गे और ट्रांसजेंडर लोगों को फ़ेसबुक का तोहफ़ा

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लैंगिक पहचान से जुड़े मसले पर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक ने घोषणा की है कि वो यूज़र्स को उनकी इच्छा के अनुसार जेंडर बताने की आज़ादी देगा.

फ़ेसबुक ने ये फ़ैसला गे और ट्रांसजेंडर अधिकारों की वकालत करने वाले समूहों के साथ चर्चा करने के बाद लिया है.

फ़ेसबुक ने एक पोस्ट में कहा है कि क़रीब 50 विकल्पों के ज़रिए लोग ख़ुद को "अपने वास्तविक रूप में व्यक्त कर सकेंगे." इस विकल्पों में 'बाई-जेंडर', 'ट्रांसजेंडर', 'एंड्रोजीनस' और "ट्रांससैक्सुअल" शामिल हैं.

यूज़र इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि उन्हें "ही", "शी" या "दे" कहकर संबोधित किया जाए.

अमरीकी इंग्लिश

फ़िलहाल ये नए विकल्प सिर्फ़ उन लोगों के लिए उपलब्ध होंगे जो इस साइट का इस्तेमाल अमरीकी इंग्लिश भाषा में कर रहे हैं.

फ़ेसबुक ने बताया है कि इन नए विकल्पों को गे और ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए काम करने वाले पांच प्रमुख संगठनों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया है.

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फ़ेसबुक की इंजीनियर ब्रिएल हैरिसन ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, "ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जिन्हें इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने जा रहा है, लेकिन कुछ लोगों पर इसका असर होगा, जैसे उन्हें सारी दुनिया मिल गई हो."

उन्होंने बताया, "पहली बार मुझे एक ऐसी साइट मिली है और मैं सभी लोगों को बता सकती हूं कि मैं जानती हूं कि मेरा जेंडर क्या है?"

बढ़ता असर

बीबीसी के एलिस्टेयर लाइटहेड ने लॉस एंजिल्स से बताया कि फ़ेसबुक के इस क़दम से अमरीका में ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए चलाए जा रहे अभियान के बढ़ते असर के बारे में पता चलता है. इन अभियानों के तहत गे समुदायों के लिए समान नागरिक अधिकारों की मांग की जा रही है.

सैन फ्रांसिस्को स्थित ट्रांसजेंडर लॉ सेंटर "वेलकम द मूव" ने कहा है कि इस ख़बर से "कई ट्रांसजेंडर लोग रोमांचित होंगे."

थिंक टैंक विलियम्स इंस्टीट्यूट ने 2011 में बताया था कि एक अनुमान के मुताबिक़ अमरीका में क़रीब सात लाख या 0.3 प्रतिशत वयस्क ट्रांसजेंडर हैं.

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