धूम्रपान पर पाबंदी से स्वस्थ हो रहे हैं बच्चे

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर पाबंदी का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ा है.

विज्ञान पत्रिका 'लांसटे' में प्रकाशित लेख के मुताबिक़ शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान मुक्त क़ानून लागू होने के एक साल बाद ही बच्चों की समयपूर्व पैदाइश और बच्चों में होने वाले आस्थमा के मामलों में 10 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

शोधकर्ताओं की एक टीम ने उत्तरी अमरीका और यूरोप में इससे पहले हुए 11 अध्ययनों का विश्लेषण किया.

धूम्रपान पर प्रतिबंध

दी रॉयल कॉलेज ऑफ़ आब्स्टट्रिशन एंड गाइनकालजिस्ट का कहना है कि धूम्रपान पर प्रतिबंध से बच्चों और व्यस्कों को फ़ायदा हुआ है.

यह विभिन्न देशों और राज्यों में धूम्रपान विरोधी क़ानूनों का वहाँ के लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाने के लिए हुए बड़े अध्ययनों में से एक है.

बार, रेस्टोरेंट और कार्यस्थलों पर धूम्रपान को प्रतिबंधित करने वाले क़ानून व्यस्कों को पैसिव स्मोकिंग यानी कि धूम्रपान करने वालों के पास बैठकर धुंए के संपर्क में आना, के ख़तरों से बचाते हुए दिख रहे हैं.

अध्ययन में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, मास्ट्रिच विश्वविद्यालय, बेल्जियम के हासेल विश्वविद्यालय, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, ब्रिंघम और महिला अस्पताल के वैज्ञानिकों ने बच्चों के जन्म के 25 लाख से अधिक मामलों और अस्पतालों में आने वाले आस्थमा अटैक के ढाई लाख से अधिक मामलों का अध्ययन किया.

अध्ययन के प्रमुख लेखक नीदरलैंड के मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के डॉक्टर जास्पर बीन ने कहा कि 12 साल तक के बच्चों पर हुए अध्ययन में यह बात पता चली.

वो कहते हैं, ''हमारे अध्ययन से इस बात के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं कि धूम्रपान पर पाबंदी प्रसवकालीन और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए काफी महत्तवपूर्ण है. यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्रीय स्तर पर धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाने की सिफारिशों का मज़बूती से समर्थन करता है.''

बेहतर स्वास्थ्य

अध्ययन में पाया गया कि धूम्रपान मुक्त क़ानून लागू होने के बाद अपनी उम्र से काफ़ी छोटा पैदा होने के मामले में पाँच फ़ीसदी की कमी पायी गई.

अध्ययन के सह लेखक मासाच्यूसेट्स के बॉस्टन स्थित ब्रिंघम और महिला अस्पताल के प्रोफ़ेसर अजीज शेख बच्चों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई.

वो कहते हैं, ''उन देशों जहाँ अभी तक धूम्रपान विरोधी क़ानून लागू नहीं हुए हैं, वैसे देशों को इस अध्ययन के आलोक में स्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण सवाल पर फिर से विचार करना चाहिए.''

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इसके पहले हुए अध्ययनों में पाया गया था कि दुनिया भर में नियमित रूप से पैसिव स्मोकिंग करने वाले 40 फ़ीसदी बच्चों में यह सांस से संबंधित बीमारियों और बच्चों में आस्थमा बढ़ाने का कारण है.

यूरोप में हाल में हुए अध्ययनों में यह भी पाया गया था कि पैसिव स्मोकिंग बच्चों के धमनियों के मोटे होने का कारण बनता है, जो कि बाद के दिनों में दिल के दौरों और स्ट्रोक के ख़तरों को बढ़ा सकता है.

अभी दुनिया की केवल 16 फ़ीसदी आबादी ही धूम्रपान मुक्त क़ानूनों के साए में रह रही है.

स्कॉटलैंड ने 2006 और इंग्लैंड ने 2007 में सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर पाबंदी लगाने वाले क़ानून लागू किए थे.

बच्चों के लिए लाभदायक

इस अध्ययन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दी रॉयल कॉलेज ऑफ़ आब्स्टट्रिशन एंड गाइनकालजिस्ट के प्रोफ़ेसर रोनी लैमांट कहते हैं, ''यह अध्ययन इस बात के और प्रमाण उपलब्ध कराता है कि धूम्रपान पर पाबंदी वयस्को और बच्चों के लिए लाभदायक है.''

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वो कहते हैं, ''गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान का गर्भ में पल रहे बच्चें और महिला के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उन्हें इसके ख़तरे बताने की जरूरत है. उन्हें इसे छोड़ने के लिए सलाह और सहायता दी जानी चाहिए.''

वो कहते हैं, ''यह महत्वपूर्ण हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें.''

दी रॉयल कॉलेज ऑफ़ आब्स्टट्रिशन एंड गाइनकालजिस्ट ने कहा है कि धूम्रपान मुक्त वातावरण के लिए वह इस सिफ़ारिशों का समर्थन करेगा.

ब्रिटेन में पिछले 40 सालों में आस्था से पीड़ित लोगों की संख्या तीन गुनी बढ़ गई है. इस दौरान धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या घटकर आधी रह गई है. आज घर और कार जैसी सीमित जगहों में बहुत कम बच्चों को ही धुंए का सामना करना पड़ता है.

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