बातचीत रुकी तो हिंसा बढ़ेगी: तालिबान वार्ताकार

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पाकिस्तान सरकार से बातचीत के लिए तालिबान की तरफ़ से नियुक्त वार्ताकार यूसुफ़ शाह ने कहा है कि सरकार बातचीत के लिए गंभीर नहीं है और अगर बातचीत नहीं होती है तो इससे हिंसक वारदातों के बढ़ने की आशंका है.

उधर पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से बनाई गई कमेटी के एक सदस्य रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई ने कहा है कि बातचीत सिर्फ़ स्थगित की गई है, बंद नहीं की गई.

पाकिस्तान में चरमपंथ को बातचीत के ज़रिए ख़त्म करने के लिए सरकार और तालिबान दोनों की तरफ़ से एक समिति का गठन किया गया है लेकिन दोनों के बीच बातचीत रुक गई है और दोनों की तरफ़ से इस बारे में अलग-अलग बयान आ रहे हैं.

सरकारी समिति के सदस्य रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई ने कहा कि बातचीत को दोबारा शुरू करने के लिए प्रयास जारी हैं.

यूसुफ़ज़ई का कहना था, "कराची में पुलिस और अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स पर हुए दो हमले और मोहमंद एजेंसी में अर्धसैनिक बल एफसी के 23 जवानों की हत्या के बाद प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि इस तरह की वारदातें शांति प्रक्रिया के लिए धक्का हैं."

'बातचीत जारी रहे'

रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई के अनुसार नवाज़ शरीफ़ निराश नहीं हैं और वो चाहते हैं कि बातचीत जारी रहे.

दूसरी तरफ़ तालिबान की ओर से नियुक्त वार्ताकार यूसुफ़ शाह ने बीबीसी उर्दू के कार्यक्रम 'सैरबीन' में बातचीत के दौरान कहा कि सरकारी कमेटी बातचीत के लिए गंभीर नहीं है.

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Image caption तालिबान का दावा है कि सभी गुट उसकी बात मानने को तैयार हैं.

यूसुफ़ शाह का कहना था, ''युद्ध विराम के लिए जो घोषणा की गई थी, तालिबान उस पर क़ायम है, लेकिन उस बारे में घोषणा तब होगी और तमाम मामले तब हल होंगे, जब हम मिलकर बैठेंगे.''

सरकारी कमेटी के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए यूसुफ़ शाह ने कहा कि, 'अगर वो हमसे मिलने के इच्छुक नहीं हैं तो हम भी उनसे मिलने की ख़्वाहिश नहीं रखते.'

चरमपंथी घटनाओं के बारे में यूसुफ़ शाह ने कहा कि, 'वारदातें तो होती हैं और अगर सरकार और तालिबान के ज़रिए गठित कमेटी इस तरह एक दूसरे से दूर रहते हैं तो वारदातों में इज़ाफ़ा होगा.'

उन्होंने कहा कि एक बार युद्ध विराम की घोषणा हो गई तो उनका ख्याल है कि कि पूरे देश में ऐसा कोई वाक्या पेश नहीं आएगा.

रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई ने कहा कि सरकार के ज़रिए गठित समिति बरक़रार है और अनौपचारिक संपर्क जारी रहेंगे.

तालिबान के वार्ताकार यूसुफ़ शाह ने कहा कि मंगलवार को उन्होंने दूसरे तालिबान समूहों से बात की है और एक दो के अलावा बाक़ी तमाम समूहों ने सर्वसम्मति से कहा है कि जो फ़ैसला तहरीक-ए-तालिबान ने किया वो सब उसके पाबंद होंगे.

रहीमुल्लाह ने कहा कि सरकार की कोशिश होगी कि कोई रास्ता निकल आए ताकि फिर से बातचीत शुरू हो.

इससे पहले सरकारी कमेटी ने कहा था कि मौजूदा स्थिति में वो शांतिबहाली के लिए प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ज़रिए नियुक्त समिति से नहीं मिलना चाहेंगे.

मंगलवार को ही सरकारी कमेटी की एक आपातकालीन बैठक प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में हुई जिसमें बातचीत जारी रखने की हर संभव कोशिश के बारे में विचार विमर्श किया गया.

इस बैठक के बाद सरकारी समिति ने एक बयान जारी कर कहा, शांति बहाली के गंभीर प्रयासों की सफलता चरमपंथी कार्रवाईयों की समाप्ति पर निर्भर करती है.

सरकारी समिति ने तालिबान से अपील की है कि वो बिना शर्त किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई को फ़ौरन बंद कर दें.

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