अमरीकाः मुसलमानों पर नज़र रखने वाला विभाग बंद होगा

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न्यूयॉर्क पुलिस ने उस विवादास्पद विभाग को बंद करने का एलान किया है जो आतकंवाद को रोकने की मुहिम के तहत वहां रहने वाले मुसलमान समुदाय के लोगों पर गुप्त रूप से नज़र रखता था.

मुसलमान समुदाय ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली की ये कहते हुए सख़्त आलोचना की थी कि ये नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है.

डेमोग्राफ़िक यूनिट के नाम से जाना जानेवाला ये विभाग 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद 2003 में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की मदद से बनाया गया था.

इस प्रोग्राम के तहत मुसलमान कहां काम करते हैं, कहां खरीदारी करते हैं, कहां नमाज़ पढ़ते हैं, कहां उठते-बैठते हैं इन सब पर नज़र रखी जाती थी.

ऐसे लोगों पर भी नज़र रखी जाती थी जिनका 'आतंकवाद' या अपराध से दूर-दूर का नाता नहीं था.

साल 2011 में एपी समाचार एजेंसी ने इस पर कई रिपोर्टें प्रकाशित की थीं और इस पर संघीय अदालत में दो मुकदमे भी दायर किए गए थे.

बहिष्कार

हज़ारों मुसलमानों ने न्यूयॉर्क में इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था और न्यूयॉर्क के मेयर की तरफ़ से आयोजित सालाना धार्मिक सभा का भी बहिष्कार किया गया था.

वॉशिंगटन में कांग्रेस के 34 सदस्यों ने भी इस मामले की संघीय जांच की मांग की थी और न्याय विभाग ने भी कहा था कि वो मुसलमान समुदाय और उनके साथ काम करनेवालों की शिकायतों की छानबीन कर रहे हैं.

न्यूयॉर्क के मेयर बिल ब्लेज़ियो ने एक बयान जारी करते हुए कहा है, "ये सुधार पुलिस और जिनके लिए वो काम करते हैं उन समुदायों के रिश्तों में जो तनाव है उन्हें कम करने में कारगर साबित होंगे."

उनका कहना था कि पुलिस और आम नागरिक अब मिलकर उन लोगों के ख़िलाफ़ काम कर सकते हैं जो सही मायने में बुरे लोग हैं.

माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम को बंद करने का फ़ैसला न्यूयॉर्क पुलिस के नए प्रमुख ने लिया है और इसे ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद जो अमरीकी ख़ुफ़िया निगरानी शुरू हुई उसमें आ रहे बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है.

संदिग्ध गतिविधि

अमरीकी नागरिकों की निजी जानकारी और ईमेल्स पर नज़र रखनेवाले एनएसए के कार्यक्रमों में भी बदलाव लाए जा रहे हैं.

नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं और एफ़बीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी न्यूयॉर्क पुलिस के इस कार्यक्रम की ये कहते हुए आलोचना की थी कि इससे देश की सुरक्षा को ख़तरा पहुंचता है क्योंकि मुसलमान समुदाय सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा नहीं कर पाता.

नए पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता ने कहा है कि इस जनवरी से ही इस यूनिट ने काम करना बंद कर दिया है और उसके अधिकारियों का तबादला दूसरे विभागों में कर दिया गया है.

उन्होंने कहा है कि आनेवाले दिनों में पुलिस की कोशिश होगी कि वो स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क में रहें ताकि उनसे से किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हासिल की जाए.

नागरिक अधिकारों के लिए काम करनेवाली संस्थाओं और मुसलमान समुदाय के नेताओं ने पिछले हफ़्ते भी न्यूयॉर्क पुलिस प्रमुख से मुलाक़ात की थी जहां इस विभाग को बंद किए जाने की चर्चा हुई थी.

फ़ैसले का स्वागत

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Image caption अमरीकी नागरिकों की निजी जानकारी और ईमेल्स पर नज़र रखनेवाले एनएसए के कार्यक्रमों में भी बदलाव लाए जा रहे हैं.

न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज़ यूनियन की प्रमुख डोना लिबरमैन ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि इस ख़ुफ़िया निगरानी से आपसी रिश्ते ख़राब हुए थे.

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि अब सबको एक ही चश्मे से देखने की नीति ख़त्म होगी. बेगुनाह नागरिकों पर नज़र रखने के बजाए अब पुलिस सिर्फ़ उन्हें ही निशाना बनाएगी जिन पर शक होगा."

मुसलमानों के लिए काम करनेवाली संस्था काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेंशस ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि अब पुलिस को इस पूरे कार्यक्रम से जो नुकसान हुआ है उसे ख़त्म करने के लिए काम करना चाहिए.

बयान में कहा गया है, "हम न्यूयॉर्क पुलिस और मेयर से सुनना चाहेंगे कि अब ये पूरी नीति ही ख़त्म कर दी गई है और अब किसी भी धार्मिक समुदाय की इस तरह से निगरानी नहीं की जाएगी."

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