्ष करना पड़ रहा है.’

ब्रिटिश रेडक्रॉस के चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव सर निक यंग ने बताया, "हमें लगता है कि हर संकट निजी होता है और किसी इंसान पर हमेशा के लिए असर छोड़ जाता है."

उन्होंने कहा, "इस देश में ऐसे लोगों की तादाद बढ़ रही है जो संकट का सामना कर रहे हैं और हमारा शोध कहता है कि उनमें से 30 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग किसी स्वयंसेवी संस्था के पास जाने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें मदद की मांग करते हुए घबराहट होती है, या संसाधनों के बेजा इस्तेमाल का डर सताता है."

कुछ महीने पहले किए गए बीबीसी के एक सर्वेक्षण में पता चला था कि इंग्लैंड के आधे बुज़ुर्गों को अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है.

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