सऊदी अरब: महिलाओं के हुक्का पीने के हक़ पर बहस

दुबई में हुक्का पीती महिला इमेज कॉपीरइट Getty

क्या हुक्का कैफ़े में किसी महिला को पुरूष के साथ होना चाहिए? सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर इन दिनों ये बहस तेज़ है.

ये बहस ट्वीटर पर एक तस्वीर के आने के बाद शुरू हुई है. इस तस्वीर में सऊदी अरब के एक कैफ़े के बाहर लगे एक साइन बोर्ड को दिखाया गया है जिसमें कहा गया है महिलाओं को अंदर जाने की इजाज़त तो है लेकिन सिर्फ़ किसी पुरूष साथी के साथ.

पिछले सप्ताहांत से देश में इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है.

प्रतिबंध

ट्वीटर पर टैग किया गया है, "महिलाओं का बिना किसी पुरूष साथी या अभिभावक के हुक्का पीने पर यहां प्रतिबंध लगा हुआ है."

इस टैग को लेकर इस पर 80 हज़ार ट्वीट्स आ चुके हैं.

कई महिलाएं इससे खुश नहीं थीं और व्यंग्य के साथ उन्होंने इसका जवाब दिया.

एक महिला ने ट्वीट किया "आप सभी हमें यह बता रहे हैं कि हम साथी के बिना बाथरूम भी न जाएं". एक दूसरी महिला ने ट्वीट किया, "मेरे अभिभावक जब शौचालय में हों तो क्या मुझे हुक्के का कश लेना चाहिए? और जब तक वह वापस नहीं आ जाते मुझे दो बार हुक्का नहीं जलाना चाहिए,".

कुछ पुरुषों ने भी इस फ़ैसले का मजाक उड़ाया है. एक ट्वीट में कहा गया है, "मेरा किराया प्रति घंटे 50 सऊदी रियाल होगा."

समर्थन

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लेकिन कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इस कदम का समर्थन भी किया है.

उदाहरण के लिए कुछ लोगों ने ट्वीट किया है, "यह एक अच्छा निर्णय है और इसका मक़सद लड़कियों के बीच धूम्रपान के ख़तरे को कम करना है. कुछ लड़कियां जो अपने माता पिता के पीठ पीछे धूम्रपान करने कैफ़े जाती हैं वे नहीं जा पाएंगी,".

सऊदी अरब में अभिभावकों की अनिवार्यता हर क्षेत्र में जरुरी बताई गई. इसके तहत पर्यटन, कार्यक्षेत्र, चिकित्सा प्रक्रियाओं और शादी सहित हर तरह की चीजों के लिए एक महिला को एक पुरुष अभिभावक से अनुमति हासिल करने की आवश्यकता होती है.

ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट में इसे "राज्य में महिलाओं के अधिकारों की प्राप्ति में सबसे महत्वपूर्ण बाधा" के रूप में माना गया है.

सदाचार को बढ़ाने और दुराचार को रोकने के लिए गठित आयोग जिसे आम तौर पर 'धार्मिक पुलिस' के रूप में जाना जाता है के निर्देश पर यह साइन बोर्ड कैफ़े के बाहर लगाया गया है.

हालांकि आयोग के एक प्रवक्ता ने एक समाचार पत्र से कहा है कि उनके निर्देश को गलत समझा गया है. उनके कहने का आशय 18 साल की कम उम्र की लड़कियों के लिए था न कि किसी भी उम्र की औरतों के लिए.

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