वायरल हुआ यूक्रेन की यूलिया का वीडियो

  • 21 फरवरी 2014
यूक्रेन की एक प्रदर्शनकारी का वीडियो इमेज कॉपीरइट YOUTUBE

यूक्रेन की एक प्रदर्शनकारी के वीडियो को यूट्यूब पर 50 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर विरोध-प्रदर्शनों के वीडियो बढ़ने वाले हैं?

यूक्रेन में मौजूदा संकट शुरू होने के बाद पिछले तीन महीनों के दौरान यूट्यूब पर अनगिनत वीडियो अपलोड किए गए हैं.

लेकिन किसी का भी वैसा असर नहीं दिखा जैसा कि " आई एम ए यूक्रेनियन" नाम के वीडियो का असर दिखाई दे रहा है.

इस वीडियो में एक युवा प्रदर्शनकारी एक सर्द अंधेरी रात में किएफ़ की सड़कों पर खड़ी है. वो बेहद सहज होकर कैमरे का सामना कर रही है.

आज़ादी

प्रदर्शनकारी अंग्रेजी में कहती हैं, "हम आजाद होना चाहते हैं." फिर वह कहती हैं कि अदालतें भ्रष्ट हैं, और राजनीतिज्ञ तानाशाहों की तरह बर्ताव कर रहे हैं.

इस वीडियो पर हजारों कमेंट आ चुके हैं. मिस्र से लेकर कश्मीर और तुर्की तक के लोग अपनी एकजुटता दिखाने के लिए टिप्पणी कर रहे हैं.

लेकिन इस वीडियो पर आई कुछ टिप्पणियों में वीडियो की आलोचना भी की गई है. इनका कहा है कि ये एकतरफा "प्रोपेगेंडा" है, जिसमें पुलिसिया हिंसा पर फोकस किया गया है और इसमें प्रदर्शनकारियों के हाथों की जा रही हिंसा का कोई जिक्र नहीं है.

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इस वीडियो में जिस महिला को दिखाया गया है वो एक छात्र है और उसका नाम यूलिया है. यूलिया शुरुआत से ही प्रदर्शनकारियों में शामिल है.

उसका संदेश एकदम सीधा सा है, लेकिन वीडियो का चतुराई के साथ तैयार किया गया है. अमरीकी फिल्मकार बेन मूसा ने इस वीडियो की एडिटिंग की है और इसे अपलोड किया है.

बेन मूसा दुनिया भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर एक डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे और इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात यूक्रेन में यूलिया से हुई.

भरोसा

ये अकेला 'विरोध' का वीडियो नहीं है, जो इस सप्ताह वायरल हुआ है. " वाट्स गोइंग ऑन इन वेनेजुएला इन ए नटशेल" नाम से अपलोड किए गए इस वीडियो को 23 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है.

लंदन स्थित एजेंसी वीएएन की मेलानी पेक बताती हैं, "इस तरह के विरोध आधारित वीडियो लगातार बढ़ रहे हैं." यूक्रेन के विपरीत वेनेजुएला के वीडिया के तैयार करने में तकनीकि कौशल का इस्तेमाल कम किया गया है.

इसमें सिंपल वाइसओवर है और साथ में सोशल मीडिया से लिए गए चित्र और वीडियो आते जाते रहते हैं.

पेक कहती हैं कि यूट्यूब पर अगर किसी वीडिया को देखकर लगता है कि इसे घर पर ही तैयार किया गया है तो इससे उस वीडियो को फायदा मिलता है क्योंकि इससे उसकी विश्वसनीयता बढ़ती है.

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