पाकिस्तान: बच्चे का शव चुराने-खाने के आरोप में एक गिरफ़्तार

  • 14 अप्रैल 2014
मोहम्मद आरिफ अली, पाकिस्तान, नरभक्षण Image copyright Ikram Piracha

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस ने एक व्यक्ति को नरभक्षण के संदेह में गिरफ़्तार किया है. मोहम्मद आरिफ़ अली को एक बच्चे के शव को कब्र से चुराने का आरोप में हिरासत में लिया गया है.

आरिफ़ के पड़ोसियों ने पुलिस से उनके घर से सड़े हुए मांस की गंध आने की शिकायत की थी. पुलिस ने कहा है कि उसे आरिफ़ के घर से कई बच्चों के सिर मिले हैं.

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अली ने इन आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने इसके लिए अपने भाई मोहम्मद फरमान अली को ज़िम्मेदार बताया है.

आरिफ़ और उनके भाई को साल 2011 में कब्र से एक बच्ची का शव चुराने का दोषी पाया गया था और उन्हें दो साल क़ैद की सज़ा हुई थी.

इन दोनों भाइयों ने बच्ची के शव के निचले हिस्से को काटने और पकाकर खाने की बात स्वीकार की थी. दोनों भाइयों को कब्र को नुकसान पहुँचाने के लिए सज़ा सुनाई गई थी क्योंकि पाकिस्तान में नरभक्षण से जुड़ा कोई क़ानून नहीं है.

इन दोनों भाइयों की सज़ा मई, 2013 में पूरी हुई थी. उनके जेल से छूटने पर पंजाब के दरया ख़ान क़स्बे में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया थे. ये दोनों भाई इसी क़स्बे के रहने वाले हैं.

उसके बाद से दोनों भाई आम जनजीवन से कट कर रह रहे थे.

सिर बरामद

दरया ख़ान के पुलिस अधीक्षक अमीर अब्दुल्ला ख़ान ने बीबीसी से कहा कि पुलिस ने सोमवार सुबह अली भाइयों के घर पर छापा मारा और चोरी किया गए शव बरामद किए.

उन्होंने बताया, "पुलिस को कई बच्चों के सिर मिले. इन बच्चों की उम्र दो या तीन रही होगी. इन दोनों से बच्चों के शव शायद कब्र खोदकर निकाले गए होंगे. लेकिन ये शव किस कब्र से निकाले गए हैं और किनके हैं इसका अभी पता नहीं चल सका है."

उन्होंने बताया कि छापे के वक़्त घर में मौजूद आरिफ़ अली को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है जबकि फरमान अली की उसे तलाश है.

' महिलाओं का कत्ल कर खाया मांस'

पुलीस अधीक्षक ने बीबीसी से कहा, "शुरुआती पूछताछ में आरिफ़ ने बच्चे का शरीर के टुकड़े करने और पकाने की बात स्वीकार की है लेकिन इसके लिए उसने पूरी तरह अपने भाई को दोषी ठहराया है. उसने इसमें किसी तरह की मदद करने या बच्चे के शव को पका कर खाने से इनकार किया है. "

दोनों भाई शादीशुदा हैं लेकिन उनकी पत्नियों ने साल 2011 में नरभक्षण का मामला सामने आने के बाद उन्हें छोड़ दिया था.

अगस्त, 2013 में बीबीसी ने आरिफ़ अली से बातचीत की थी लेकिन वो किसी भी सवाल का समुचित जवाब देने में असर्मथ नज़र आए थे.

हालांकि उन्होंने बीबीसी से कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसी घटना फिर नहीं होगी.

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