यमन: हवाई हमले में तेरह चरमपंथियों की मौत

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यमन में शनिवार को हुए एक हवाई हमले में अल क़ायदा के तेरह संदिग्ध चरमपंथी मारे गए.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक़ हमला अल बैद प्रांत में संदिग्ध चरमपंथियों के क़ाफ़िले पर हुआ. हमले के वक़्त संदिग्ध चरमपंथी कारों में सफ़र कर रहे थे.

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ एक अन्य कार में सवार तीन नागरिकों की भी इस हमले में मौत हुई है.

हमला किस तरह किया गया इस बारे में अभी ज़्यादा जानकारी मौजूद नहीं है लेकिन अमरीका यमन में कई बार ड्रोन हवाई हमले कर चुका है.

हाल ही में अल बैद प्रांत में चरमपंथ संबंधी कई गंभीर घटनाएं हुई हैं. इसी सप्ताह एक संदिग्ध अल क़ायदा चरमपंथी ने एक डिप्टी गवर्नर की घर से निकलते वक़्त गोली मारकर हत्या कर दी थी.

ताज़ा घटना के बारे में यमन के रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा है कि कई संदिग्ध चरमपंथी हवाई हमले में मारे गए हैं.

मौत

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से एक सुरक्षा सूत्र ने कहा, "अल बैद के सावमा इलाक़े में चरमपंथियों की कारों को हवाई हमले का निशाना बनाया गया जिसमें 13 चरमपंथियों की मौत हो गई."

अमरीका ने यमन स्थित अरब प्रायद्वीप में अल क़ायदा (एक्यूएपी) के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ कर दिया है.

यमन उन कुछ देशों में से एक है जहाँ अमरीका ड्रोन हमले करने की बात स्वीकार करता है. हालाँकि अमरीका इस बारे में अधिक जानकारी नहीं देता है.

पिछले महीने यमन के राष्ट्रपति अब्दरबूह मंसूह हादी ने देश में ड्रोन के इस्तेमाल का बचाव किया था. उन्होंने कहा था कि इससे अल क़ायदा की गतिविधियों को सीमित करने में मदद मिली है. उन्होंने यह भी कहा था कि 'ड्रोन हमलों में कुछ ग़लतियाँ हुई हैं जिनके लिए हम माफ़ी माँगते हैं.'

आलोचना

ड्रोन हमलों में नागरिकों की मौत के कारण मानवाधिकार संगठन इनकी आलोचना और विरोध करते रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ दिसंबर में दो बारातों पर हुए ड्रोन हमलों में 16 नागरिकों की मौत हो गई थी और 10 घायल हो गए थे.

इन मौतों के बाद यमन की सरकार ने ड्रोन हमले रोकने के लिए वोट दिया था लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि यमन की सरकार अमरीकी ड्रोन हमले रोकने में सक्षम नहीं है.

एक्यूएपी को दुनियाभर में अल क़ायदा का सबसे ख़तरनाक संगठन माना जाता है और 2011 में यमन के दक्षिणी इलाक़ों में इसका ख़ासा प्रभाव हो गया था.

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