मिल गईं खोई हुई अनमोल फ़िल्में

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पहले लगा था कि तीन बेहद शानदार हॉलीवुड फ़िल्मों के सारे प्रिंट शायद हमेशा के लिए नष्ट हो चुके हैं. पर ख़ुशी की ख़बर यह है कि इन्हें न केवल फिर से खोज लिया गया है बल्कि उन्हें रिलीज़़ भी किया जा रहा है.

ये फ़िल्में गायब हुईं और फिर उन्हें कैसे दर्शकों के बीच वापस लाया गया, पढ़िए इन फ़िल्मों के खोने और फिर वापस पाने की कहानी.

'वेक इन फ्राइट'

इन तीन फ़िल्मों में से पहली फ़िल्म है, 'वेक इन फ्राइट'.

'वेक इन फ्राइट' का फ़िल्मांकन ऑस्ट्रेलिया में साल 1969 में हुआ था. इसके मुख्य कलाकार हैं, ब्रिटेन के गैरी बॉन्ड और डोनाल्ड प्लेसेंस. निर्देशन किया था टोरंटो मूल के निदेशक टेड कोचेफ़ ने.

'वेक इन फ्राइट' को आज से चार दशक पहले आधुनिक ऑस्ट्रेलियाई सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कृति माना गया था.

यह फ़िल्म एक ऐसे शिक्षक की कहानी है जो खदानों के शहर बुंदान्यब्बा पहुंचता है.

सिडनी के लिए हवाई जहाज पकड़ने के ख़्याल से वह केवल एक दिन के लिए वहां रुकता है. मगर वह शराब, जुआ और कंगारुओं की हत्या जैसी घटनाओं के बीच पांच दिन फंसा रहता है. शिक्षक का किरदार बॉन्ड ने निभाया है.

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Image caption ब्रितानी कलाकार डोनाल्ड प्लीसेंस ने परेशान डॉक्टर का किरदार निभाया है.

फ़िल्म का प्रीमियर शो साल 1971 में आयोजित 'कान फ़िल्म फेस्टिवल' के दौरान हुआ. वहां इसे 'पाम डिओर' (कान फ़िल्म फेस्टिवल का सबसे बड़ा अवॉर्ड) के लिए नामित किया गया. वहीं इसके अमरीका में वितरण के अधिकार भी ख़रीदे गए थे.

बेहद कम दर्शकों और प्रचार की कमी के कारण अमरीका में यह फ़िल्म फ्लॉप हो गई. अमरीका में फ़िल्म की स्क्रीनिंग भी बेहद कम हुई.

इसके बाद यह वीएचएस या डीवीडी पर रिलीज़ हुए बिना परिदृश्य से गायब हो गई.

बताया जाता है कि इस फ़िल्म का निगेटिव करीब तीन दशकों तक खोया रहा. फिर इसके सिनेमेटोग्राफर टोनी बकले को फ़िल्म की मूल कॉपी कनस्तरों में मिली. एक हफ्ते बाद ही यह रद्दी के साथ अमरीका में जला दी जाने वाली थी.

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Image caption वेक इन फ्राइट में हिंसा और शराब के बीच फंसा एक शिक्षक दिखाया गया है.

इसका नया प्रिंट तैयार है. इसे सात मार्च को अमरीका और आयरलैंड के सिनेमा घरों में दिखाया गया.

फ़िल्म के डायरेक्टर टेड कोचेफ़ अब 80 साल के हो गए हैं और मैक्सिको में रहते हैं.

वे बताते हैं, "1970 के दशक में फ़िल्मों के निगेटिव फ़िल्म की लेबोरेटरी में लंबे-लंबे समय तक रखे जाते थे. बाद में वितरण सूची के अनुसार उनके नए प्रिंट तैयार किए जाते थे."

कोचेफ़ कहते हैं, "ये लैब प्रायः यूरोप, ब्रिटेन या अमरीका में हुआ करते थे. इसलिए कई बार तो अपनी उपयोगिता ख़त्म होने के बाद ये निगेटिव अनदेखे कर दिए जाते थे. नेशनल फ़िल्म, साउंड आर्काइव और सिनेमैटोग्राफर टोनी बकले तब बेहद हताश हुए जब 'वेक इन फ्राइट' का मूल प्रिंट सालों तक नहीं मिला."

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Image caption वेक इन फ्राइट फिल्म का नया प्रिंट तैयार किया गया.

उन्होंने बताया, "लगातार सुधार के बाद नया प्रिंट तो तैयार हो गया है मगर उसकी मूल आत्मा खो गई है."

40 साल पहले जिसने ये फ़िल्म देखी थी उन्हें रोंगटे खड़ा कर देने वाला फ़िल्म का वो दृश्य आज भी याद है जिसमें कंगारुओं को गोली मारते और उन्हें लहुलुहान होते दिखाया गया है.

मोनार्कः हेनरी अष्टम

आधी हक़ीक़त, आधे फ़साने वाली फ़िल्म मोनार्क हेनरी अष्टम की कहानी एक रात की कहानी है.

आयरिश मूल के अभिनेता टी पी मैकेना फ़िल्म में सम्राट की भूमिका में हैं.

फ़िल्म में उन्होंने एक ऐसे सम्राट की भूमिका निभाई जिसका न तो अपने महल पर नियंत्रण था और न देश की सत्ता पर. वहीं जीन मार्श ने सम्राट की पूर्व पत्नी का किरदार निभाया.

इस फ़िल्म की शूटिंग 20 साल पहले 35 एमएम कलर कैमरे से की गई थी.

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Image caption मोनार्क के निर्देशक जॉन वाल्श और मुख्य किरदार टीपी मैकना और मार्क मोंटगोमरी

20 साल बाद जब ये तहखाने में पाई गई तो इसे फिर से हासिल करने में बेहद परेशानी पेश आई. अब यह अप्रैल में डीवीडी पर रिलीज़ होगी.

निर्देशक जॉन वाल्श बताते हैं, "मोनार्क की शूटिंग के दौरान मेरी छोटी टीम को 'रोज कोडैक हेडक्वार्टर' से सीधी आपूर्ति की जाती थी. एक रेफ्रिजरेटर वैन कैमरा का निगेटिव लेकर हमारे साथ चलता था."

वे आगे कहते हैं, "हमारे ड्राइवर कूब्रिक ने जब अपना मेहनताना मांगा तो मैं सकते में आ गया. यह तो मेरी पूरी शूटिंग के बजट से भी अधिक था."

वाल्श आगे बताते हैं, "मैं खुश था कि मूल कैमरे के सारे निगेटिव मौजूद थे और युग बीत जाने के बाद में सबकी स्थिति अच्छी थी."

'ब्लैक एंजिल'

अकादमी अवार्ड से दो बार नवाज़ी गई फ़िल्म 'ब्लैक एंजल' के फ़िल्मकार रोजर क्रिश्चिएन हैं. 'ब्लैक एंजिल' रोजर की पहली प्रदर्शित फ़िल्म है. रोजर ने बताया कि इस फ़िल्म से कई अच्छे-बुरे संयोग जुड़े हैं.

टोरैंटो मूल के लंदनवासी ने इस फ़िल्म में एक फंतासी रची. यह फ़िल्म शरद् ऋतु में स्कॉटलैंट में हो रहे धर्मयुद्ध से थक-हार कर लौटे एक बहादुर इंसान की कहानी कहती है.

रोजर ने बताया, "स्कॉटलैंट में सितंबर और अक्टूबर का महीना काफ़ी ख़ुशगवार हुआ करता है. चूंकि हम हाईलैंड में शूटिंग कर रहे थे और वो भी साल के आख़िर में, तो आशंका थी कि बर्फ़बारी के कारण कहीं शूटिंग बंद न करनी पड़े."

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Image caption मोनार्कः हेनरी अष्टम् का एक दृश्य

वे आगे कहते हैं, "और बर्फ़बारी शुरू भी हो गई. मगर संयोग अच्छा था कि हमारी टीम शूटिंग ख़त्म कर घर लौटने के लिए इंग्लैंड के रास्ते में थी."

फ़िल्म में एक और खूबसूरत मोड़ तब आया जब दृश्य की ज़रूरत के अनुसार समुद्र किनारे स्कॉटलैंड के कुछ बेहद मशहूर क़िलों में से एक, इलियन डेनन क़िले में शूटिंग करते वक़्त वहां धुंध पैदा हो गई.

रोजर चाहते थे कि ब्लैक एंजल का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री के सर के चारों ओर इंद्रधनुष जैसा आभा मंडल दिखाई दे. मगर ऐसा करने की सारी कोशिशें बेकार जा रही थीं.

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Image caption ब्लैक एंजिल फिल्म का एक दृश्य

फ़िल्म की एडिटिंग के दौरान पाया गया कि धुंध के कारण सिर के चारों ओर वही आभामंडल बन गया जिसकी फ़िल्मकार को ख़्वाहिश थी.

मगर फ़िल्म के साथ चल रहा ये खूबसूरत संयोग तब दुर्योग में बदल गया जब फ़िल्म के मूल प्रिंट का 25 मिनट का अंश नष्ट हो गया.

प्रिंट को वापस पाने के काफ़ी प्रयास किए गए मगर सब असफल रहे. मूल फ़िल्म में रंगों का चयन और फ़िल्मांकन शानदार था.

रोजर बताते हैं, "मेरे पास मेरी कॉपी बची थी, मगर यह अच्छी क्वालिटी की नहीं थी. और मुझे ये मंज़ूर था कि लोग ब्लैक एंजल को एक मिथ के रूप में याद करें मगर ये मंज़ूर नहीं था कि इसकी खराब क्वालिटी लोग देखें."

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Image caption ब्लैक एंजल फिल्म की शूटिंग के दौरान, दाहिने हैं रोजर क्रिश्चिएन और साथ में हैं फिल्म के सिनेमैटोग्राफर

'ब्लैक एंजल' खो गई मगर लोग उसे भूले नहीं. रोजर को उनके चाहने वाले अक्सर फ़ोन करके उन्हें इसे फिर से रिलीज़ करने की गुजारिश करते रहे.

रोजर लगभग निराश हो चुके थे तभी उनके पास एक कॉल आई. साल 2012 में उन्हें यूनिवर्सल स्टूडियो के कार्यकर्ता ने उन्हें फ़ोन करके बताया कि उन्हें ये फ़िल्म मिल गई है.

पिछले कुछ हफ्तों में ग्लासगो, डूनडी, इनवर्नेस और एडिनबर्ग में ब्लैक एंजल की खास होमकमिंग स्क्रीनिंग की गई.

इसे 'ब्लू-रे' में भी रिलीज़ करने की योजना है. ब्लू-रे एक डिस्क फार्मेट है जिसके जरिए फ़िल्म को घर बैठे-बैठे हाई डेफ़िनिशन पर देखा जा सकता है.

रोजर क्रिश्चिएन 34 साल के बाद स्कॉटलैंड आए. उन्होंने यहां स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया.

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