एक आत्महत्या, जिसने बदल दी क़ानून की धारा

रेहताह पार्सन्स

साइबरबुलिंग यानी इंटरनेट पर डराने-धमकाने से जुड़ी एक मौत के बाद कनाडा के नोवा स्कोशिया प्रांत ने एक व्यापक क़ानून पारित किया है जिसका मक़सद इंटरनेट या ऑनलाइन दुर्व्यवहार में कमी लाना है.

लेकिन क्या यह क़ानून और इसी तरह के बाकी क़ानून साइबरबुलिंग की मूल समस्याओं को संबोधित करते हैं जो किशोरों को क्रूर बनाती हैं?

ग्लेन कैनिंग की 17-साल की बेटी, रेहताह पार्सन्स ने अप्रैल 2013 में आत्महत्या की थी. इस दुख से जूझ रहे ग्लेन ने निश्चय किया है कि अब वे बेटी की मौत के हालातों के बारे में बोलेंगे.

रेहताह महज़ 15 साल की थी जब चार लड़कों ने कथित रूप से उसका यौन शोषण किया था. एक लड़के ने उस घटना की तस्वीर ली जिसे उसने इंटरनेट के ज़रिए स्कूल भर में फैला दिया. इसके बाद महीनों तक स्कूली बच्चों ने इंटरनेट पर रेहताह को परेशान किया और साइबरबुलिंग की शिकार रेहताह ने आखिर आत्महत्या कर ली.

ग्लैन कैनिंग कहते हैं, “बलात्कार की शिकार बेटी का पिता होना बहुत निराशा और कुंठा भरा होता है. आप डैडी हैं. आप वो आदमी हैं जिस पर बेटी की मदद करने, रास्ता दिखाने और रक्षा करने की ज़िम्मेदारी मानी जाती है. और फिर ऐसा कुछ हो जाए तो बेटी को और नुक़सान पहुंचाए बग़ैर अपना आत्मसंयम बनाए रखना एक संघर्ष होता है.”

रेहताह की मौत के बाद दो लड़कों पर बाल पोर्नोग्राफ़ी सामग्री रखने और बांटने का आरोप लगा. लड़कों का कहना है कि वे दोषी नहीं है और यह मामला अभी अदालत में चल रहा है.

क़ानून

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लेकिन बहुत से लोग मानते हैं कि मामले में अब तक जो कुछ भी हुआ है, वो बहुत कम है और बहुत देर हो चुकी है.

रेहताह की आत्महत्या के बाद लोगों में आक्रोश था और उसके केंद्र में था कथित यौन हमले और फिर रेहताह के उत्पीड़न के बाद पुलिस द्वारा कोई कदम नहीं उठाना. इससे प्रेरित होकर नोवा स्कोशिया राज्य ने तुरंत साइबरबुलिंग से निपटने के लिए एक क़ानून बना डाला.

साइबर सेफ़्टी एक्ट नाम के इस क़ानून के तहत पीड़ित व्यक्ति साइबरबुलिंग के बारे में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकता है, अदालत उसे सुरक्षा दिए जाने का आदेश दे सकती है और वह परेशान करने वाले को अदालत में भी खींच सकता है.

इस क़ानून में स्कूल के प्रधानाचार्यों की भूमिका के बारे में भी प्रावधान है और इसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों की गतिविधियों के लिए मां-बाप को ज़िम्मेदारी माना गया है.

अलग पुलिस महक़मा

नोवा स्कोशिया के यह क़ानून पारित करने के बाद साइबरबुलिंग की शिक़ायतों से निपटने के लिए पहली बार अलग से पुलिस महक़मा बनाया गया है. इस यूनिट में हर रोज़ 25 फ़ोन कॉल आते हैं और सितंबर 2013 में इसके शुरू होने के बाद से युनिट ने 153 मामलों पर काम किया है.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रॉजर मैरिक इस यूनिट के प्रमुख हैं. उनका कहना है कि उनके आधे अफ़सर इन मामलों की पुलिस जांच करते हैं जबकि आधे अफ़सरों का काम है छात्रों से साइबरबुलिंग की रोकथाम के बारे में बात करना.

मैरिक के मातहत अधिकारियों की कोशिश होती है कि वह मामलों को अदालत तक जाने से पहले ही शिक़ायतों को अनौपचारिक रूप से सुलझा सकें. ज्यादातर मामलों में इंटरनेट पर परेशान करने वाले युवा से मिलकर, उसे औपचारिक तौर पर चेतावनी देना ही काफ़ी होता है.

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Image caption विशेषज्ञ मानते हैं कि साइबरबुलिंग से निपटने के लिए सिर्फ़ क़ानून ही काफ़ी नहीं हैं.

लेकिन ज़्यादा पेचीदा मामलों में जांचकर्ता सुप्रीम कोर्ट के जज से प्रिवेंशन या रोक लगाने का ऑर्डर मांग सकते हैं जिसमें परेशान करने वाले व्यक्ति और पीड़ित के बीच किसी भी तरह का संपर्क वर्जित हो. कोर्ट के इस ऑर्डर की अवमानना करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है.

साइबर सेफ़्टी एक्ट क़ानून माता-पिता से भी अपने बच्चों की इंटरनेट पर गतिविधियों पर ज़िम्मेदारी से निगरानी करने की बात कहता है, हालांकि सोशल मीडिया के बारे में मां-बाप से ज़्यादा बच्चों को जानकारी हो सकती है.

राष्ट्रीय स्तर पर प्रोटेक्टिंग कैनेडियंस फ्रॉम ऑनलाइन क्राइम एक्ट पर कनाडा की संसद में बहस चल रही है और यह विधेयक अगले कुछ हफ़्तों में पारित भी हो सकता है.

इस क़ानून के तहत अंतरंग तस्वीरों को बिना, उस व्यक्ति की इजाज़त के, इंटरनेट पर शेयर करना एक अपराध होगा.

ये विधेयक रेहताह पार्सन्स और अमांडा टॉड की मौत के बाद लाया गया. अमांडा टॉड, ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाली एक महिला थीं जिसने इंटरनेट और असल ज़िंदगी में परेशान किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली.

लेकिन आलोचकों को चिंता है कि यह विधेयक निजता के अधिकारों का हनन करता है.

आलोचना

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Image caption हमने शैतान बनाए और वह शैतान हमारे युवा हैं जिन्हें पता ही नहीं है कि महिलाओं के साथ कैसे बर्ताव करना चाहिए- ग्लैन कैनिंग

और नोवा स्कोशिया में भी हर कोई साइबर सेफ़्टी एक्ट के पक्ष में नहीं है.

राज्य के हैलीफ़ैक्स शहर में रहने वाली शिक्षिका और कवियत्री एल जोन्स इस क़ानून की, नतीजों पर ज़ोर डालने के लिए, तारीफ़ तो करती हैं लेकिन साथ ही वे इस क़ानून की बच्चों का अपराधीकरण करने के लिए निंदा भी करती हैं. उनका मानना है कि इनमें से बहुत से बच्चे ख़ुद भी साइबरबुलिंग का शिकार हुए हैं.

जोन्स कहती हैं, “हमें शिक्षा की ज़रूरत है. हम सिर्फ़ एक क़ानून बना कर ही ये नहीं सोच सकते कि इससे समस्या का समाधान हो जाएगा.”

एल जोन्स बेहतर यौन शिक्षा चाहती हैं जिसमें लड़कों को लड़कियों की मंज़ूरी की अहमियत सिखाई जाए और लड़कियों को यह समझाया जाए कि वे सेक्स के लिए बाध्य नहीं हैं.

इन दिनों रेहताह पार्संस के पिता ग्लैन कैनिंग का ज़्यादा समय उन लड़कों के बारे में सोचते हुए गुज़रता है जिन्होंने उनकी बेटी का यौन शोषण किया था.

वह कहते हैं, “हमने शैतान बनाए और वह शैतान हमारे युवा हैं जिन्हें पता ही नहीं है कि महिलाओं के साथ कैसे बर्ताव करना चाहिए, पिता की क्या ज़िम्मेदारियां होती हैं.”

कैनिंग कहते हैं कि उन लड़कों के निष्ठुरता की वजह से आज उन्हें डैड कहने वाली बेटी उनके साथ नहीं है.

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