चीनः चंगेज खाँ की ज़मीं पर मंगोलों की मुश्किल

मंगोल लड़कियां

चीन के दूर दराज के सरहदी इलाकों में मंगोल अल्पसंख्यक रहते हैं.

800 साल पहले चंगेज खाँ यहाँ के चारागाहों में अपने घोड़े दौड़ाते थे. जिनकी पीठ पर बैठकर उन्होंने दुनिया की सबसे ताकतवर सल्तनत कायम की थी.

मंगोल आज भी पारंपरिक खेलों और विरासत का जश्न मनाते हैं लेकिन ज़्यादातर मौकों पर ये महज़ एक नुमाइश के तौर पर होता है. पूरी दुनिया की तरह यहाँ भी नए दौर के तौर तरीके अपने पांव पसार रहे हैं.

(देखेंः चीन में मंगोल अल्पसंख्यक)

यहाँ चीनी इंतजामिया हर चीज के लिए जिम्मेदार है और मंगोल महज अल्पसंख्यक. मंगोल अपनी सभ्यता और संस्कृति को संभाल कर रखे हुए हैं और उनकी यही संस्कृति लाखों चीनियों को भी अपनी ओर खींचती है.

एक मंगोल कहते हैं, "यहाँ मंगोलों का मुस्तकबिल बहुत रोशन नहीं है क्योंकि चीन से बहुत सारे लोग विस्थापित होकर यहाँ आ गए हैं और हम एक अल्पसंख्यक बनकर रह गए हैं."

मंगोल खानाबदोश

कई हजार साल से मंगोल चरवाहें यहां की विशाल चरागाहों में घूमते रहे हैं लेकिन अब उनका कहना है कि इस इलाके में चीन की गतिविधियाँ उनकी खूबसूरत सरजमीं को तबाह कर रही हैं.

(चंगेज खाँ की मूर्ति)

मंगोल खानाबदोशों की तेजी से बदलती जीवन शैली के कारण बहुत से मंगोलों को डर है कि वो अपनी पहचान खो रहे हैं. इस पुराने और खूबसूरत इलाके में जिंदगी तेजी से बदल रही है. यहाँ के चरवाहे आज भी अपनी भेड़ें चराते हैं. लेकिन जहाँ कभी उनकी भेड़ें चरा करती थीं, आज वहाँ नई नई पक्की सड़कें बन गई हैं.

उनकी जिंदगी पहले के बनिस्बत थोड़ी आसान भी हो गई है. और अब उनमें से कई लोग भेड़ों को चराने के लिए घोड़ों की जगह मोटर साइकिलों का इस्तेमाल करते हैं. अपने हम उम्र लोगों की तरह वे भी मंगोल तहजीब की पूरी तहे दिल से इज्जत करते हैं.

लेकिन उनका ये भी ख्याल है कि नए दौर के तौर तरीके उनके इलाके में तेज़ी से तब्दीली ला रहे हैं.

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