संघ के शिकंजे में बीजेपी: उर्दू मीडिया

  • 30 मार्च 2014
नरेंद्र मोदी Image copyright AP

पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में जहां तालिबान से बातचीत, जाली दवाओं के कारोबार और कश्मीर जैसे मुद्दों की चर्चा है वहीं भारत में आम चुनाव उर्दू मीडिया में भी छाए हुए हैं.

दैनिक हिंदुस्तान एक्सप्रेस का संपादकीय है – चुनावी घोषणापत्रों के सुहाने वादे. अख़बार कहता है कि कांग्रेस का घोषणापत्र आ चुका है जबकि बीजेपी का आना बाक़ी है.

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में जनकल्याण की योजनाओं पर ही भरोसा किया है, लेकिन अख़बार कहता है कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार और महंगाई की वजह से जो नाराज़गी झेलनी पड़ रही है, उससे कैसे पार पाया जाएगा.

अब राहुल गांधी भले ये कहें कि बीजेपी का हश्र इंडिया शाइनिंग जैसा होगा, लेकिन अख़बार के अनुसार हालात तो उसके उलट नज़र आ रहे हैं.

सब कुछ ठीक नहीं

वहीं हमारा समाज लिखता है- संघ के दवाब में बीजेपी. अख़बार के मुताबिक़ जिन लोगों ने बीजेपी को राष्ट्रीय पार्टी बनाया, आज उन्हें ही ठिकाने लगाया जा रहा है.

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Image caption श्रीनिवासन की हुई छुट्टी

अख़बार कहता है कि जसवंत सिंह का टिकट काटकर बीजेपी ने साफ़ संकेत दिया है कि पूरी पार्टी आरएसएस के शिकंजे में है. चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बीजेपी का आदर्शवाद बिखर गया है.

दैनिक राष्ट्रीय सहारा ने अपने संपादकीय में क्रिकेट की दुनिया में मचे हड़कंप का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि बीसीसीआई को दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड समझा जाता है लेकिन अब ये हक़ीक़त सामने आ रही है कि ये सारी दौलत उजली, सफ़ेद और बेदाग नहीं है.

अख़बार कहता है कि हाल में सुप्रीम कोर्ट के क़दम से पता चलता है कि भारतीय क्रिकेट की दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फ़ैसला देते हुए बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन को हटाकर उसकी कमान सुनील गावस्कर को सौंप दी.

सकारात्मक क़दम

रुख़ पाकिस्तान का करें तो जंग ने अपने संपादकीय में पाकिस्तान में जाली दवाओं के कारोबार का उल्लेख किया है.

अख़बार लिखता है कि कुछ महीने पहले एक कंपनी की बनाई सीरप को पीकर दर्जनों लोग मौत के मुंह में चले गए, तो अब लाहौर में एक दवा कंपनी की फैक्ट्री पर छापा मारकर करोड़ों की जाली दवाएं बरामद की गई हैं.

अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान में जाली दवाओं का धड़ल्ले से कारोबार किसी एक सूबे तक सीमित नहीं है बल्कि यह आम बात हो गई है, जिस पर लगाम कसना बहुत ज़रूरी है.

नवाए वक़्त ने एक बार फिर अपने संपादकीय में कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए लिखा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अपने बड़े भाई प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की तरह भारत से सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बढ़ाने की बात कर रहे हैं जबकि भारत का रवैया उनके सामने हैं.

अख़बार कहता है कि जब तक कश्मीर मसला हल न हो जाए भारत के साथ व्यापार बढ़ाने में कोई जल्दबाज़ी दिखाने की ज़रूरत नहीं है. यह संपादकीय भारत के विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद के इस बयान के संदर्भ में लिखा गया है जिसमें उन्होंने कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है.

एक्सप्रेस और जंग ने पाकिस्तान सरकार और तालिबान के बीच सीधी बातचीत को सकारात्मक क़दम बताया है. एक्सप्रेस कहता है कि पहले दौर की इस बातचीत में संघर्षविराम की अवधि बढ़ाने और निहत्थे क़ैदियों की रिहाई पर सहमति हुई और बातचीत जारी रहेगी. वहीं तालिबान ने अपने ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने की मांग रखी.

मदद का इंतज़ार

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Image caption थर पारकर में सूखे से भीषण हालात पैदा हो गए हैं

औसाफ़ ने सिंध के थरपारकर ज़िले में सूखे से पैदा हालात पर एक कार्टून के ज़रिए तीखा कटाक्ष किया है. कार्टून में क़ब्रिस्तान में लगे एक बोर्ड पर लिखा है- सरकारी मदद आ रही है, इंतज़ार करें, प्लीज़.

वहीं उम्मत के पहले पन्ने पर एक तस्वीर है जिसमें पाकिस्तानी सेना की मेडिकल टीम को थरपाकर में एक बच्चे को टीका लगाते देखा जा सकता है.

दैनिक ख़बरें ने अपने संपादकीय में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो को चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-झांगवी की ओर से मिली धमकी पर लिखा है कि पहले से ही बेहद कड़ी सुरक्षा में रह रहे राजनेता ही जब महफ़ूज़ महसूस नहीं करते, तो फिर आम लोगों का क्या होगा.

इसलिए अख़बार के अनुसार ज़रूरत इस बात की है कि पंजाब सरकार बिलावल को मिली धमकी के मद्देनज़र सख़्त क़दम उठाए.

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