इसराइल ने फ़लस्तीनी प्राधिकरण पर प्रतिबंध लगाया

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इसराइल ने फ़लस्तीनी प्राधिकरण के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय संधियों पर हस्ताक्षर करने पर, जवाबी कारवाई में उनपर प्रतिबंध लगा दिया है.

इसराइली अधिकारियों के अनुसार फ़लस्तीनी प्राधिकरण के ज़रिए जमा किए गए टैक्स की रक़म पर भी पाबंदी लगा दी गई है और इसराइल के बैंकों में जमा फ़लस्तीनी प्राधिकरण के पैसों तक उनकी पहुंच को भी बहुत सीमित कर दिया गया है.

फ़लस्तीन की तरफ़ से मुख्य वार्ताकार साएब एराकात ने इसराइल की इस हरकत की निंदा करते हुए इसे 'इसराइली अपहरण और चोरी' क़रार दिया है.

इसराइल और फ़लस्तीनी प्राधिकरण दोनों की तरफ़ से उठाए जाने वाल क़दमों की कड़ी में ये बिल्कुल ताज़ा क़दम है जिसके कारण अमरीका के नेतृत्व में शांति प्रक्रिया की कोशिशों पर नकारात्मक असर पड़ा है.

इसराइल का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संधि पर दस्तख़त करने के फ़लस्तीनी प्राधिकरण का फ़ैसले उस वचन का उल्लंघन है जो पिछले साल जुलाई में तीन साल के बाद शांति प्रक्रिया की बातचीत के शुरू करने के समय फ़लस्तीनी प्राधिकरण ने दिया था.

शुक्रवार को स्विटज़रलैंड ने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि 'फ़लस्तीनी राज्य' ने जेनेवा कन्वेंशन्स पर दस्तख़त कर दिए हैं जिसके तहत युद्द और सैन्य क़ब्ज़े से संबंधित नियम क़ानून बनाए जाते हैं.

लेकिन फ़लस्तीनियों का हमेशा से ही आरोप रहा है कि पूर्वी यरूशलम और पश्चिमी किनारे में यहूदी बसावट जारी रखकर इसराइल ने चौथे जेनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन किया है. इसराइल ने इन इलाक़ों को 1967 में जीत लिया था.

टैक्स में कटौती

नवीनतम घटनाक्रम में इसराइल के अधिकारियों ने कहा है कि फ़लस्तीन अधिकारियों द्वारा एकत्र टैक्स की रक़म में से क़र्ज़ की अदाएगी के लिए पैसों को निकाल लिया जाएगा.

इसराइल फ़लस्तीन की ओर से करों को जमा करता है और हर महीने लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी की लगभग पांच अरब रूपए फ़लस्तीनी प्राधिकरण को स्थानांतरित करता है जो कि प्राधिकरण के बजट के दो तिहाई के बराबर है.

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह रोक कब तक है और कितने पैसों पर लगाई गई है.

इसराइल ने यह भी कहा है कि वह ग़ज़ा पट्टी के तट पर चल रही गैस की खोज में अपनी भागीदारी भी निलंबित कर देगा.

जवाबी कार्रवाई

समाचार एजेंसी एएफ़पी को एराकात ने बताया की यह "फ़लस्तीनी लोगों के पैसों की चोरी है."

एराकात ने इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून और नियमों का उल्लंघन भी क़रार दिया.

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इसराइल ने फ़लस्तीनी अधिकारियों के साथ अपने संपर्क सीमित करने का निर्णय बीते बुधवार को तब लिया जब फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने 15 अंतरराष्ट्रीय संधियों और कन्वेंशन्स पर दस्तख़त करने के लिए आवेदन दिया था.

फ़लस्तीनी अधिकारी इस बात से नाराज़ थे कि इसराइल ने वादे के मुताबिक़ इसराइल की जेलों में क़ैद फ़लस्तीनी क़ैदियों की चौथी खेप को रिहा नहीं किया. फ़लस्तीनी गुट इसी शर्त पर पिछले साल इसराइल से शांति वार्ता के लिए तैयार हुआ था.

फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति अब्बास ने इसराइल द्वारा फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहायी न करने के जवाब में ही अंतरराष्ट्रीय संधियों पर हस्ताक्षर किया था.

इसराइल का कहना है कि फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई, शांति वार्ता की प्रगति और और इस बात पर निर्भर थी कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण अपने से कोई ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे ये लगे कि ये एक अलग फ़लस्तीन देश बनाने की प्रक्रिया में उठाया गया क़दम है.

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