चीनी मीडिया में दो नए राष्ट्रीय दिवस की चर्चा

चीन में नानजिंग नरसंहार का स्मारक इमेज कॉपीरइट AFP

चीनी मीडिया की सुर्ख़ियों में जो ख़बरें छाई रहीं, उनमें बीजिंग की एक तंग गली में राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दौरा और युद्ध में मारे गए लोगों के सम्मान में दो राष्ट्रीय स्मृति दिवस बनाने की योजना शामिल हैं.

मीडिया में बुधवार को आई ख़बरों के मुताबिक़ चीन 1945 में जापान के आत्मसमर्पण करने और 1937 में नानजिंग में हुए नरसंहार के मद्देनज़र दो नए राष्ट्रीय अवकाश देने पर विचार कर रहा है.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया है कि चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस को सौंपे गए दो मसौदा क़ानूनों के मुताबिक़ तीन सितंबर को "जापानी आक्रमण के ख़िलाफ़ युद्ध में चीनी लोगों के विजय दिवस" के तौर पर मनाया जाएगा.

शिन्हुआ के मुताबिक़ "जापानी आक्रमण के दौरान नानजिंग नरसंहार में मारे गए लोगों की याद में 12 दिसंबर को राष्ट्रीय स्मृति दिवस मनाया जाएगा."

ईमानदार कोशिश

चीन का कहना है कि नानजिंग में जापानी सेना का क़ब्ज़ा होने के बाद यहां क़रीब तीन लाख लोग मारे गए. हालांकि जापानी राष्ट्रवादी चीन के इस दावे से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं.

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शिन्हुआ के मुताबिक़ ये प्रस्ताव इतिहास को याद करने की एक ईमानदार कोशिश है. इसमें कहा गया है, "इतिहास हमें सिखाता है कि जो इतिहास से नहीं सीखते हैं, वो पिछले ग़लतियों को दोहराने और भविष्य को जोखिम में डालने के लिए अभिशप्त रहते हैं."

बीजिंग और टोक्यो के बीच संबंधों में इसलिए भी तनाव आया है क्योंकि पूर्वी चीन सागर में एक द्वीप समूह को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है. इस द्वीप समूह को जापान में सेनकाकू बोला जाता है जबकि चीन में इसे दिआओयू द्वीप कहा जाता है.

बीजिंग टाइम्स ने कहा है कि स्मृति दिवस की घोषणा का काफ़ी समय से इंतज़ार था. समाचार पत्र के मुताबिक़, "लंबे समय से तीन सितंबर जैसी महत्वपूर्ण घटना को छोड़ दिया गया था और कई लोग इसके बारे में जानते तक नहीं हैं."

राष्ट्रपति का दौरा

इसबीच राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अचानक बीजिंग की एक तंग गली का दौरा किया और इस दौरान उन्होंने कोई मास्क भी नहीं पहना था. इस घटना को मीडिया में काफ़ी जगह मिली.

बीजिंग में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण कई लोग मास्क पहनने लगे थे. ऐसा दूसरी बार है जब जिनपिंग स्थानीय समुदाय के बीच अचानक आए हैं.

ग्लोबल टाइम्स ने "लोगों के प्रति उनके इस नज़रिए की" की तारीफ़ करते हुए लिखा है कि उन्होंने "क़रीब 200 स्थानीय लोगों के साथ हाथ मिलाया और उनकी रोज़मर्रे की ज़िंदगी का हालचाल पूछा."

बीते दिसंबर को वो इसी तरह अचानक एक बेकरी शॉप के उद्घाटन के मौक़े पर आ गए थे.

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शंघाई ने अपने यहां एक संतान नीति में ढ़ील देते हुए उन दंपत्तियों को दूसरा बच्चा पैदा करने की इजाज़त दे दी है, जहां पति या पत्नी में कोई एक अपने माता-पिता की अकेली संतान है.

इसके पहले बीजिंग, झेजियांग, जियांगशी और अनहुई ऐसे ही क़दम उठा चुके हैं.

सोशल मीडिया

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ शंघाई में उम्रदराज़ आबादी बढ़ रही है जबकि बच्चों की संख्या कम है. चाइन डेली ने बताया है कि इस फ़ैसले के बाद शंघाई में नवजात बच्चों की संख्या तेज़ी से बढ़ सकती है, हालांकि "वहां जनसंख्या का असंतुलन बना रहेगा." ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भधारण करने के लिए सबसे उपर्युक्त उम्र वाली महिलाओं की संख्या में 2016 तक 30 प्रतिशत की कमी होगी.

चीन में प्रोफ़ेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन के प्रवेश के साथ ही वहां सोशल मीडिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण भी मीडिया में देखने को मिला.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि पिछले एक दशक के दौरान कुछ ही विदेशी इंटरनेट कंपनियों को चीन में सफलता मिली है क्योंकि उन्हें स्थानीय कंपनियों से तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.

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