जंग की धमकी, समर्पण चाहता है रूस: यूक्रेन

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यूक्रेन के रक्षा सूत्रों ने आरोप लगाया है कि रूस की फ़ौज क्रीमिया में यूक्रेन के सैनिकों से हथियार डालने की मांग कर रही है.

सूत्रों का कहना है कि रूस के ब्लैक सी बेड़े के प्रमुख एलेक्जेंडर विटको ने चेतावनी दी है कि मंगलवार सुबह तक यूक्रेन ने हथियार नहीं डाले तो उसे हमले का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

हालांकि इस रूसी चेतावनी की ख़बर के बाद समाचार एजेंसी इतरतास ने ब्लैक-सी बेड़े के प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि कोई समयसीमा नहीं दी गई है.

उधर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा "हम आर्थिक, कूटनीतिक सहित कई तरह के क़दमों पर विचार कर रहे हैं. इन क़दमों से रूस अलग-थलग पड़ जाएगा. इनका रूस की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा. हमने जी 8 सम्मलेन की तैयारियों को रोक दिया है. मुझे लगता है कि आपको और क़दमों की अपेक्षा जारी रखना चाहिए."

वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कहना है कि रूस की फ़ौज क्रीमीया में अपने नागरिकों का बचाव कर रही है और वहां तब तक रहेगी जब तक कि राजनीतिक हालात सामान्य नहीं हो जाते. इससे पहले लावरोव ने कहा कि रूस क्रीमीया में 'उग्र राष्ट्रवादी ख़तरों' का जबाव दे रहा है.

दूसरी ओर, पश्चिम से मिल रहीं तमाम चेतावनियों के बीच रूस के प्रधाननंत्री दमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि रूस, क्रीमीया के कर्च शहर से रूस के बीच कर्च की खाड़ी पर 4.5 किलोमीटर लंबा एक पुल बनाएगा.

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मेदवेदेव ने कहा, "मैंने एक सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत रूसी सरकार की एक कंपनी को पुल निर्माण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. मैंने वित्त मंत्री से स्वायत्त क्रीमीयाई गणराज्य को मदद देने की योजना बनाने के लिए भी कहा है."

इस सबके बीच क्रीमीया और इसके आसपास के इलाकों में रूसी मूल के लोग सड़कों पर रूस के समर्थन में नारे लगा रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के प्रधानमंत्री अर्सेनी यात्सेनयुक का कहना है कि उनके देश का क्रीमीया को किसी के हवाले करने का इरादा नहीं है.

यात्सेनयुक ने कहा, "क्रीमीया, रूस की मौजूदगी के बावजूद यूक्रेन का इलाका है. हालांकि रूस की फ़ौज वहां एक अवैध सरकार का समर्थन कर रही है, हम इस समस्या से निपट लेंगे. रूस की क्रीमीया को हड़पने की कोशिश सफल नहीं होगी. हमें कुछ समय की ज़रूरत है."

रूस की भर्त्सना

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पश्चिमी देशों ने क्रीमीया में रूसी सैनिक भेजे जाने को 'यूक्रेन की संप्रभुता' का उल्लंघन बताया था.

क्रीमीया में रूसी सैनिकों की गतिविधियां बढ़ने के बाद यूक्रेन ने भी अपनी फ़ौज को सक्रिय कर दिया था. वैसे इलाके में अभी तक कोई गोली नहीं चली है जहां आबादी का बड़ा हिस्सा रूसी-भाषियों का है.

यूक्रेन में संकट बढ़ने की शुरुआत पिछले महीने तब हुई जब रूस समर्थन यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को कई महीनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से अपदस्थ कर दिया गया था.

रूस का दावा है कि उसकी सेना क्रीमीया में मानवाधिकारों की रक्षा कर रही है. वहीं यूक्रेन, अमरीका और पश्चिमी यूरोप ने रूसी कार्रवाई की भर्त्सना की है.

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यूक्रेन ने अपने सहयोगियों से आर्थिक और राजनीतिक समर्थन मांगा है.

वहीं कुछ ख़बरों में कहा गया है कि अमरीका के उप राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस से कहा है कि वह यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती की योजना का समर्थन करे.

उधर ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि यूक्रेन की उथल-पुथल, 21वीं सदी में यूरोप का 'सबसे बड़ा संकट' है.

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