इतालवी फ़ोटोग्राफ़र के कैमरे से 70 का दशक

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गिआनी बेरेंगो गार्डिन इटली के सबसे मशहूर जीवित फ़ोटोग्राफ़रों में से एक है जो युद्ध के बाद मातृभूमि के अपने तस्वीरों के लिए जाने जाते हैं.

उनके काम की एक प्रदर्शनी लंदन की प्रहलाद बब्बर गैलरी में चल रही है.

यह उस परियोजना के तहत लगाई गई पहली ब्रिटिश प्रदर्शनी है जो 1975 में विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय में बीसवीं सदी लैंडस्केप फोटो प्रदर्शनी के दौरान बिल बैरन्ट द्वारा चयनित किया गया था.

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इस प्रदर्शनी में इतालवी तस्वीरों के साथ-साथ ग्रामीण भारत की तस्वीरें भी शामिल हैं जो 1970 के दशक के अंत में बड़े परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे भारत की एक झलक पेश करती हैं.

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उन्होंने भारत में दो साल के दौरान आम लोगों के जीवन, उनके रीति-रिवाजों, उनकी संस्कृतियों और रहन-सहन से जुड़ी तस्वीरें लीं.

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भारत के बारे उनके अनुभव पूछने पर उन्होंने कहा, "मैं हमेशा गांधी का बड़ा प्रशंसक रहा हूँ और उनका एक वाक्य मेरे मन के गहराई में कहीं छू गया है. उन्होंने कहा कि यूरोपीय और पश्चिमी देशों के लोग भारत आते हैं और बड़े शहरों की यात्रा करते हैं, लेकिन कभी गांवों को देखने नहीं जाते, भले ही वास्तविकता में भारत छोटे गांवों से बना हो."

यहां पेश है उनके कैमरे में क़ैद उस दौर की भारत की कुछ तस्वीरें.

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