वायरस पर रोक लगाने में मदद करेंगे उल्लू

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Image caption चिली में सफेद उल्लुओं के प्रजनन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

चिली में वायरस फैलाने वाले चूहों को खत्म करने के लिए सफेद जंगली उल्लुओं के प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है.

वायरस वाले चूहों के ज़रिए फैली संक्रामक बीमारी से देश में क़रीब 15 लोगों की मौत हो चुकी है.

सैंटियागो टाइम्स समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक ख़तरनाक हैंटावायरस वाले चूहे इन उल्लूओं का आहार हैं.

घास वाले इलाके में पाए जाने वाले लंबी पूंछ वाले छोटे चूहे मनुष्यों के संपर्क में आने पर उनमें वायरस संचारित करते हैं.

ऐसा आमतौर पर तब होता है जब चूहे अपने चारे की तलाश में जंगल में रह रहे लोगों के संपर्क में आते हैं.

लेकिन चिली में गर्मी के महीनों के दौरान जंगल में लगने वाली आग की वजह से चूहे शहरी इलाकों की ओर आ रहे हैं और उनके वायरस से लोग बीमार हो रहे हैं.

हालांकि चूहों पर इस वायरस या बीमारी का कोई असर नहीं पड़ता है.

अंधविश्वास से ख़तरा

चिली की वन सेवा का कहना है कि वे चिली के सफेद उल्लुओं और छोटे सींग वाले उल्लुओं की जनसंख्या को बढ़ाना चाहते हैं ताकि वे "जैविक नियामक" की भूमिका निभाते हुए संक्रामक बीमारी फैलाने वाले चूहों के प्रसार पर अंकुश लगाएं.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों को इस पक्षी को लेकर कम अंधविश्वासी होना होगा.

सैंटियागो टाइम्स से एल्डो वाल्दिविया एहुमादा ने कहा, "अगर किसी घर के पास उल्लू की आवाज़ सुनाई देती है तो लोग इसका मतलब यह निकालते हैं कि उस घर में किसी व्यक्ति की मौत हो जाएगी. लेकिन हकीक़त इससे उलट है. वास्तव में उल्लू घरों की रक्षा कर रहे हैं."

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