पाकिस्तान: 'जो सबके काम आए, पर उसके काम कोई न आए'

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कमोबेश हर मोहल्ले में बारह-चौदह बरस तक का एक 'कैरेक्टर' पाया जाता है जिसके मां बाप आम तौर पर ग़रीब होते हैं.

इस कैरेक्टर का सरपरस्त पूरा मोहल्ला होता है. किसी का सौदा-सामान ला दिया, किसी के पांव दबा दिए, गाड़ी धो दी, फर्श की सफ़ाई कर दी, किसी के बच्चे को खिला-पिला दिया, गोद में लेकर घुमा दिया, मोहल्ले के चक्कर काटने वाले किसी संदिग्ध आदमी को पकड़वा दिया, कभी सब्ज़ी वाले के पास खड़ा हो गया तो कभी नाई के पास बैठ गया.

सिगरेट चाय ला दी और फिर हैरत से मुंह खोलकर कुछ लोगों की बातें सुनने लगा. कभी समझकर तो कभी नासमझी में सिर हिला दिया या मुस्करा दिया.

इस कैरेक्टर के मां बाप ने यक़ीनन कभी उसका कोई नाम रखा होगा लेकिन पूरे मोहल्ले को इसका असल नाम जानने या उसे पुकारने में कोई दिलचस्पी नहीं होती है.

इसका ख़ुद ब ख़ुद कोई 'जेनेरिक' सा नाम पड़ जाता है. और फिर यही उसकी पहचान बन कर चिपक जाता है. कहीं बख़्शू, कहीं भोला, कहीं छोकरा तो कहीं जैदा जैसा कोई भी नाम उसे दे दिया जाता है.

कोई खाना खिला देता है, कोई ईद, त्यौहार, शादी या ग़मी पर एकाध नया या पुराना जोड़ा जूता दे देता है. किसी मवाली ने कभी चरस पिला दी तो किसी ने जुए की नाल थमा दी. किसी काम, किसी बात से इनकार नहीं. सबकी आंखों का तारा ये बख़्शू, भोला, छोकरा, जैदा.

चौपाल का हिस्सा

जब ये बख़्शू, भोला या जैदा जवान होता जाता है तो फिर इसे घरेलू काम देने की बजाए बाहर के काम दिए जाते हैं और फिर वो मोहल्ले या इलाक़े की किसी रसूख वाली सियासी या समाजी हस्ती की बैठक या चौपाल का हिस्सा बन जाता है.

साहब ने कहा तो काम कर दिया वरना पैर हिलाता रहा और जब इसके बालों में सफ़ेदी उतरने लगती है तो नए बच्चे इसे कोई इज़्ज़तदार नाम दे देते हैं जैसे कि बख़्शू चाचा, हाजी जैदा, भोला साईं वगैरह.

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Image caption तालिबान पाकिस्तान की सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है

और एक दिन वो मर जाता है या ग़ायब हो जाता है. कुछ दिनों तक उसका ज़िक्र रहता है और फिर मोहल्ला उस जैसे किसी और को बख़्शू, भोला, छोकरा, जैदा, चाचा, हाजी और साईं का ताज पहना देता है.

मुझे पाकिस्तान भी बख़्शू जैसा लगने लगा है जो सबके काम आता है, भले ही उसके काम दूसरे आएं या न आएं.

यार बख़्शू कोरिया में लड़ाई हो रही है, अपने कुछ फ़ौजी ले आ. अच्छा साहब.

बख़्शू ज़रा रूस की जासूसी करनी है, एक हवाई अड्डा दे. कोई सा भी ले लो साहब.

जवाब क्या तेरा बाप ले कर आएगा

ओए बख़्शू ये चिट्ठी ले और भाग कर चीन वालों को दे आ. अभी गया साहब. अबे सिर्फ़ चिट्ठी देकर आया, जवाब क्या तेरा बाप ले कर आएगा. अभी फिर से जाता हूं साहब.

बख़्शू फ़लीस्तीनियों को फंटी लगानी है, ज़रा दो चार तगड़े लोग तो जॉर्डन भेज. अभी भेजता हूं साहब.

अबे बख़्शू दुबई में जल्दी से कुछ मज़दूर तो भेजो. कुछ सड़कें, इमारतें, एयरपोर्ट और महल बनवाने हैं. जी साहब, अभी पकड़ के लाया. और ये ले अपना ख़र्चा पानी. मेहरबानी साहब.

मियां बख़्शू, ले पकड़ बंदूक़ और अफग़ानिस्तान को मार आ. मगर साब. अबे जा ना. ये ले पैसे. रास्ते में ज़रूरत पड़ेगी. अब मुंह क्या देख रहा है. ज़मानत की फिक्र न कर मैं करवा दूंगा. ठीक है साब आपके लिए जाता हूं.

बख़्शू ज़रा ध्यान से सुन. मैं ड्रोन अटैक करने वाला हूं मगर सामने नहीं आऊंगा, तुझे आगे कर दूंगा, तू कबूल कर लेना. क्या समझा? जी समझ गया.

जा प्यारे फटाफट

Image caption पाकिस्तान गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है

ले ये चाबी और वो जो मेरा मुंशी है ना बाला, उसकी मोटर साइकिल अपने पास रख ले. बाले को नई दिलवा दूंगा. मगर साब मुझे तो मोटर साइकिल चलानी ही नहीं आती. ओए भाई मैं सिखाने के लिए बाले की ड्यूटी लगा दूंगा. जा प्यारे फटाफट. और भूलना नहीं वो अटैक वाली बात. बिल्कुल साब, आप बेफ़िक्र रहो.

यार भाई बख़्शू आप तो हमें भूल ही गए. क्यों शर्मिंदा करते हो साब, आपको ख़ुद आने की क्या ज़रूरत थी, हुक्म करते बख़्शू सिर के बल चल कर आता. बस हाजी एक तो तुमसे बहुत दिन से मिले नहीं थे, दूसरा तुम्हें एक तकलीफ़ देनी थी. सीरिया जाने वाले कुछ लड़कों को ट्रेनिंग देनी है.

सबने कहा कि हाजी बख़्शू से बेहतर भला ट्रेनिंग कौन दे पाएगा. बेफ़िक्र हो जाओ साब. समझ लो ट्रेनिंग हो गई. और हां, वो बहरीन वाले कह रहे थे कि आप हमारी तरफ़ से बख़्शू हाजी का शुक्रिया अदा कर देना जिसके बंदों ने बहरीन के विद्रोहियों की तबीयत साफ़ करके रख दी. बस साब बख़्शू को आप जैसों की दुआओं के अलावा और क्या चाहिए.

मगर साब मेरा भी एक काम बहुत दिन से फंसा हुआ है. किसी तरह दहशतगर्दी से बख़्शू ग़रीब की जान तो छुड़ा दो, दुआएं दूंगा. अरे छुड़वा देंगे जान भी. तुझे तो हर वक़्त अपनी ही पड़ी रहती है हाजी. पहले इन लड़कों को ट्रेनिंग तो दे दे. ठीक है साब जैसा आप कहें. और सुन ज़रा जल्दी कर. अच्छा साब ये भी हो जाएगा. बख़्शू को और कोई हुक्म?

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