पाकिस्तान: सरकार और तालिबान में बातचीत रुकी

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पाकिस्तान सरकार की ओर से नामित मध्यस्थों और तालिबान के बीच निर्धारित शांति वार्ता रुक गई है. ऐसा तालिबान के एक गुट के बयान के बाद हुआ.

इस बयान में कहा गया था कि चरमपंथियों ने उत्तर-पश्चिम कबायली इलाके में 23 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी है.

पाकिस्तान से बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी ने बताया है कि हत्या की यह घटना तब हुई जब सरकार चरमपंथियों के साथ बातचीत के लिए उत्सुक थी.

मोहमंद कबायली इलाके से तहरीके-तालिबान पाकिस्तान के एक धड़े ने एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि उनके लड़ाकों की पुलिस हिरासत में हो रही कथित हत्याओं का बदला लेने के लिए सुरक्षा कर्मियों की हत्या की गई है.

सरकार की ओर से शांति वार्ता के लिए चुने गए प्रतिनिधियों ने इस घटना के बाद तालिबान के मनोनीत दल के साथ होने वाली बातचीत रोक दी है.

शांति वार्ता को शुरू हुए मुश्किल से 10 दिन भी नहीं बीते हैं और बातचीत से समस्याओं को सुलझाने की जो सकारात्मक परिस्थितियां बन रही थीं वे कमजोर होती नज़र आ रही हैं.

दुष्प्रचार

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तालिबान के एक गुट की ओर से की गई 23 सैनिकों की कथित हत्या को जघन्य अपराध बताया है और इस घटना की कड़ी निंदा की है.

रविवार को ही चरमपंथियों ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि उन्होंने साल 2010 से कैदी बनाए गए सैनिकों की हत्या कर दी है.

नवाज शरीफ ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि सैनिकों की मौत से तालिबान के साथ शांति के लिए चल रही बातचीत पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रवक्ता शाहिदुल्लाह शाहिद ने एक बयान में कहा, "अनुमान है कि इस घटना का संबंध हमारे उन 23 आदमियों की हत्या से है जिन्हें 28 जनवरी से पाकिस्तानी सेना ने मारा है."

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उन्होंने कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान मोहमंद कबायली इलाके में स्थित उस गुट से संपर्क करेगा जिसने इन हत्याओं से जुड़े होने की बात कही है.

मीडिया को दिए गए एक बयान में सेना के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े किसी भी व्यक्ति की हत्या की गई है. उन्होंने कहा, "यह सब एक दुष्प्रचार है. ऐसा वे अपनी गतिविधियों को जायज़ ठहराने के लिए कर रहे हैं."

निरंतर हमले

इस बीच सैनिकों की कथित हत्या की ख़बर आने के बाद सरकार और तालिबान के बीच अकोरा खतक शहर में होने वाली नियत शांति वार्ता बीच में ही रोक दी गई है.

तालिबान की समझौता वार्ता समिति ने बैठक रद्द हो जाने पर यह कहते हुए दुख ज़ाहिर किया है कि वे युद्ध विराम के फ़ैसले पर पहुंचने ही वाले थे.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता इलियास ख़ान ने जानकारी दी कि समाज के कुछ हिस्सों की तरफ से चरमपंथियों के साथ बातचीत की सरकार की रणनीति पर घोर आपत्ति जताई जा रही थी.

उन्होंने यह भी बताया कि ये आपत्ति इसलिए जताई जा रही थी कि तालिबान ने हाल के दिनों में नागरिकों और सरकारी क्षेत्रों को अपना निशाना बनाना जारी रखा है.

बीते गुरुवार को टीटीपी ने स्वीकार किया था कि कराची में पुलिस बस पर हुए हमले में उनका हाथ है. इस हमले में 13 पुलिसकर्मी मारे गए थे.

टीटीपी से संबंधित एक गुट ने कहा है कि पेशावर के उत्तरी इलाके में एक सिनेमाघर में दो ग्रेनेड से हुए हमले में उनका हाथ है. इस ग्रेनेड हमले में 12 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

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