'कितनी भोली थी जो मानती थी यहां कानून का राज है'

गुलनारा कारीमोवा इमेज कॉपीरइट AFP

उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की बेटी गुलनारा कारीमोवा की गिनती मध्य एशिया के शक्तिशाली लोगों में हुआ करती थी. पिछले साल से उनका प्रभाव कुछ कम हुआ- लेकिन ऑनलाइन वह लगातार सक्रिय रहीं, बस पांच हफ़्ते पहले तक. उसके बाद से अब वह चुप हैं.

मेरे इनबॉक्स में पड़े लंबे प्रलाप भरे पत्र में अवसाद साफ़ नज़र आता है. इसकी एक लाइन है,''मैं बहुत मानसिक दबाव में हूँ. मुझे पीटा गया है. आप मेरी बांह पर खरोंचें गिन सकते हैं.''

एक पैरा में बताया गया है कि नज़रबंदीं में जीवन कैसा होता है, जब रोज़ धमकियां मिलती हों और कैमरे के साथ पुलिस भी लगातार निगरानी करती हो.

यह चिट्ठी दुनिया के अलग-थलग पड़े और दमनकारी देशों में से एक, उज़्बेकिस्तान, से एक अटैचमैंट के रूप में भेजी गई है.

इसे भेजने वाले एक अज्ञात व्यक्ति ने ख़ुद को ऐसा व्यक्ति कहा है जो "न्याय के लिए प्रयास कर रहा" है. उसका कहना है कि चिट्ठी कुछ दिन पहले लिखी गई है और तस्करी कर उसके पास पहुंचाई गई है. लेकिन इस व्यक्ति और जानकारी देने से मना कर दिया.

'लुटेरी सामंत'

इस चिट्ठी पर किसी के दस्तख़त नहीं हैं. लेकिन इसमें दिया गया ब्यौरा और अंदर की जानकारी, लिखने का घुमावदार और साफ़-सुथरी रूसी हस्तलिपि देखकर लगता है कि लेखक कोई और नहीं बल्कि गुलनारा कारीमोवा हैं. गुलनारा को एक समय उनके पिता और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति इस्लाम कारीनोवा का उत्तराधिकारी माना जाता था.

चिट्ठी की एक लाइन है,''मैं कितनी भोली थी, जो यह समझती थी कि इस देश में क़ानून का राज चलता है.''

इमेज कॉपीरइट
Image caption गुलनारा कारीमोवा की चिट्ठी का नमूना

कारीमोवा की लिखावट और इस चिट्ठी के एक हिस्से की लिखावट के नमूने के विश्लेषण के बाद यह बात कही जा रही है कि इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना (75 फ़ीसदी) है कि चिट्ठी कारीमोवा ने ही लिखी है.

लिखावट का विश्लेषण और मिलान करने वाले इसराइली विशेषज्ञ इन्नेसा गोल्डबर्ग कहते हैं, ''मूल प्रति के बिना लिखावट का सौ फ़ीसदी मिलान करना असंभव है. लेकिन यहाँ इस बात की अधिक संभावना है कि दोनों चिट्ठियां एक ही व्यक्ति ने लिखी हैं.''

यह चिट्ठी उज़्बेकिस्तान के सबसे अधिक प्रभावशाली व्यक्ति की हार और सरकार के प्रभावशाली लोगों के ख़िलाफ़ उसके संघर्ष पर रोशनी डालती है.

पिछले 14 महीनों से कारीमोवा- जिन्हें कभी अमरीकी राजनयिकों के लीक संदेशों (केबल) में 'लुटेरी सामन्त' और उज़्बेकिस्तान की सबसे घृणित व्यक्ति बताया गया था- ने अपने शक्तिशाली पिता से अपने मतभेदों और उनके प्रभावों के कई ट्वीट किए. जैसे कि उनके कई बिज़नेस और टीवी चैनल बंद हो गए

, उनके धर्मार्थ कार्य बंद हो गए और उनके समर्थकों को गिरफ़्तार किया गया.

जैसे-जैसे कारीमोवा की सत्ता कमज़ोर पड़ी वैसे-वैसे वह सरकार के कुछ प्रमुख लोगों की खुलकर आलोचना करने लगीं, ख़ासकर अपने पिता के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी रूस्तम इनोतोव की. कारीमोवा ने उन पर सत्ता हथियाने की कोशिश का आरोप भी लगाया.

समय-समय पर हम आपस में ट्वीट करते रहे हैं. एक ऐसा देश, जहाँ इंटरनेट और मीडिया प्रतिबंधित हैं, वहां उनके ट्वीट अंदरूनी हालात की आश्चर्यजनक जानकारी देते हैं- ऐसी चीज़ों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में पहले सिर्फ़ अनुमान लगाया जा सकता था.

लेकिन 16 फ़रवरी को वह अचानक शांत हो गईं. उनका ट्विटर एकाउंट उसी समय से बंद है.

इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES

कारीमोव ने अंतिम ट्वीट उस घटना से एक दिन पहले किया था, जब उज़्बेक पुलिस ने राजधानी ताशकंद के एक भव्य अपार्टमेंट को गिरा कर उन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया जिनको कुछ दिन पहले तक कोई छूने की हिम्मत तक नहीं करता था.

बॉयफ़्रेंड गिरफ़्तार

यह चिट्ठी पुलिस की कार्रवाई और उसके परिणामों का ब्यौरा देती है, ''क्या यह संभव है कि जब आप पर कैमरों से नज़र रखी जा रही हो तो आप एक इंसान के रूप में जी सकें, जब हर जगह हथियारबंद लोग मौज़ूद हों. आप जो देखें उससे अवसादग्रस्त हो जाएं, विशेष बल के जवान आपकी छत पर कूदें और चीजों को तहस-नहस कर दें, खिड़कियों और दरवाज़ों को तोड़ दें. सबसे बुरा यह कि एक व्यक्ति की आंखों पर पट्टी बांधकर उसे जमीन पर घसीटा जाए.''

आंखों पर पट्टी बंधा व्यक्ति रूस्तम मादुमारोव हो सकते हैं, जो कि कारीमोव के व्यापारिक सहयोगी और ख़बरों के अनुसार उनके बॉयफ़्रेंड हैं. उन्हें उस रात को उनके दो निकट सहयोगियों के साथ गिरफ़्तार कर लिया गया था. उसी दिन उन पर धोखधड़ी, कर चोरी, अवैध विदेशी मुद्रा रखने और काले धन को सफ़ेद करने का आरोप लगाया गया.

अस्पष्ट भाषा में वह लिखती हैं कि पिछले कुछ हफ़्तों में उनके "सैकड़ों या शायद हज़ारों" समर्थकों और पूर्व कर्मचारियों को धमकाया गया या हिरासत में लिया गया है.

वह लिखती हैं कि उनके घर में कोई कोई टीवी नहीं हैं, इंटरनेट नहीं है, टेलीफ़ोन नहीं है और वो अपनी बेटी को लेकर बहुत चिंतित हैं, जो बीमार है.

ताशकंद में मौज़ूद कारीमोवा के एक नज़दीकी सूत्र ने बताया कि उन्हें अभी उनके घर में ही उनकी 16 साल की बेटी ईमान के साथ नज़रबंद रखा गया है.

सूत्र ने अपना नाम सार्वजनिक न करने के अनुरोध के साथ बताया कि अमरीकी दूतावास के कर्मचारियों ने ईमान से मुलाक़ात की है, क्योंकि वो एक अमरीकी नागरिक हैं (उनके पिता और कारीमोव के पूर्व पति मनसुर मकसूदी अफ़ग़ान मूल के अमरीकी नागरिक हैं).

ताशकंद स्थित अमरीकी दूतावास ने इस यात्रा पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

अपनी चिट्ठी में कारीमोवा ने अपनी माँ, बहन और अपने पिता के कुछ निकट सहयोगियों के खिलाफ आरोप लगाए हैं. इन लोगों पर उन्होंने धोखाधड़ी, ब्लैकमेल करने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं.

लेकिन कारीमोवा के आरोपों को बहुत से लोग ढोंग बता रहे हैं. उनका कहना है कि जिस सरकार की वो आलोचना कर रही हैं, बहुत समय तक वह उसी का ग्लैमरस चेहरा रही हैं.

मैंने पिछले कुछ सालों में मैंने बहुत से उज़्बेक लोगों के इंटरव्यू लिए हैं, जो उनके नाम से धंधा कर अपनी आजीविका गंवा चुके हैं.

साल 2012 में स्वीडन के पत्रकारों के एक समूह ने कुछ ऐसे सबूत दिए थे, जिनसे पता चलता है कि स्वीडन और फ़िनलैंड की टेलियासोनेरा नाम की एक कंपनी ने 2008 में उज़्बेक़िस्तान के टेलीफ़ोन बाज़ार में प्रवेश के लिए 30 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी.

इमेज कॉपीरइट Getty

जांच में पता चला कि यह पैसा जिब्राल्टर में रजिस्टर्ड एक कंपनी में लगा, जिसकी मालकिन 25 साल की गायने अवाक्यान है. वह उन दो महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें कारीमोव के ब्वायफ्रेंड के साथ 17 फ़रवरी को गिरफ़्तार किया गया था.

भ्रष्टाचार की जाँच

यह स्वीडन के इतिहास का अबतक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बन गया है. सोमवार को गुलनारा कारीमोव इस मामले की आधिकारिक संदिग्ध बन गईं. दो हफ्ते पहले स्वीडन के अधिकारियों ने घोषणा की कि वे कारीनोवा के खिलाफ काले धन को सफ़ेद के आरोपों की जाँच भी शुरू कर दी है.

गुलनारा हमेशा से टेलियासोनेरा में किसी तरह से शामिल होने से इनकार करती रही हैं. वहीं इस कंपनी का भी कहना है कि वह किसी भी ग़लत काम में शामिल नहीं है.

चिट्ठी में कारीनोवा ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ शुरू किए गए अभियान का नेतृत्व उनके पिता के सुरक्षा प्रमुख, इनोयातोव, कर रहे हैं.

दशक भर से ऐसी अफवाहें हैं कि 76 साल के इस्लाम कारीमोव गंभीर रूप से बीमार हैं, इसके बाद भी वो फ़रवरी में रूस के सोची में आयोजित शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में नज़र आए थे. वह काफी सतर्क और ऊर्जावान लग रहे थे. उन्होंने ऐसा कोई लक्षण नहीं दिखाया जिससे लगे कि वो सत्ता छोड़ने वाले हैं.

इमेज कॉपीरइट

लेकिन क्या गुलनारा को नज़रबंद करने का फ़ैसला, उनकी कमज़ोरी का एक लक्षण है? वह निश्चित रूप से उस नुक़सान को लेकर चिंतित हैं, जो उनकी मुखर और हर तरह की सूचनाओं से लैस बेटी कर सकती है.

इस सच्चाई के बाद भी कि गुलनारा का इंटरनेट बंद कर दिया गया है, वह यह व्यवस्था कर पाईं कि उनकी आवाज़ सुनी जाए. मुझे संदेश भेजने के बाद उन्होंने उज़्बेक मीडिया को भी कुछ लीक किया, जिसमें उन्होंने पिता से अपने इलाज़ के लिए देश से बाहर जाने देने की मांग की है.

उन्होंने मुझे भेजी चिट्ठी में लिखा है, ''मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि उज़्बेकिस्तान जैसे सभ्य और विकासशील देश में मेरे साथ ऐसा होगा.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार