मिस्रः 'आतंकी समूह गठन' पर 26 को मौत की सज़ा

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मिस्र की एक अदालत ने एक 'आतंकी समूह' का गठन करने के लिए 26 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस समूह का उद्देश्य स्वेज़ नहर से गुज़रने वाले जहाज़ों पर हमला करना था.

स्थानीय मीडिया की ख़बरों के अनुसार न्यायाधीशों ने कहा कि अभियुक्तों पर मिसाइल और विस्फोटक बनाने के भी आरोप थे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मुकदमे की सुनवाई अभियुक्तों की गैरमौजूदगी में की गई.

इस फ़ैसले से एक दिन पहले ही नामित प्रधानमंत्री इब्राहिम महलाब ने घोषणा की थी कि "वह देश की सभी भागों में आतंक को कुचल कर रख देंगे."

सोमवार को अंतरिम प्रधानमंत्री हज़ेम बबलावी और उनके मंत्रिमंडल के अचानक इस्तीफ़ा देने के बाद महलाब को नई सरकार के गठन का प्रभारी नियुक्त किया गया है.

राष्ट्रीय एकता को नुकसान

बबलावी को जुलाई 2013 में तब नियुक्त किया गया था जब सेना ने भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को हटा दिया था.

उसके बाद से सुरक्षा बलों के मोरसी की पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड के ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान में 1,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और हज़ारों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

इस दौरान सिनाई प्रायद्वीप में स्थित चरमपंथी समूहों ने सरकार, पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमले बढ़ा दिए थे जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए.

बुधवार को दिए फ़ैसले में अदालत ने कहा कि अभियुक्तों ने सेना, पुलिस और ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काकर "राष्ट्रीय एकता" को नुकसान पहुंचाया है.

इस मामले को अब मिस्र की सर्वोच्च इस्लामिक अधिकारी, मुफ़्ती, के पास भेजा जाएगा, जो इस फ़ैसले की पुष्टि करेंगे.

अंतिम फ़ैसला 19 मार्च को आ सकता है.

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