यूक्रेन संकट: यानुकोविच ने कहा, देश के लिए लड़ूंगा

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सत्ता से अपदस्थ किए जाने के बाद यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच रूस में पहली बार सार्वजनिक तौर पर नज़र आए हैं जहां उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में अपने देश के लिए लड़ने की बात कही है.

यानुकोविच ने कहा कि उन्हें सत्ता से 'हटाया नहीं गया' बल्कि यूक्रेन छोड़ने के लिए विवश किया गया क्योंकि उनकी जान के लिए ख़तरा पैदा हो गया था.

यानुकोविच ने कहा कि यूक्रेन की मौजूदा संसद 'वैधानिक नहीं' है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें यूक्रेन की सत्ता से हटाया, वे दरअसल 'युवा नव-फासीवादी ठग' हैं जो यूक्रेन में बहुत कम लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

इस संवाददाता सम्मेलन का आयोजन रूस के शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन में किया गया जो यूक्रेन की सीमा के निकट स्थित है.

यानुकोविच को शनिवार को ही राष्ट्रपति पद से अपदस्थ किया गया था. तब तक सरकार विरोधी प्रदर्शन चरम पर पहुंच चुके थे जिनमें बड़ी संख्या में लोग मारे गये थे.

यूक्रेन का आरोप

इससे पहले, यूक्रेन के गृह मंत्री ने आरोप लगाया है कि रूस के नौसैनिक बलों ने स्वायत्तशासी क्रीमीया इलाके के सेवेस्टोपोल हवाई अड्डे पर क़ब्ज़ा जमा लिया है.

गृह मंत्री अर्सेन अवोकोव ने रूसी सैनिकों की मौजूदगी को 'हथियारबंद सैन्य कार्रवाई' बताया है.

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लेकिन रूस के काला सागर बेड़े का कहना है कि रूस के सैनिक ऐसी किसी कार्रवाई में भाग नहीं ले रहे हैं.

क्रीमीया के दूसरे प्रमुख हवाई अड्डे सिमफेरोपोल पर भी हथियारबंद लोगों का नियंत्रण है. समझा जाता है कि यह लोग दरअसल रूस समर्थक लड़ाके हैं.

यूक्रेन की संसद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से क्रीमीया में जारी संकट पर चर्चा करने की अपील की है.

वहीं डॉलर के मुक़ाबले यूक्रेन की मुद्रा में बहुत गिरावट आ चुकी है जिसके बाद देश के केंद्रीय बैंक ने बैंकों से हर दिन नगद राशि निकालने की सीमा एक हज़ार यूरो तय कर दी है.

इस बीच यूक्रेन के अंतरिम राष्ट्रपति ओलेक्ज़ेंडर तुर्चिनोफ़ ने सशस्त्र बलों के प्रमुख एडमिरल युरिय इलिइन को बर्ख़ास्त कर दिया है. उन्हें पिछले हफ्ते ही तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने इस पद पर तैनात किया था.

तनाव बढ़ा

राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को अपदस्थ किये जाने के बाद से रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया है.

यह तनाव ख़ासतौर पर क्रीमीया में देखा जा रहा है जो यूक्रेन का अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां रूसी आबादी बहुमत में है.

मॉस्को में मौजूद बीबीसी संवाददाता ब्रिजेट केन्डाल का कहना है कि क्रीमीया, यूक्रेन के नये नेताओं और रूस के प्रति वफादार लोगों के बीच संघर्ष का नया केंद्र बन गया है.

गुरुवार को कुछ अज्ञात लोग क्रीमीया की संसद की इमारत में दाख़िल हो गए थे और इमारत की छत पर रूस का झंडा फहरा दिया था.

क्रीमीया पहले रूस का हिस्सा था जिसे उसने वर्ष 1954 में यूक्रेन को सौंप दिया था.

वर्ष 1994 में एक सहमति पत्र दस्तख़त हुए थे जिसमें रूस, अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता क़ायम रखने की बात कही थी.

क्रीमीया की संसद ने बाद में घोषणा कर दी कि वह अपनी स्वायत्तता के विस्तार के बारे में 25 मई को जनमत संग्रह करा रही है.

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