दवा कंपनी रैनबैक्सी को ख़रीदेगी सन फ़ार्मा

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भारतीय दवा कंपनी सन फ़ार्मास्युटिकल्स ने अपनी प्रतिद्वंद्वी दवा कंपनी रैनबैक्सी के अधिग्रहण पर सहमति जताई है.

यह क़रार चार अरब डॉलर (क़रीब 24,000 करोड़ रुपए) में हुआ है. रैनबैक्सी कंपनी में ज़्यादातर शेयर जापान की कंपनी दाइची सैंक्यो के पास है. सन फ़ार्मा ने रैनबैक्सी के सभी शेयर ख़रीद लिए हैं.

इस अधिग्रहण के बाद सन फ़ार्मा जेनेरिक दवा बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी दवा कंपनी हो जाएगी.

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब रैनबैक्सी अमरीकी दवा नियामकों के निशाने पर है, जिन्होंने रैनबैक्सी के कुछ प्रतिष्ठानों से निर्मित दवाओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है.

हालांकि इस क़रार के लिए अभी शेयरधारकों और नियामक निकायों से मंज़ूरी लेना बाकी है.

'सन फ़ार्मा की ताकत बढ़ेगी'

सन फ़ार्मा के प्रबंध निदेशक दिलीप सिंघवी ने एक बयान में कहा, ''भारतीय और अमरीकी दवा बाज़ार में रैनबैक्सी का अच्छा प्रभाव है.''

उन्होंने कहा, ''यह समझौता तेज़ वृद्धि दर्ज करने वाले बाज़ारों में सन फ़ार्मा की ताक़त में इजाफ़ा करेगा.''

पेटेंट मामले में नोवार्टिस की याचिका खारिज

इस वर्ष की शुरुआत में फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) ने रैनबैक्सी की पंजाब के टोंसा स्थित फ़ैक्ट्री से बनने और निर्यात होने वाली दवाओं के अमरीकी बाज़ार में आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

रैनबैक्सी के लिए दवा बनाने वाली यह चौथी फ़ैक्ट्री है जिस पर प्रतिबंध लगाया गया.

अमरीकी दवा नियामक संस्था ने कहा था कि फ़ैक्ट्री में दवा निर्माण में नियमों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था.

गुणवत्ता

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Image caption रैनबैक्सी की चार फैक्ट्रियों की दवाओं पर अमरीका में प्रतिबंध लगा है.

नियामक संस्था ने आरोप लगाया था कि यहां बनने वाली दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं.

अमरीका के न्यूजर्सी के अटार्नी की तरफ से भी कंपनी को समन जारी हो चुका है, जिसमें पंजाब स्थित फ़ैक्ट्री के बारे में एफ़डीए द्वारा उठाई गई आपत्तियों के संबंध में कंपनी को दस्तावेज़ उपलब्ध कराने को कहा गया.

इस अधिग्रहण करार के अनुसार, रैनबैक्सी के शेयरों की सबसे बड़ी हिस्सेदार जापानी कंपनी दाइची सैंक्यो क़ानूनी मामले में होने वाले खर्च उठाएगी.

रैनबैक्सी केवल अकेली कंपनी नहीं है जिसकी कुछ इकाइयों द्वारा निर्मित दवाओं पर अमरीका में प्रतिबंध लगाया गया है.

पिछले महीने सन फ़ार्मा के एक विभाग से आयात होने वाली दवाओं पर भी अमरीका प्रतिबंध लगा चुका है.

इस बारे में अमरीकी जांच नियामकों का कहना था कि कंपनी की यह इकाई मानकों के आधार पर दवाओं का निर्माण नहीं कर रही थी.

कुल मिलाकर एफ़डीए ने 30 भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को ''आयात चेतावनी'' सूची में डाल रखा है.

इस सूची में आने वाली दवा कंपनियों के कुछ खास उत्पादों या एक विशेष इकाई से उत्पादित सभी उत्पादों को जब्त करने का अमरीकी अधिकारियों के पास अधिकार होता है.

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