ग्वांतानामो का क़ैदी जिसका ज़ोरदार स्वागत हुआ

  • 1 मार्च 2014
शहज़ादा ख़ान, ग्वांतानामो जेल के पूर्व क़ैदी

अमरीकी सेना के ग्वांतानामो जेल में क़रीब 220 अफ़ग़ान नागरिक बंद थे. क्यूबा स्थित इस जेल में क़रीब 50 देशों के नागरिकों को हिरासत में रखा गया था, जिनमें अफ़ग़ानों की संख्या सबसे अधिक थी.

ग्वांतानामो में बंद अधिकांश नागरिक अब अफ़ग़ानिस्तान लौट आए हैं.

काबुल और अफ़ग़ानिस्तान के अन्य प्रांतों की सड़कों पर मैंने कई अजनबियों को रोककर पूछा कि क्या वो मैनहटन या वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बारे में जानते हैं, उनमें से कुछ ने इसका उत्तर हाँ में दिया. लेकिन वो सभी लोग ग्वांतानामो के बारे में जानते थे.

मानवता का इतिहास

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के एक पूर्व ज़िला पुलिस अधिकारी हाजी ग़ालिब कहते हैं, ''मानवता के इतिहास में इस तरह की केवल दो क्रूर जेलें थीं. एक हिटलर की और दूसरी यह अमरीकी जेल.'' हाजी फ़रवरी 2003 में गिरफ़्तार किए गए थे.

ग्वांतानामो में हिरासत के दौरान तीन अफ़ग़ान क़ैदियों की मौत हो गई और 19 को बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया था. ये लोग जब अपने घर वापस लौटे तो उनका हीरो की तरह स्वागत हुआ.

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के क़ंधार के एक गांव के बुजुर्ग हाज़ी शहज़ाद ख़ान कहते हैं, ''मेरे गाँव और आसपास के इलाक़े के हज़ारों लोग मेरा स्वागत करने के लिए जमा हुए थे. मैंने क़रीब दो हज़ार लोगों से हाथ मिलाया.''

कुछ इसी तरह का स्वागत इज़तुल्लाह नसरतयार का भी हुआ, जो कि एक पूर्व मुजाहीदीन लड़ाके हैं जिन्होंने जवानी के दिनों में अमरीका के सहयोग से सोवियत सेनाओं को देश से बाहर निकालने में मदद की थी.

वो कहते हैं, ''लोगों ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया. लोगों ने मुझे जानवर और अन्य सामान लाकर दिए, जितना वो कर सकते थे.''

लेकिन अब सवाल यह उठता है कि इनमें से कितने लोग यह बताने को तैयार हैं कि जेल में उनपर क्या बीती.

अनुभवों की किताब

कुछ लोगों ने अपने अनुभवों पर किताबें लिखी हैं, जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में बेस्टसेलर रही हैं. लेकिन अन्य लोग अभी भी सतर्कता बरत रहे हैं.

इज़तुल्लाह नसरतयार के 70 साल के बुज़ुर्ग पिता नुसरत ख़ान कहते हैं, ''उन्होंने हमारे साथ जो किया वह मानवता के ख़िलाफ़ था. मानवाधिकारों और इस्लाम के ख़िलाफ़ था. मैं उसके बारे में बात नहीं कर सकता. मैं उसके बारे में बात नहीं करुंगा.'' उन्हें अमरीकी सुरक्षा बलों ने 2003 में गिरफ़्तार किया था.

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ग्वांतानामो के अनुभव के नाम पर हाजी शहज़ाद भी चुप ही रहते हैं. वो कहते हैं, ''आमतौर पर मैं लोगों से कहता हूँ कि ग्वांतानामो ससुराल की तरह था. वह एक अच्छी जगह है.''

वो कहते हैं, ''अगर हमने वहाँ की स्थितियों के बारे में सच बता दिया तो यह लोगों की चिंता बढ़ा देगा और वहाँ अभी भी बंद लोगों के रिश्तेदारों की परेशानियां बढ़ जाएंगी. ग्वांतानामो के जीवन की सच्चाई को मैं सार्वजनिक नहीं कर सकता.''

ग्वांतानामो के तथाकथित शिकायती क़ैदी, जो नीयमों का पालन करते हैं, उन्हें समुदाय के रूप में एक साथ रहने दिया जाता था. वे अपने ब्लॉक के अन्य क़ैदियों से मिल सकते थे और वो पढ़-लिख भी सकते थे.

हाज़ी गालिब कहते हैं, ''लोग वहाँ समय बरबाद नहीं करते. ग्वांतानामो के बारे में मेरी एकमात्र छवि यह है कि मैंने वहाँ क़ुरान को याद किया लिखना सीखा.''

दोनों लोगों ने ग्वांतानामो जेल में साढ़े चार साल का समय गुज़ारा. लेकिन पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान निवासी हाजी रुहुल्ला ग्वांतानामो का एक भयावह चेहरा पेश करते हैं.

वो बताते हैं, ''ग्वांतानामो न केवल आपके हिलने-डुलने की स्वतंत्रता बल्कि अन्य अधिकार भी ले लेता है. यहां तक की बोलने की भी इजाज़त नहीं थी. हमें पढ़ते समय भी अपने होठ हिलाने की भी इजाज़त नहीं थी. ऐसा करने पर सुरक्षा कर्मचारियों को लगता था कि हम दूसरे क़ैदियों से बात कर रहे हैं. और वो हमें सज़ा देते थे, ''

नया जीवन

तालिबान सरकार में वाणिज्य मंत्री रहे मावालावी अब्दुल रज़्ज़ाक को अप्रैल 2002 में गिरफ़्तार किया गया था. इसके बाद से उन्होंने पाँच साल जेल में गुज़ारे. इनमें से चार साल वो ग्वांतानामो में रहे. वो कहते हैं, ''ग्वांतानामो से जब हमें अफ़ग़ानिस्तान स्थानांतरित कर दिया गया तो, यह मर कर जी उठने जैसा था.''

घर वापसी के बाद का जीवन भी आसान नहीं था, जेल में बिताए चार-पांच सालों के अनुभव काफ़ी कड़वा था.

शहज़ादा ख़ान कहते हैं, ''रिहाई के बाद मैं अपना अंगूरों का बाग़ देखने गया, तो पाया कि पांच हज़ार से अधिक अंगूर के पौधे सूखें हुए हैं. इसने मुझे बहुत परेशान किया. मेरी ग़ैर मौजूदगी में मेरे बच्चों ने उनका ख़्याल नहीं रखा था. उस दिन मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं वास्तव में जेल में था.''

वहीं कुछ अन्य क़ैदियों को अपनी जीविका और नौकरी से हाथ धोना पड़ा.

ज़िला पुलिस के पूर्व अधिकारी हाजी ग़ालिब कहते हैं, ''न सरकार और न किसी अन्य ने हमें नौकरी दी. घर आने के बाद से मैं बिना नौकरी के हूँ.''

वो पूछते हैं, हमारे बेगुनाह साबित होने के बाद भी वो हमारी मदद क्यों नहीं करते हैं.''

कोई आरोप साबित नहीं होने के बाद रिहा किए गए लोगों में बहुत से लोगों ने कहा कि अमरीकी और अफ़ग़ान सुरक्षा बल अभी भी उन्हें प्रताड़ित करते हैं, उनको लगता है कि उनमें से कुछ के चरमपंथियों के साथ संबंध हैं.

सैनिक कार्रवाइयों में कुछ पूर्व क़ैदियों की मौत हो गई, इनमें से अधिकांश कार्रवाइयाँ अमरीकी सुरक्षा बलों ने की. कुछ लोगों को गिरफ़्तार कर अफ़ग़ानिस्तान की जेलों में रखा गया है. इन पर विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है.

पूर्व क़ैदियों का संगठन

प्रताड़ित किए जाने के डर से 2012 में क़रीब 90 लोग सामने आए और दी एसोसिएशन ऑफ़ फ़ार्मर ग्वांतानामो डिटेनी फ़्राम अफ़ग़ानिस्तान के नाम से संगठन बनाया.

इस संगठन के प्रमुख हाजी रुहल्लाह वकील कहते हैं, ''एक दूसरे को समर्थन देने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हम इस संगठन के रूप में एक साथ आए. हमने राष्ट्रपति हामिद करज़ई, नैटो के कमांडर और अमरीकी अधिकारियों से काबुल में मिलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और उन्हें आश्वस्त किया कि हम उनके लिए ख़तरा नहीं हैं.''

ग्वांतानामो में अभी भी केवल 155 क़ैदियों को रखने की ही क्षमता है. लेकिन क़रीब आठ सौ क़ैदी रखे गए हैं.

ग्वांतानामो जेल को चलाने वाले संयुक्त कार्यबल के कमांडर डमिरल रिचर्ड बटलर कहते हैं, ''यहाँ लाए गए क़ैदियों को युद्धक्षेत्र से पकड़ा गया था. युद्धक्षेत्र से अलग रखने की वजह से हमने उन्हें यहाँ रखा.''

अफ़ग़ानिस्तान वापसी के बाद हाजी ग़ालिब अब काबुल के एक ठंडे और सीलनभरे अपार्टमेंट में अपने परिवार के साथ रहते हैं. लेकिन एक नौकरी के बिना उनका जीवन कठिन हो गया है.

वो बताते हैं, ''दो अमरीकियों ने मुझसे कहा कि हमारी अमरीकी सरकार आपसे माफ़ी मांगती है, क्योंकि आपने यहाँ पाँच साल गुज़ारे. लेकिन आप निर्दोष साबित हुए.''

उन्होंने कहा, ''मैंने उनसे कहा कि मैं आपको अपने दिल से कभी माफ़ नहीं कर सकता.''

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