पैदल सड़क पार करने वाले हैं ट्रैफ़िक में बाधा?

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दुनिया भर में ग़लत तरीके से सड़क पार करने पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है लेकिन अमरीका में ऐसी ग़लती करने पर जिस तरह के क़ायदे कानून हैं, वह किसी भी विदेशी आगंतुक को चौंका सकता है.

कहा जाता है कि अमरीका में 1920 के दशक में मोटर उद्योग की ओर से किए गए प्रचार प्रसार की वजह से रेड लाइट पर सड़क पार करने के कायदे बनाए गए थे. कैलिफोर्निया के व्हीकल कोड में कहा गया है, "सड़क पर पैदल चल रहा कोई भी व्यक्ति रेड लाइट की ओर सड़क पार करने की कोशिश नहीं करेगा."

(एक अभियान, जिससे बदल गया...)

इस संहिता के तहत उन चौराहों पर भी जहाँ ट्रैफिक पूरी तरह से नियंत्रित थी, पैदल चलने वाले लोग सड़क पार नहीं कर सकते थे. बीते साल सेंट्रल लॉस एंजेलेस में पुलिस ने सुनियोजित तरीके से इन नियमों को लागू करने की कोशिश की.

यातायात विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सड़क पर पैदल चलने वाले लोग ट्रैफिक में बाधा पहुँचा रहे थे और इसकी वजह से कई दुर्घटनाएँ हुईं, यहाँ तक कि कुछ लोगों की जानें भी गई हैं. ऐसी ग़लतियों के लिए लगने वाले जुर्माने की रकम 11 हज़ार रुपये से लेकर 15 हज़ार रुपए तक की होती है.

मीडिया का सहारा

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सड़क पार करने को लेकर बने कायदे कानूनों को अमरीका में कभी कभार ही लागू किया जाता रहा है लेकिन गाड़ी चलाने वाले लोग किसी ख़ास जगह पर पैदल चलने वालों के बर्ताव को लेकर लगातार शिकायतें करते रहे हैं. देश भर में लाल बत्ती पर सड़क पार करना मना है और ये रोक कई दशकों से है.

(जान हथेली पर लेकर चलते हैं...)

यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में इतिहास के प्रोफेसर पीटर नॉर्टन बताते हैं कि साल 1923 में सिनसिनाटी में 42 हज़ार लोगों ने एक हस्ताक्षर अभियान के जरिए गाड़ियों की रफ्तार 25 मील प्रतिघंटा किए जाने की मांग की.

हालांकि ये अभियान नाकाम रहा लेकिन इसके बाद से ही ऑटो उद्योग ने ट्रैफिक दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी ड्राइवरों की बजाय पैदल चलने वाले लोगों पर डालना शुरू कर दिया. कार बेचने वाली कंपनियाँ ट्रैफिक सिग्नल पर पैदल चलने वाले लोगों के लिए ये अभियान चलाने लगीं कि नए दौर में सड़क पार करने का उनका तरीका पुराने के साथ-साथ ख़तरनाक भी है.

और अब वे पहले की तरह सड़क नहीं क्रॉस कर सकते हैं. ऑटो उद्योग ने स्थानीय ट्रैफिक दुर्घटनाओं पर लोगों का रुख बदलने के लिए मीडिया का सहारा लिया.

ट्रैफिक अवरोधक

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नॉर्टन कहते हैं, "अखबारों ने अचानक से फिज़ा बदल दी. 1923 में वे दुर्घटनाओं के लिए ड्राइवरों को जिम्मेदार ठहरा रहे थे लेकिन 1924 के आखिर आते-आते वे पैदल चलने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराने लगे. ऑटो उद्योग ने जल्द ही स्कूलों में सुरक्षा संबंधी शिक्षा पर भी असर दिखाया और फिर इस बात पर जोर दिया जाने लगा कि सड़कें और गलियाँ कारों के लिए हैं और बच्चों को उनसे दूर रहने की जरूरत है."

(उड़ने वाली कार का सपना)

उन्होंने कहा, "1920 के दशक के आखिर में सड़क पार करने वाले लोगों के तौर तरीके तय करने के लिए कई शहरों में नियम बनाए गए और 1930 के दशक में इसे लगभग पूरी तरह से लागू कर दिया गया. बाद के दशकों में ये सांस्कृतिक प्रभुत्व एक तरह से सुरक्षित हो गया. अमरीका का ऑटोमोबाइल उद्योग से बड़ा रूमानी रिश्ता जो रहा है."

टॉम वैंडरबिल्ट 'ट्रैफिकः व्हाई वी ड्राइव द वे वी डू' नाम से एक किताब लिख चुके हैं.

वे कहते हैं, "सालों तक सड़कों की डिजाइनिंग किए जाते वक्त पैदल चलने वाले लोगों को दरकिनार किया जाता रहा. उन्हें कम्प्यूटर के शुरुआती मॉडल्स में भी नहीं रखा गया और जब ऐसा किया गया तो उन्हें ट्रैफिक अवरोधक की तरह देखा गया."

जुर्माने का प्रावधान

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कुछ और भी देश थे जो अमरीका की राह पर चले और उनके यहाँ भी सड़क पैदल पार करने वाले लोगों को लेकर कायदे कानून बनाए गए. पिछले साल ही चीन में पुलिस ने एक अभियान चलाया और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया गया. शंघाई में ऐसा करने वाले लोगों को ट्रैफिक नियम जोर-जोर से पढ़ने के लिए कहा गया.

(ड्राइवर का चलान)

चाहे वो काहिरा शहर हो या कोलकाता, सड़क पार करने के नियम मौजूद नहीं हैं और पैदल सड़क पार करने का मतलब आने वाली ट्रैफिक की तरफ लोगों का बढ़ना होता है. ब्रिटेन उन देशों में से है जहाँ सड़क पैदल पार करना कोई अपराध नहीं है और वहाँ ट्रैफिक हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या अमरीका की तुलना में आधी है.

सिंगापुर में सड़क पार करने के नियम तोड़ने पर एक हज़ार डॉलर तक के जुर्माने का प्रावधान है या फिर छह महीने की जेल हो सकती है लेकिन इसके बावजूद वहाँ नियम लगातार तोड़े जाते रहे हैं.

लोगों की प्रतिक्रिया

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न्यूयॉर्क में जब पूर्व मेयर रूडी गुलियानी की अगुवाई में सड़क पैदल पार करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया तो पुलिस के लोगों ने ही उनकी मुखालफत करते हुए कहा कि उनके पास करने के लिए और भी अच्छी चीजें हैं.

(कोलकाता में नहीं चलेंगी साइकिल)

लॉस एंजेलेस की पुलिस ने अपने फेसबुक पन्ने पर जब ये अभियान चलाया तो कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी कि पुलिस राजस्व जुटाने के लिए ये तरीका अपना रही है और अपना वक्त बर्बाद कर रही है.

हालांकि बहुत से लोग ये मानते हैं कि पैदल चल रहे लोगों के साथ होने वाले हादसों के लिए अक्सर ड्राइवरों को जिम्मेदार ठहराया जाता है लेकिन इस बात के भी कोई प्रमाण नहीं हैं कि सड़क पैदल पार करने वालों के खिलाफ चलाए गए अभियान सार्थक रहे हैं.

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