रवांडा के पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख को फ़्रांस में सज़ा

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Image caption पास्कल सीमबीकांग्वा को 2008 में गिरफ़्तार किया गया था

फ़्रांस की एक अदालत ने रवांडा के पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख पास्कल सीमबीकांग्वा को 1994 में हुए एक नरसंहार के मामले में 25 साल तक की जेल की सज़ा सुनाई है.

इस ऐतिहासिक मुक़दमे में सीमबीकांग्वा को नरसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध में शामिल होने का दोषी पाया गया था.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सीमबीकांग्वा के वकील इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील करेंगे या नहीं.

एक कार दुर्घटना के बाद से ही 54 साल के सीमबीकांग्वा के शरीर का निचला हिस्सा पक्षाघात से ग्रस्त हो गया था. वह मायोट के फ्रांसीसी हिंद महासागर द्वीप पर दूसरे नाम के साथ गुमनाम सी ज़िंदगी जी रहे थे.

उन्हें 2008 में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

20 साल पहले रवांडा में हुए नरसंहार के मामले में फ़्रांस में अपराधी ठहराए जाने वाले वह पहले व्यक्ति हैं.

क़रीब 100 दिनों तक चले इस नरसंहार में तुत्सी और हुतू प्रजाति से जुड़े क़रीब आठ लाख लोग मारे गए थे. हालांकि सीमबीकांग्वा ने अपने ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है.

अभियोजन पक्ष ने सीमबीकांग्वा के लिए आजीवन कारावास देने की बात कही थी और उन्हें एक ऐसा क्रूर शख़्स बताया था जो एक नस्ल को ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्ध था.

नरसंहार को बढ़ावा

उनके वकीलों ने कहा कि यह मुक़दमा राजनीति से प्रेरित है और गवाह भी अविश्वसनीय हैं जो विरोध की भावना में ऐसा कर रहे हैं.

रवांडा की ख़ुफ़िया सेवाओं में सीमबीकांग्वा शीर्ष अधिकारियों में से थे और उन पर ख़ासतौर से उकसाने और नरसंहार कराने का आरोप लगा. उन पर हुतु जनजाति के लोगों को हथियार मुहैया कराने और दिशा निर्देश देने का आरोप भी लगा जो सड़कों पर उतर कर तुत्सी लोगों, महिलाओं और बच्चों की हत्या कर रहे थे.

सीमबीकांग्वा ने राष्ट्रपति ज़ुवेनाल हैबयारीमान के नेतृत्व में भी काम किया था जो हुतु जाति से थे. उनकी मौत अप्रैल 1994 में एक हवाई दुर्घटना में हो गई थी, जिसके बाद हिंसा शुरू हुई थी.

सीमबीकांग्वा पर फ़्रांसीसी क़ानून के तहत मुक़दमा चला जो विदेश में विदेशियों द्वारा किए गए जघन्य अपराधों और नरसंहार के लिए सार्वभौमिक न्याय के अधिकार की इजाज़त देता है.

रवांडा की मौजूदा तुत्सी नेतृत्व वाली सरकार लंबे समय से नरसंहार को बढ़ावा देने के लिए फ्रांस पर आरोप लगाती रही है जो उस वक़्त हैबयारीमान की तत्कालीन सरकार का सहयोगी था. लेकिन अब दोनों देशों के बीच रिश्तों में कुछ सुधार हुआ है.

पेरिस के अभियोजन पक्ष के दफ़्तर में मौजूद एक नई नरसंहार इकाई ने भी इस मुक़दमे को आगे बढ़ाने में मदद दी.

फ़्रांस में रवांडा नरसंहार से जुड़े दो दर्जन से भी अधिक मामलों की जांच हो रही है जिनमें राष्ट्रपति हैबयारीमान की विधवा का नाम भी जुड़ा हुआ है.

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