यूक्रेन: संसद ने राष्ट्रपति को पद से हटाया

  • 22 फरवरी 2014
विक्टर यानुकोविच Image copyright Reuters

यूक्रेन की संसद ने देश के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया है. संसद ने 25 मई को राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा की है.

इससे थोड़ी ही देर पहले विक्टर यानुकोविच ने कहा था कि उनका पद छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने राजधानी कीएफ़ में हो रही घटनाओं को 'तख्तापलट' बताया था.

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ पर इस समय विपक्षी दल का नियंत्रण है.

सांसदों ने यानुकोविच को अपने संवैधानिक कर्तव्य के निर्वहन में अक्षम बताया. मतदान के बाद कुछ सांसदों ने खड़े हो कर इस फ़ैसले का स्वागत किया और कुछ ने राष्ट्रीय गीत गाया. यूक्रेन की संसद ने विपक्षी नेता यूलिया टिमोशेंको को रिहा करने की भी सहमति दे दी है हालांकि अभी ये साफ़ नहीं है कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा. यूक्रेन की संसद ने ओलेक्ज़ेंडर तर्कीनोफ़ को नया सभापति चुना है.

कीएफ़ में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक राष्ट्रपति का दफ़्तर तक़रीबन सरकारी विरोधी प्रदर्शनकारियों के नियंत्रण में है.

यूक्रेन के टीवी चैनल पर प्रसारित पहले से रिकॉर्ड किए गए एक संदेश में यानुकोविच ने कहा था कि उन्हें हर हाल में 'नागरिकों की रक्षा' करनी है और वो 'ख़ून-खराबे को रोकने के लिए हर संभव प्रयास' करेंगे.

यह संदेश भारतीय समय के अनुसार करीब साढ़े सात बजे प्रसारित हुआ. टीवी स्टेशन ने यानुकोविच को रूसी सीमा के करीब स्थित शहर खारकीव में मौजूद बताया.

राष्ट्रपति का दफ़्तर

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में राष्ट्रपति विक्टर यान्कोविच के दफ़्तर पर फ़िलहाल कोई सुरक्षा बंदोबस्त नहीं है.

बीबीसी संवाददाता केविन बिशप ने बताया कि वो बग़ैर किसी रोकटोक के राष्ट्रपति दफ़्तर के अंदर तक पहुँचने में कामयाब रहे.

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यूरोपीय संघ की मध्यस्थता के बाद शुक्रवार को हुए समझौते के बावजूद हज़ारों लोग अब भी कीएफ़ की सड़कों पर मौजूद हैं.

पढें: यूक्रेन के एक विरोधी प्रदर्शनकारी का वीडियो हुआ इंटरनेट पर वॉयरल

यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार के बाद कुल 77 लोग मारे जा चुके हैं. मरने वालों में प्रदर्शकारी और पुलिस दोनों शामिल हैं.

नवंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से मंगलवार को मरने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा रही.

यूक्रेन: सरकार और विपक्ष के बीच समझौता

समझौते की मुख्य बातें

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को सार्वजनिक किया है. इस समझौते की मुख्य बातें हैं –

  • साल 2004 के संविधान को 48 घंटे के अंदर लागू किया जाएगा. दस दिन के अंदर एक राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन किया जाएगा.
  • राष्ट्रपति, सरकार और संसद की शक्तियों के बीच संतुलन बनाने के लिए ज़रूरी संवैधानिक बदलाव तत्काल शुरू किए जाएँगे और इस प्रक्रिया को सितंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा.
  • नया संविधान बनने के बाद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे. चुनाव संबंधी नए क़ानून भी बनाए जाएँगे. किसी भी हालत में दिसंबर तक राष्ट्रपति का चुनाव पूरा हो जाना चाहिए.
  • हाल में हुई हिंसा की घटनाओं की जाँच होगी. यह जांच सरकारी अधिकारी, विपक्षी दल और यूरोप की परिषद की देखरेख में होगी.
  • सरकार आपातकाल नहीं लगाएगी. सरकारी पक्ष और विपक्ष हर प्रकार की हिंसा से दूर रहेंगे.
  • दोनों पक्ष आम जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.
  • ग़ैर-क़ानूनी हथियारों को गृह मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा.

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