जब इस रहस्यमयी बंदर ने की आत्महत्या

  • 5 अप्रैल 2014
बंदर Image copyright ALAMY

जेरेमी क्ले लिखते हैं पशु विशेषज्ञ वानरों को पालतू बनाए जाने को सही नहीं मानते है इसकी कई वजहें हैं लेकिन 19 वीं सदी की एक विचित्र घटना विशेष रूप से चेतावनी देने वाली है.

रॉकवेल साइरॉक नाम के एक व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से होने वाली फांसी को दर्शकों की भीड़ में शामिल होकर देखने का शौक़ था. उसके पालतू बंदर जोको को भी यह बहुत अच्छा लगता था.

वे दोनों खाली दिनों में विक्टोरियन उत्तरी कैरोलिना के शहरों का दौरा किया करते थे.

जोको गोल्ड्सबोरो में अपने घर के आसपास मीलों तक बच्चों और बड़ों में खासा लोकप्रिय था. वह भी अपने मालिक की तरह फांसी लटकाए जाने के आयोजन में गहरी दिलचस्पी लेता था.

आत्महत्या

साल 1880 की गर्मियों के दिन में साइरॉक ने एक सज़ायाफ्ता हत्यारे की फांसी देखने की योजना बना रखी थी. लेकिन राज्य के अधिकारी ने फांसी की सजा को टाल कर उसकी योजनाओं पर पानी फेर दिया.

साइरॉक काफ़ी हताश था. उसने एक ऐसा सीन निर्मित किया जिसमें वो फांसी का इंतजार कर रहे व्यक्ति को सूली पर चढ़ते करीब से देख रहा है.

जोको भी आँखे फाड़कर अपने मालिक को फांसी का मचान और फंदा बनाते देख रहा था.

घर वापस आने के बाद जोको अपने मालिक के साथ व्यस्त हो गया. लेकिन बाद में जोको इमारत की छत पर गले में कपड़े का फंदा डाले हुए मृत पाया गया. वो अपने ही प्रयोग का शिकार हो गया था.

उसका यह एक निजी प्रयास विकासवादी सिद्धांत की सफलता से कम नहीं था.

लिवरपूल इको के द्वारा इसे "सदी का सबसे अनूठे आत्महत्याओं में से एक" कहे जाने को तत्काल खारिज कर दिया गया.

इस तरह से 19 वीं सदी के पालतू पशुओं की देखभाल का एक सबसे निराशाजनक प्रकरण समाप्त हो गया.

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