लेबनान का ख़ास ऐप- 'मैं अब भी ज़िंदा हूँ'

  • 16 फरवरी 2014
लेबनान धमाका Image copyright Getty

'मैं अब भी ज़िंदा हूं'- बस इतना ही. लेबनान में एक नया ऐप लोगों को बस एक बटन दबा कर यह संदेश ट्वीट करने की सुविधा दे रहा है.

आम हालात में सामान्य लगने वाला यह संदेश किसी बम हमले के बाद बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है.

Iamalive या 'मैं जिंदा हूँ' नाम का यह ऐप जल्द ही अन्य देशों में भी उपलब्ध होगा और इसे आपदा प्रभावित इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.

सामान्यतः जब लोग कोई ऐप बनाते हैं तो वह चाहते हैं कि वह खूब चले. लेकिन 26 साल की लेबनानी छात्रा सांद्रा हसन की अपने 'मैं जिंदा हूं' ऐप को लेकर भावनाएं कुछ मिश्रित हैं.

उन्होंने इसे 21 जनवरी को लेबनान में सुरक्षा की स्थितियों पर "हताशा ज़ाहिर करते हुए" इस ऐप को लॉंच किया.

वह कहती हैं, "मैं नहीं चाहती थी कि लोगों को सचमुच इसे इस्तेमाल करना पड़े", लेकिन वे कर रहे हैं.

दुखदायी

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Image caption लेबनान में इस ऐप को अब तक 4000 लोगों ने डाउनलोड किया है.

जब से यह ऐप लॉन्च किया गया है तब से दो बम हमले हो चुके हैं और इसे डाउनलोड करने वाले 4,000 लोगों में से दर्जनों इसे सचमुच इस्तेमाल कर चुके हैं.

एक बटन छूते ही यह ऐप एक ट्वीट कर देता है, जिसमें लिखा होता है, "मैं अब भी ज़िंदा हूं! #लेबनान #ताज़ा बम धमाके."

इसके कुछ व्यावहारिक फ़ायदे भी हैं. बम विस्फ़ोट के तुरंत बाद अक्सर फ़ोन लाइनें बहुत व्यस्त हो जाती हैं क्योंकि लोग अपने दोस्तों और परिवार की ख़ैर-ख़बर जानने की कोशिश कर रहे होते हैं और फ़ोन मिलते नहीं हैं.

लेकिन हसन के अनुसार कमज़ोर सा इंटरनेट सिग्नल भी इस ऐप के मैसेज भेजने के लिए पर्याप्त है.

पिछले कुछ समय में लेबनान में बम हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है जिससे बहुत से लोगों में गुस्सा और हताशा है. सैकड़ों लोगों ने इस ऐप पर टिप्पणी की है.

ऐप का स्वागत

हालांकि कुछ लोगों ने इसे "दुखदायी" बताया है तो कुछ ने इसकी यह कहकर आलोचना की है कि यह हिंसा को सामान्य बना रहा है.

लेकिन ज़्यादातर ने इसका स्वागत किया है और कई लोगों ने सुझाव भी दिए हैं कि इसे फ़ेसबुक से जोड़ दिया जाए, या फिर उन लोगों के इस्तेमाल करने योग्य बनाया जाए जो सोशल मीडिया पर नहीं हैं.

हसन इस ऐप में अपडेट करके इस तरह के बदलाव करने पर विचार कर रही हैं.

लेबनान से बाहर, ख़ासतौर पर मिस्र और पाकिस्तान से, कुछ लोगों ने संपर्क कर इसे उनके देश में भी उपलब्ध करवाने को कहा है.

हसन को उम्मीद है कि ऐसा किया जा सकता है.

उनसे एक एनजीओ ने भी संपर्क किया है जिसे लगता है कि इस ऐप को प्राकृतिक आपदा में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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