क्राईमिया: जनमत संग्रह के नतीजे रूस के पक्ष में

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क्राईमिया के चुनाव अधिकारियों का कहना है कि क्राईमिया में हुए जनमत संग्रह में 95.5 प्रतिशत मतदाताओं ने यूक्रेन से निकलकर रूस में शामिल होने की इच्छा जताई है.

हालांकि यह जनमत संग्रह विवादित रहा है और केवल 50 प्रतिशत मतों की ही गिनती हो पाई है.

क्राईमिया के नेताओं का कहना है कि वे इस जनमत संग्रह के नतीजों के मुताबिक़ सोमवार को रूस में शामिल हो जाएंगे.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे क्राईमिया के लोगों की इच्छा का सम्मान करेंगे.

क्राईमिया में स्थानीय समयानुसार रविवार रात आठ बजे मतदान बंद कर दिया गया था. अधिकारियों ने बताया कि जनमत संग्रह में लोगों ने 'रिकॉर्ड' मतदान किया है.

हालांकि कई विरोधियों ने इस मतदान का बहिष्कार किया था. वहीं अमरीका और यूरोपीय संघ ने जनमत संग्रह को अवैधानिक बताया है.

जनमत संग्रह क्यों?

रूस समर्थक बलों ने क्राईमिया पर इस साल फ़रवरी में नियंत्रण कर लिया था, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को विपक्ष ने सत्ता से अपदस्थ कर दिया था.

यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को पश्चिम समर्थक राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारियों ने उनके पद से हटा दिया था.

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इसके बाद क्राईमिया (जो यूक्रेन का स्वायत्त क्षेत्र है) की संसद ने रूस समर्थक सर्गेई अक्सेनोव को प्रधानमंत्री बनाया और यूक्रेन से अलग होने के पक्ष में मतदान किया.

क्राईमिया के लोग भी ऐसा ही चाहते हैं, यह दिखाने के लिए जनमत संग्रह कराया गया.

क्राईमिया की संसद, यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में सत्ता पर क़ाबिज़ लोगों को चरमपंथी बताती है.

संसद का कहना है कि यूक्रेन से क्राईमिया के लोगों के जान-माल को ख़तरा है और वो रूसी भाषा बोलने के अपने अधिकार की भी रक्षा करना चाहती है.

लेकिन कीएफ़ की नई सरकार का कहना है कि जनमत संग्रह इसलिए कराया गया, ताकि क्राईमिया में रूसी सैनिकों की मौजूदगी को सही ठहराया जा सके.

मतपत्र में दो सवाल रखे गए थे. इनमें कोई सवाल मौजूदा स्थिति को बरक़रार रखने के बारे में नहीं था.

पहला सवाल यह था कि क्या आप स्वायत्त क्राईमिया गणराज्य को रूसी संघ में मिलाने के पक्ष में हैं?

दूसरा सवाल पूछा गया था कि क्या आप क्राईमिया गणराज्य के 1992 के संविधान को बहाल करने और क्राईमिया को यूक्रेन का हिस्सा बनाए रखने के हक़ में हैं?

यूक्रेन की राय

यूक्रेन ने जनमत संग्रह को ग़ैरक़ानूनी बताया और मतदान का बहिष्कार करने के लिए कहा था.

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यूक्रेन के अंतरिम राष्ट्रपति ओलेक्ज़ेंडर तुर्चिनोव ने जनमत संग्रह के लिए क्राईमिया की संसद के फ़ैसले को अमान्य घोषित किया था. उन्होंने क्राईमिया की क़ानून बनाने वाली सभा को भंग करने की बात कही थी.

सत्ता हथियाने के आरोप में यूक्रेन ने क्राईमिया की संसद के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट भी जारी किया है.

लेकिन क्राईमिया में रूस समर्थक बल मौजूद हैं, इसलिये यूक्रेन चाहकर भी जनमत संग्रह नहीं रोक पाया.

मगर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि यह जनमत संग्रह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुरूप है.

रूसी संसद का भी कहना है कि वो इस जनमत संग्रह के परिणाम का सम्मान करेगी. संसद एक ऐसे विधेयक पर विचार भी कर रही है जिसके ज़रिए किसी विदेशी राष्ट्र के हिस्सों को रूस में शामिल किया जा सकेगा.

तीखी प्रतिक्रिया

इसबीच जनमत संग्रह पर दुनिया के प्रमुख देशों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जोर देकर कहा कि ये जनमत संग्रह ग़ैरकानूनी हैं और इन्हें कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने मास्को से पूर्वी यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय निगरानी मिशन को सहयोग देने के लिए कहा है.

यूरोपीय संघ ने अपने एक बयान में कहा है कि मतदान "ग़ैरकानूनी और अवैध हैं और इसके नतीजों को स्वीकार नहीं किया जाएगा."

इस सिलसिले में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री सोमवार को बैठक करने वाले हैं और अनुमान जताया जा रहा है कि इस दौरान रूस पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

पश्चिमी देशों की तरह ही जापान में भी क्राईमिया में हुए जनमत संग्रह को ग़ैरकानूनी बताया है. क्योदो न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक जापान ने कहा है कि मास्को को यूक्रेन की संप्रभुता और भौगोलिक एकता का सम्मान करना चाहिए. दूसरी ओर चीन ने मसले को शांतिपूर्वक हल करने की अपील की है.

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