पाकिस्तान ने तालिबान के सामने रखी पाँच शर्तें

  • 6 फरवरी 2014
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Image caption तालिबान वार्ताकार, बाएं से, प्रो. इब्राहिम खान, मौलाना सामी उल हक़ और मौलाना अजीज़.

पाकिस्तान में अधिकारियों ने बताया है कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल और तालिबान की ओर से नामांकित टीम के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई है. बातचीत का मक़सद शांति वार्ता के लिए ज़मीन तैयार करना है ताकि एक दशक से चल रही हिंसा पर रोक लगाई जा सके.

बातचीत के पहले सत्र में सरकार ने पाँच बुनियादी शर्तें रखी हैं, जिनमें संघर्ष पर रोक शामिल है. तालिबान की टीम इस पर सहमत हो गई है कि वो अपने नेतृत्व से इन शर्तों पर बात करेगी.

वर्ष 2007 से तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने देश के अंदर विद्रोह छेड़ रखी है. पिछले सप्ताह हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बातचीत की पहल की थी.

इस साल सिर्फ़ जनवरी में देश के कई हिस्सों में तालिबान के हमले में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें कई सैनिक भी हैं. जबकि वर्ष 2007 से मारे गए लोगों की संख्या हज़ारों में है.

इस्लामाबाद के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह हाउस में चली पहले सत्र की बातचीत तीन घंटे तक चली. इसके बाद तालिबान टीम के प्रमुख मौलाना समी उल हक़ ने संयुक्त बयान पढ़कर सुनाया.

इस बयान में उन पाँच शर्तों का भी उल्लेख है, जिसे सरकारी पक्ष ने रखा है.

  • सभी बातचीत संविधान के दायरे में ही होगी.
  • बातचीत का केंद्र हिंसा प्रभावित इलाक़ों को ध्यान में रखकर होगा न कि पूरे देश के बारे में.
  • बातचीत के दौरान कोई हिंसा नहीं होगी.
  • तालिबान को नौ सदस्यीय समिति की भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा, जिसे उन्होंने अलग से बनाया है.
  • बातचीत लंबी नहीं खिंचनी चाहिए

सहमति

तालिबान के प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति जताई है कि वो मीरानशाह जाकर तालिबान के शीर्ष नेतृत्व से इन शर्तों के बारे में बातचीत करेंगे. उन्होंने ये भी वादा किया कि वे जल्द से जल्द सरकारी समिति को इस बारे में जानकारी देंगे.

बयान में ये भी बताया गया है कि तालिबान ने बातचीत में शामिल सरकारी समिति की शक्तियों और अधिकारों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है. ये भी जानकारी मांगी गई है कि क्या ये समिति तालिबान की मांगों को मान सकती है या उस पर कार्रवाई कर सकती है या नहीं.

दोनों पक्षों ने हाल की हिंसा की निंदा भी की है.

इससे पहले सरकारी पक्ष के मुख्य वार्ताकार इरफ़ान सिद्दीक़ी ने बैठक के दौरान एक एसएमएस भेजकर बताया था कि बातचीत दोस्ताना माहौल में चल रही है.

पाकिस्तान से बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी ने कहा है कि कुछ लोगों में इस बातचीत ने शांति प्रक्रिया की उम्मीद जगाई है. जबकि कुछ इस पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं और बातचीत की पहल हो सरकार की कमज़ोरी के तौर पर देख रहे हैं.

तालिबान पाकिस्तान में शरिया क़ानून लागू कराना चाहता है और ये भी चाहता है कि अमरीकी सेना इस इलाक़े से हट जाए.

सिद्दीकी के साथ वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला यूसुफजई, पूर्व राजनयिक रुस्तम शाह मोहम्मद और आईएसआई से सेवानिवृत्त मेजर आमिर शाह इस बैठक में शामिल हुए.

टीपीपी की टीम में 'तालिबान के पिता' कहे जाने वाले मौलाना समी उल हक़, इस्लामाबाद की लाल मस्ज़िद के मुख्य धर्मगुरु मौलाना अब्दुल अज़ीज़ और इब्राहिम खान शामिल हैं.

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