ब्रिटेन में बाढ़: अलग हैं लोगों के दुखड़े

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बिहार, बंगाल या असम में आई बाढ़ में जो दृश्य दिखाई देते हैं उनकी तुलना बर्कशर या सॉमरसेट में आई बाढ़ से नहीं हो सकती. इसके कई कारण हैं, न तो पानी उतना है, न घर वैसे हैं, न सरकारी तंत्र वैसा है, और न ही लोग.

इसका ये मतलब नहीं कि लोग परेशान या दुखी नहीं हैं, उनकी तकलीफ़ों को कम करके नहीं आँका जा सकता, मगर घुटने तक या कमर तक पानी को भारतीय मन बाढ़ मानने को ही तैयार नहीं होता.

दिल्ली, मुंबई की सड़कों पर एक दिन की ज़ोरदार बारिश के बाद नाव चलाने लायक पानी भर जाता है, ग़रीबों की झुग्गियाँ बह जाती हैं लेकिन वह घटना आपदा कहलाने के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करती.

ब्रिटेन में डेढ़ हज़ार से अधिक सैनिक बाढ़ राहत में लगे हैं, लोगों को लाइफ़ जैकेट पहनाकर बोट में बिठाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है, बड़े-बड़े पंप पानी उलीच रहे हैं, लोग अपनी पीड़ा टीवी स्क्रीन पर बहुत ही शांत और संयत तरीक़े से व्यक्त कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने बाढ़ पीड़ित इलाक़े का दौरा करने के बाद ज़ोर देकर कहा कि इस बात पूरा ध्यान रखा गया है कि उनके मुआयने की वजह से राहत और बचाव में बाधा न आए.

कोई कोलाहल नहीं, कोई अराजकता नहीं, लोगों की मुख्य चिंता यही है कि उन्हें इंश्योरेस का क्लेम मिलेगा या नहीं, वे कितनी जल्दी अपने घर वापस जा सकेंगे. बोट पर बैठे कुछ बच्चों के चेहरों पर कौतूहल दिखाई देता है, जिनकी जान बचाई गई है उनमें कुत्ते-बिल्लियाँ भी हैं.

लोगों की परेशानियाँ

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Image caption बाढ़ के बाद सरकार की भी कुछ मायनों में आलोचना हुई है

कुछ ट्रेनें रद्द हो गई हैं और कुछ धीमी गति से चल रही हैं, कहीं-कहीं बिजली नहीं है तो कहीं पीने के पानी की किल्लत है, एक महिला टीवी पर कह रही थीं कि उनके घर में गर्म पानी नहीं आ रहा जिसकी वजह से वे काफ़ी परेशान हैं.

अख़बारों में छप रही शिकायतों का नमूना देखिए-- इमरजेंसी नंबर पर आसानी से फ़ोन नहीं लग रहा, लोगों से जिस दूसरे नंबर पर फ़ोन करने को कहा गया उसके कॉल चार्जेज़ ज्यादा थे, पालतू जानवरों पर और ज़्यादा ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है, वग़ैरह.

सरकार की आलोचना हो रही है कि उसने समय रहते नदी से सिल्ट निकलवाने का काम शुरू नहीं किया, प्रिंस चार्ल्स तो प्रधानमंत्री कैमरन से पहले ही सॉमरसेट के बाढ़ प्रभावित इलाक़े का दौरा कर आए, उनके आने पर लोगों ने ख़ुशी का इज़हार किया, एक व्यक्ति ने टीवी बाइट दी--"प्रिंस के आने की हमें ख़ुशी है लेकिन काश कि मौक़ा भी अच्छा होता."

प्राकृतिक आपदा के मामले में ब्रिटेन दुनिया के कुछ ख़ुशक़िस्मत देशों में है. भूकंप, तूफ़ान, बादल फटने, बाढ़ या चट्टान खिसकने की ख़बरें शायद ही कभी सुनने को मिलें. इस बार की बाढ़ वाक़ई गंभीर है, सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा तो नहीं लेकिन बिग इंसीडेंट या 'बड़ी घटना' क़रार दिया है.

हज़ारों लोग कुछ समय तक अपने घर नहीं लौट सकेंगे और वे दुखी हैं, लेकिन उनका दुख वैसा नहीं है जैसा भारत में बाढ़ पीड़ितों का होता है, हालाँकि प्रकृति के सामने इंसानी बेबसी कमोबेश एक जैसी ही है.

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