पीएनजी स्थित ऑस्ट्रेलिया की पनाहगाह में झड़पें

ऑस्ट्रेलिया का इमिग्रेंट डिटेंशन सेंटर इमेज कॉपीरइट Getty

पापुआ न्यू गिनी में स्थित ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेंट डिटेंशन सेंटर यानी शरणार्थियों के लिए बनाए गए शिविर में लगातार दूसरी रात हुई हिंसक झड़पों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 77 अन्य घायल हो गए.

ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि इस झड़प में मारे गए व्यक्ति की मौत अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में हुई.

घायलों में से 13 की हालत गंभीर है, जिनमें से दो को इलाज के लिए ऑस्ट्रेलिया ले जाया जा रहा है- इनमें से एक को गोलियों से घाव हुए हैं.

मॉरिसन ने कहा कि यह लोग शिविर के बाहर तब घायल हुए जब वह वहां से भाग निकले थे.

मानस द्वीप में ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने की इच्छा रखने वालों को रखा जाता है.

शरणार्थियों का मामला ऑस्ट्रेलिया में एक संवेदनशील मुद्दा है हालांकि यह देश की जनसंख्या के एक छोटे हिस्से से जुड़ा मामला है.

यूएनएचसीआर की 2012 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उस साल दुनिया में जिन लोगों ने दूसरे देशों में शरण के लिए आवेदन किया था उनमें से केवल तीन प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया आना चाहते थे.

ख़तरनाक

मॉरिसन के हवाले से समाचार एजेंसी एएफ़पी ने कहा, "यह दुखद घटना है लेकिन यह ख़तरनाक इसलिए है क्योंकि लोगों ने हिंसक प्रदर्शन का तरीक़ा चुना और शिविर से बाहर आकर ख़ुद को जोख़िम में डाला."

उन्होंने बताया कि घायलों में एक की हालत गंभीर है. उसके सिर की हड्डियां टूट गई हैं. इसके अलावा 22 अन्य घायलों का भी इलाज चल रहा है.

प्रशांत के दूरदराज़ के इलाक़े में स्थित इस कैंप और नोरू में स्थित दूसरे शिविर की स्थितियों की संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की है.

मॉरिसन ने पहले कहा था कि जब शिविर में रह रहे लोगों को बताया गया कि उन्हें पापुआ न्यू गिनी में ही बसाया जाएगा और उन्हें किसी तीसरे देश का विकल्प नहीं दिया जाएगा तो तनाव पैदा हो गया. इसके बाद हुई झड़पों में एक व्यक्ति की मौत हो गई.

शिविर में रह रहे लोगों ने वहां लगी बाड़ उखाड़ दी, शीशे और चारपाइयां तोड़ दीं. इसके बाद वहां से ग़ैर ज़रूरी स्टाफ़ को हटा दिया गया.

पैसिफ़िक सोल्यूशन नीति

मंत्री ने बताया कि शिविर से भागे लोगों को जल्दी ही पकड़ लिया गया.

पिछली लेबर सरकार ने साल 2008 में पैसिफ़िक सोल्यूशन नीति को समाप्त कर ऑफ़शोर प्रोसेसिंग कैंपों को नोरू और मानस द्वीप में पुनर्स्थापित करने का फ़ैसला किया था.

सरकार ने तब कहा था कि शरणार्थियों को ऑस्ट्रेलिया में नहीं बल्कि पापुआ न्यू गिनी में बसाया जाएगा. मौजूदा लिबरल-नेशनल सरकार ने भी वही नीति जारी रखने पर सहमति जताई है.

हालांकि ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच हुए समझौते की पुष्टि होनी अभी बाक़ी है.

पिछले सप्ताह पापुआ न्यू गिनी के विदेश मंत्री रिम्बिक पाटो ने कहा था कि सरकार देश के जाने माने लोगों की एक समिति बनाएगी और संयुक्त राष्ट्र तथा ऑस्ट्रेलिया से विशेषज्ञ सलाह लेगी ताकि इस बात को निर्धारित किया जा सके कि शरण मांगने वाले इन लोगों को देश में बसाया जाए या नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार